मुंगेर शहर के आधी आबादी को पानी के लिए करना पड़ेगा लंबा इंतजार, अब नये सिरे से बन रही कार्ययोजना
Published by : BIRENDRA KUMAR SING Updated At : 22 May 2026 6:36 PM
नये सिरे से बन रही कार्ययोजना पर गौर करें तो मुंगेर शहर के आधी आबादी को पानी के लिए अभी ओर लंबा इंतजार करना पड़ेगा.
पेयजलापूर्ति पर पहले बह गयी अरबों रूपये, अब एक बार फिर पानी पर करोडों रूपये खर्च करने की तैयारी
मुंगेरयह कैसी विडंबना है कि मुंगेर शहर गंगा तट पर बसा हुआ और शहरवासी दशकों से शुद्ध पेयजल के लिए तरस रहे हैं. हद तो तब हुई जब समय-समय पर पेयजलापूर्ति सुनिश्चित करने को लेकर अरबों रूपये खर्च कर दिये गये, बावजूद शहरवासी प्यासे हैं. अब एक बार फिर शहरी जलापूर्ति पर करोड़ों रूपये का डीपीआर बनाने को लेकर सर्वे का काम चल रहा है. नये सिरे से बन रही कार्ययोजना पर गौर करें तो मुंगेर शहर के आधी आबादी को पानी के लिए अभी ओर लंबा इंतजार करना पड़ेगा.
मुंबई की कंपनी कर रही सर्वे, बनेगा फ्रेश डीपीआर
बुडको से मिली जानकारी के पूर्व से संचालित शहरी पेयजलापूर्ति योजना लगभग असफल है. निगम के 45 वार्ड में 15 वार्ड में जहां पानी की आपूर्ति पूरी तरह से ठप है, वहीं दूसरी ओर शेष बचे 30 वार्ड में 15 वार्ड में भी पानी की सप्लाई सही ढंग से नहीं हो पा रही. शहरी जलापूर्ति योजना को सुदृढ़ करने को लेकिर फिर से फ्रेश डीपीआर बनाने की कबायद चल रही है. जिस वार्डों में सर्वे का काम चल रहा है. मुंबई की मार्स कंपनी को सर्वे की जिम्मेदारी दी गयी है. जो पिछले एक माह से पीएचइडी द्वारा नगर निगम को सौंपे गये 13 वार्ड में सर्वे कर रही है. पुरानी पाइप लाइन कितना कारगर है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सर्वे में यह सामने आया क पुरानी पाइप लाइन पूरी तरह से फेल है. यानी नये सिरे से पाइप लाइन का काम होने की संभावना व्यक्त की गयी ही. इतना ही नहीं जिन वार्डों में पानी नहीं पहुंच रहा है, वहां क्यों और किस कारण नहीं पहुंच रहा है. इसका भी सर्वे किया जा रहा है. जानकारी के अनुसार जिन पांच जलमीनार से शहर के आधे वार्ड में पानी की आपूर्ति की जा रही है, उसके अतिरिक्त और अधिक जलमीनार निर्माण की आवश्यकता है. विभाग की ओर से बताया गया कि कंपनी द्वारा इस माह के अंत तक सर्वे कर रिपोर्ट दे दिया जायेगा. जिसके आधार पर डीपीआर तैयार कर मुख्यालय को स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा. यानी स्वीकृति, फिर से सड़क खोद कर पाइप लाइन और घरों में कनेक्शन किया जायेगा. जिसके कारण मुंगेर के आधी आबादी को पानी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है.
बनेगा 70 एमएलडी का डब्लूटीपी, नहीं मिल रही जमीन
बुडको से मिली जानकारी के अनुसार अमृत योजना के तहत कस्तूरबा वाटर वर्क्स में 34 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बना हुआ है. जिससे 45 वार्ड में पानी की आपूर्ति करना संभव नहीं है. इतना ही नहीं शहर के विभिन्न स्थानों पर बने 5 जलमीनार से पानी की आपूर्ति सही तरीके से नहीं हो पा रही है. क्योंकि जलमीनार से निकलने वाला पानी दूर और ऊंचाई वाले वार्डों में नहीं पहुंच पा रही है. बताया गया कि नई योजना के तहत 70 एमएलडी का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा. जिसके लिए कम से कम 6 एकड़ जमीन चाहिए. लेकिन शहरी क्षेत्र में इतनी जमीन नहीं मिल रही है. शुक्रवार को भी महापौर कुमकुम देवी, नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता, बुडको के कार्यपालक अभियंता सत्येंद्र प्रसाद ने शहर के विभिन्न क्षेत्रों में 6 एकड़ सरकारी जमीन ढूढ़ने निकली थी. लेकिन कहीं भी 6 एकड़ जमीन अब तक नहीं मिल सकी है.
अरबों खर्च के बावजूद प्यासे हैं शहरवासी
वर्ष 2007 शहरी जलापूर्ति योजना शुरू किया गया. पीएचइडी की देखरेख में जिंदल ने अक्टूबर 2018 में कार्य पूर्ण भी कर लिया. लेकिन ठेकेदारी प्रथा की भेंट चढी योजना ने कुछ दिनों में ही दम तोड़ दिया और इन वार्डों में पानी की सप्लाई अब भी बंद है. जिस पर करोड़ों रूपये खर्च किये गये थे. जबकि फरवरी 2025 में विभागीय निर्देश पर पीएचइडी ने अपनी योजना नगर निगम मुंगेर को हैंडओवर कर दिया था. इधर अमृत योजना के तहत 198.76 करोड़ से शहरी पेयजलापूर्ति योजना पूर्ण की गयी. लेकिन यह शहर के आधी आबादी को भी एक टाइम का पानी उपलब्ध नहीं करा पा रही है. 39,921 में कनेक्शन तो है, लेकिन मुश्किल से 15 हजार घरों में भी एक टाइम का पानी नहीं मुश्किल से मिल पा रही है. जबकि लगभग 18 हजार घर कनेक्शन से वंचित है.
कहते हैं कार्यपालक अभियंता
बुडको के कार्यपालक अभियंता सत्येंद्र प्रसाद ने कहा कि शहरी जलापूर्ति योजना को सुदृढ़ीकरण प्रदान करने के लिए मुंबई की कंपनी मार्स को जिम्मेदारी सौंपी गयी है. इस माह के अंत तक सर्वे रिपोर्ट कंपनी सौंप देंगी और उस पर डीपीआर बना कर मुख्यालय को स्वीकृति के लिए भेजा जायेगा. अगली गर्मी में शतप्रतिशत घरों में पानी की आपूर्ति बहाल हो जायेगी. जिस पर काम तेजी से चल रहा है.
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