विश्व पर्यावरण दिवस पर मां कोलकाली दरबार में 72 घंटे का महायज्ञ होगा शुरू

Published by : AMIT KUMAR SINH Updated At : 01 Jun 2026 9:15 AM

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Munger News : पहाड़, हरियाली, आध्यात्मिक ऊर्जा और मां काली की असीम कृपा. मुंगेर के अमझर स्थित कोल काली मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है. यही वजह है कि हर साल विश्व पर्यावरण दिवस पर यहां विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया जाता है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग पहचान देता है.

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मुंगेर के जमालपुर से विजय कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Munger News : मुंगेर जिले के जमालपुर प्रखंड अंतर्गत अमझर पहाड़ी की तलहटी में स्थित मां कोलकाली का दरबार श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस दिव्य स्थल को मां चरण शक्ति दिव्य पीठ के नाम से भी जाना जाता है. अंग्रेजी शासनकाल से यहां धार्मिक गतिविधियां संचालित होती रही हैं, जबकि वर्ष 2001 से नियमित रूप से सुबह-शाम माता काली की पूजा-अर्चना की जा रही है. विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर यहां होने वाले विशेष धार्मिक कार्यक्रमों ने इस मंदिर को एक अलग पहचान दिलाई है.

प्रकृति और अध्यात्म का अनूठा संगम है मां कोलकाली का दरबार

अमझर पहाड़ी के समीप स्थित यह शक्तिपीठ हरियाली और प्राकृतिक वातावरण के बीच बसा हुआ है. यहां सुबह हंसराज पंडित तथा शाम में सातो यादव उर्फ राजेश यादव द्वारा नियमित पूजा-अर्चना की जाती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि मां कोलकाली के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है.

विश्व पर्यावरण दिवस पर शुरू होगा 72 घंटे का श्रीराम धुन महायज्ञ

माता कोलकाली पूजा समिति के अनुसार 5 जून से यहां 72 घंटे का श्रीराम धुन महायज्ञ शुरू होगा. महायज्ञ के शुभारंभ पर सुबह पांच बजे 501 कन्याओं की भव्य मंगल कलश शोभायात्रा निकाली जाएगी. यह शोभायात्रा कोलकाली दरबार से निकलकर लक्ष्मणपुर, जगदीशपुर, जहांगीरा, फरीदपुर, रामचंद्रपुर, नया टोला मासूमगंज, रघुनाथपुर और माताडीह होते हुए पुनः मंदिर परिसर पहुंचेगी.इससे पहले 4 जून को माता कोलकाली की विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे. आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है.

फायरिंग रेंज और आनंद मार्ग मुख्यालय के बीच स्थित है मंदिर

माता कोलकाली का दरबार ऐतिहासिक और भौगोलिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है. मंदिर के समीप ही अंग्रेजों के समय से संचालित फायरिंग रेंज स्थित है, जहां सुरक्षा बलों के जवान प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं. वहीं विश्व के अनेक देशों में सक्रिय आनंद मार्ग प्रचारक संघ का मुख्यालय आनंद संभूति मास्टर यूनिट भी इसी क्षेत्र में स्थित है.

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बेहतर व्यवस्था

मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था की गई है. यहां कुआं और समरसेबल बोरिंग दोनों उपलब्ध हैं. साथ ही मंदिर तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क का निर्माण भी हो चुका है, जिससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा मिल रही है.

5 जून से 10 जून तक लगेगा भव्य मेला

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 जून से 10 जून तक मंदिर परिसर में भव्य मेले का आयोजन किया जाएगा. मेले में बड़े और छोटे झूले, नौका झूला तथा अन्य मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र होंगे. समिति के कार्यकारिणी अध्यक्ष शंभू पासवान और सचिव शैलेंद्र मंडल ने बताया कि आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति के सदस्य लगातार तैयारी में जुटे हुए हैं.

मंगलवार और शनिवार को उमड़ती है सबसे अधिक भीड़

स्थानीय लोगों के अनुसार प्रत्येक मंगलवार और शनिवार को माता कोलकाली के दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है. दिनभर पूजा-अर्चना और दर्शन का सिलसिला चलता रहता है. धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक समरसता का यह केंद्र आज पूरे क्षेत्र में श्रद्धा का प्रतीक बन चुका है.

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