धूमधाम से मनाई गई सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस की 142 वीं जयंती

Published by :BIRENDRA KUMAR SING
Published at :30 Apr 2026 8:34 PM (IST)
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धूमधाम से मनाई गई सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस की 142 वीं जयंती

संतमत के महात्मा स्वामी नरेंद्र बाबा ने कहा कि सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस महाराज 20वीं सदी के संत थे.

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जमालपुर ————————- लौह नगरी जमालपुर में कई संतमत सत्संग आश्रमों में गुरुवार को महर्षि मेंही परमहंस महाराज की परम पावन 142 वीं जयंती निष्ठापूर्वक मनाई गयी. इस अवसर पर नया गांव मुंगरौड़ा, बड़ी दरियापुर, लक्ष्मणपुर, छोटी केशवपुर एवं फरीदपुर स्थित संतमत सत्संग आश्रम द्वारा मुख्य सड़कों पर गुरु महाराज की भव्य तस्वीर के साथ प्रभात फेरी निकाली गयी. मुख्य कार्यक्रम संतमत सत्संग आश्रम नयागांव में हुआ. जहां प्रातः काल से ही प्रभात फेरी सत्संग प्रवचन भजन कीर्तन का कार्यक्रम आरंभ हो गया. प्रभात फेरी नयागांव आश्रम से निकलकर मुंगरौड़ा, बड़ी आशिकपुर, डीडी तुलसी रोड, कब्रगाह रोड, थाना रोड, ठाकुरबारी रोड, अल्बर्ट रोड, ईस्ट कॉलोनी बड्डीपाड़ा, जुबली वेल, मुंगेर रोड, दरियापुर डीह, जमालपुर सदर बाजार, मारवाड़ी पट्टी, स्टेशन रोड होते हुए वापस नयागांव आश्रम पहुंची. प्रभात फेरी में चार पहिया वाहन पर गुरु महाराज की भव्य तस्वीर को फूल माला से सजा कर रखा गया था और गाजे बाजे के साथ आध्यात्मिक नारे लगाते हुए भारी संख्या में स्त्री पुरुष एवं स्कूली बच्चे इसमें शामिल हुए. सत्संग हॉल में एक सत्संग सभा आयोजित कर गुरु महाराज के जीवन एवं उनके विभिन्न उपदेशों पर भक्तों द्वारा विस्तार से प्रकाश डाला गया. संतमत के महात्मा स्वामी नरेंद्र बाबा ने कहा कि सद्गुरु महर्षि मेंही परमहंस महाराज 20वीं सदी के संत थे. वह सर्वधर्म समन्वयकारी संत थे. उन्होंने सभी धर्म एवं पथ को एक करने का प्रयास किया. उन्होंने कुप्पाघाट की गुफा में कठिन तपस्या कर परमात्मा का साक्षात्कार किया. उनके उपदेश है कि ईश्वर एक है और ईश्वर तक जाने का रास्ता भी एक है. ईश्वर की भक्ति करने का अधिकार सबको समान है. उनके नज़रों में सभी संतों का समान आदर था. उन्होंने दर्जनों आध्यात्मिक पुस्तकों की रचना की और हजारों संतमत सत्संग आश्रम की स्थापना अपने जीवन काल में की. उनका जमालपुर से भी गहरा लगाव था और वह अपने जीवन काल में प्रत्येक वर्ष जमालपुर जाकर सत्संग का प्रचार करते थे. यही कारण है कि जमालपुर क्षेत्र सत्संगियों का गढ़ माना जाता है. इस मौके पर रामदीन बाबा, शिव नारायण मंडल, सुभाष चौरसिया, अभिमन्यु साहू, मदनलाल मंडल, मनोज कुमार भुज, नारायण पंडित, राजन कुमार चौरसिया, आशीष कुमार सहित अन्य मौजूद थे.

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