मुंगेर में मां सती की आंख जहां गिरी, वो शक्तिपीठ आज भी भक्तों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र

Published by : Pratyush Prashant Updated At : 17 May 2026 7:25 AM

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Chandika Sthan Munger

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Chandika Sthan Munger: बिहार के मुंगेर स्थित चंडिका स्थान देश के प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है. यह सिर्फ मुंगेर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार और दूसरे राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी गहरी आस्था का केंद्र है. सालभर यहां माता चंडिका के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए भक्तों की भीड़ लगी रहती है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है.

चंडिका स्थान का धार्मिक महत्व इसे देश के खास शक्तिपीठों में शामिल करता है. नवरात्र के दौरान यहां का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है और मंदिर परिसर माता के जयकारों और घंटों की ध्वनि से गूंज उठता है.

मां सती की बाईं आंख गिरने की है मान्यता

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जब भगवान शिव के अपमान से क्रोधित होकर माता सती ने अग्निकुंड में अपने शरीर का त्याग कर दिया था, तब भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करने लगे थे. उसी दौरान माता सती के अंग विभिन्न स्थानों पर गिरे, जिन्हें शक्तिपीठ माना गया.

कहा जाता है कि मां सती की बाईं आंख मुंगेर के चंडिका स्थान में गिरी थी. इसी वजह से यह स्थल देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है. यहां मां चंडिका का नेत्र पहाड़ की गुफा के अंदर स्थित है और उसी स्थान के ऊपर मंदिर का निर्माण किया गया है.

मंदिर परिसर में बसती है अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा

चंडिका स्थान सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा का बड़ा केंद्र माना जाता है. मंदिर परिसर में विभिन्न देवी-देवताओं के अलग-अलग मंदिर भी मौजूद हैं, जहां श्रद्धालु पूजा-अर्चना करते हैं.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आने वाले भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है. सुबह और शाम की आरती के समय मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

नवरात्र में लगती है लंबी कतार

वैसे तो सालभर यहां श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र के दौरान चंडिका स्थान में विशेष भीड़ देखने को मिलती है. दूर-दूर से लोग अपने परिवार की सुख-शांति और मंगल कामना के लिए यहां पहुंचते हैं.

मंदिर के घंटे और शंखध्वनि से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो जाता है. श्रद्धालु घंटों लाइन में लगकर मां चंडिका के दर्शन करते हैं और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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