भोजपुर के गड़हनी कॉलेज में विवाद, प्राचार्य नियुक्ति पर शिक्षकों ने जताया विरोध

Published by : Ragini Sharma Updated At : 01 Jun 2026 10:28 AM

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Arrah News: जन सहकारी डिग्री कॉलेज, बराप, गड़हनी, भोजपुर में स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति नियमानुसार नहीं हुई है और इसे नियमों की अनदेखी कर धनबल के आधार पर किया गया है.

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Arrah News: (नरेंद्र प्रसाद सिंह) भोजपुर के जन सहकारी डिग्री कॉलेज, बराप, गड़हनी में स्थायी प्राचार्य पद पर नियुक्ति के बाद विवाद खड़ा हो गया है. पूर्व प्रभारी प्राचार्य और अन्य शिक्षकों ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई है और कहा है कि यह नियुक्ति नियमानुसार नहीं की गई है. पूर्व प्रभारी प्राचार्य डॉ. संजय कुमार राय, अजय कुमार चौबे, सुरेश कुमार सिंह, ओम प्रकाश सिंह, कुमार अरविंद कुमार सिंह समेत अन्य शिक्षकों ने आरोप लगाया कि प्राचार्य बनने का समाचार उन्हें अखबारों के माध्यम से ही मिला. उन्होंने इसे आपत्तिजनक कार्य शैली बताया और कहा कि शिक्षकों को नियुक्ति की पूर्व जानकारी नहीं दी गई.

नियमानुसार योग्यता का अभाव

शिक्षकों का कहना है कि उपलब्ध तथ्यों के अनुसार यह नियुक्ति नियमों एवं योग्यता संबंधी प्रावधानों के अनुरूप नहीं प्रतीत होती है. डॉ. अरविंद कुमार पंकज, जिन्हें प्राचार्य बनाया गया है, जन सहकारी डिग्री कॉलेज, बराप में कभी भी नियमित शिक्षक नहीं रहे हैं. शिक्षकों का यह भी कहना है कि डिग्री कॉलेज के प्राचार्य पद के लिए विश्वविद्यालय अधिनियम, यूजीसी के प्रावधानों और अन्य नियमों के अनुसार शैक्षणिक एवं प्रशासनिक योग्यता होना आवश्यक है. इंटर कॉलेज में प्राचार्य का अनुभव डिग्री कॉलेज के स्थायी प्राचार्य के लिए पर्याप्त योग्यता का प्रमाण नहीं माना जा सकता.

चयन प्रक्रिया का उल्लंघन

शिक्षकों ने बताया कि विश्वविद्यालय अधिनियम संशोधन 2013 के अनुसार संबंधित कॉलेज में शिक्षक और प्राचार्य का चयन अनुमोदित होना आवश्यक है। 57 ए और 57 बी के अंतर्गत चयन प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है, जिसका पालन इस नियुक्ति में नहीं हुआ है. उनका आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर और धनबल के आधार पर यह नियुक्ति की गई है, जिससे शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.

शिक्षकों की प्रतिक्रिया

शिक्षकों ने कहा कि यदि कॉलेज प्रशासन और विश्वविद्यालय नियमों का पालन कर चयन प्रक्रिया को उचित रूप से लागू नहीं करता है, तो वे इस मामले को उच्च शिक्षा विभाग और संबंधित विश्वविद्यालय तक ले जाने पर मजबूर होंगे. उन्होंने इस नियुक्ति को शैक्षणिक समुदाय और कॉलेज के हित के खिलाफ बताया.

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