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संविधान से मिले बराबरी के अधिकार ने बदली महिलाओं की स्थिति, संघर्षों से मिली आज की पहचान

Updated at : 09 Mar 2026 11:24 PM (IST)
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संविधान से मिले बराबरी के अधिकार ने बदली महिलाओं की स्थिति, संघर्षों से मिली आज की पहचान

संविधान से मिले बराबरी के अधिकार ने बदली महिलाओं की स्थिति, संघर्षों से मिली आज की पहचान

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मुंगेर. बीआरएम महिला कॉलेज के हिंदी विभाग द्वारा सोमवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ””””वर्तमान में महिलाओं की स्थिति”””” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया. इस संगोष्ठी के माध्यम से वक्ताओं ने महिलाओं के ऐतिहासिक संघर्ष और वर्तमान उपलब्धियों पर विस्तार से प्रकाश डाला. कार्यक्रम की अध्यक्षता दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ वंदना कुमारी ने की.

संविधान व संघर्ष सशक्तिकरण की मुख्य आधारशिला

मुख्य वक्ता के रूप में जमालपुर कॉलेज, जमालपुर के हिंदी विभाग की सहायक प्राध्यापिका डॉ चंदा कुमारी ने शिरकत की. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज महिलाएं जिस बेहतर स्थिति में हैं, वह उनके लंबे संघर्षों का परिणाम है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह सब इसलिए संभव हो सका क्योंकि भारतीय संविधान ने देश के सभी नागरिकों को बराबरी का सम्मान व अधिकार दिया है. इसी संवैधानिक सुरक्षा ने महिलाओं के लिए प्रगति के द्वार खोले हैं.

प्रगतिशील पुरुषों के योगदान को किया गया याद

अध्यक्षता कर रही डॉ वंदना कुमारी ने कहा कि महिलाओं की वर्तमान उन्नति में प्रगतिशील विचार वाले पुरुषों का अतुलनीय योगदान रहा है. उन्होंने डॉ भीमराव आंबेडकर, महात्मा ज्योतिबा फुले, राजा राममोहन राय, स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी जैसे महापुरुषों के विचारों को याद करते हुए कहा कि इनके प्रयासों के बिना नारी सशक्तिकरण की राह इतनी आसान नहीं होती.

भौतिकी विभागाध्यक्ष डॉ कुमारी नेहा ने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति हमेशा तत्पर व जागरूक रहने की आवश्यकता है. वहीं जीव विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ शोभा राज और रसायनशास्त्र विभाग की डॉ वैशाली आनंद ने संयुक्त रूप से कहा कि आज महिलाओं के पास जो भी अधिकार हैं, वे सदियों के कड़े संघर्ष के बाद हासिल हुए हैं. सेमिनार के दौरान वनस्पति शास्त्र के डॉ. संदीप टाटा, इतिहास विभाग के डॉ. श्याम कुमार, उर्दू विभागाध्यक्ष डॉ. जैन शम्शी और हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. अभय कुमार ने भी विषय पर अपनी राय रखी. शोधार्थी अर्चना कुमारी और पीजी सेमेस्टर-1 की छात्रा निराली राज ने भी अपने विचार साझा किए. इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार, डॉ संगीता कुमारी, डॉ प्रीति कुमारी, डॉ सुहली सरकार, डॉ रामरेखा कुमार व छात्रा तानिया अग्रवाल सहित कॉलेज की कई अन्य छात्राएं व शिक्षक उपस्थित थे.

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RAVIKANT SINGH

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By RAVIKANT SINGH

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