नशामुक्ति केंद्र में ड्यूटी के नाम पर खानापूर्ति
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Aug 2016 5:35 AM
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चिकित्सक से लेकर मेडिकल स्टाफ तक कर रहे दो जगह काम नशामुक्ति केंद्र में अब तक मात्र सात लोग भरती मुंगेर : सदर अस्पताल स्थित नशामुक्ति केंद्र में ड्यूटी के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है़ यहां चिकित्सक से लेकर मेडिकल स्टाफ तक एक ही समय में दो- दो जगह ड्यूटी करते हैं. […]
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चिकित्सक से लेकर मेडिकल स्टाफ तक कर रहे दो जगह काम
नशामुक्ति केंद्र में अब तक मात्र सात लोग भरती
मुंगेर : सदर अस्पताल स्थित नशामुक्ति केंद्र में ड्यूटी के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है़ यहां चिकित्सक से लेकर मेडिकल स्टाफ तक एक ही समय में दो- दो जगह ड्यूटी करते हैं. नशामुक्ति केंद्र में पदस्थापित चिकित्सक एवं परामर्शदाता तभी देखे जाते हैं, जब उन्हें आराम फरमाना होता है़ वातानुकूलित यह कक्ष आराम फरमाने के लिए उपयुक्त है. हैरत की बात यह है कि जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा सर्वे के आधार पर चिह्नित नशेड़ियों में लगभग 250 महिलाएं भी शामिल है़ं किंतु पिछले चार माह में एक भी महिला यहां इलाज के लिए नहीं आयी है. इतना ही नहीं नशामुक्ति केंद्र में अब तक मात्र सात लोग भरती हुए हैं.
कर्मी एक ड्यूटी दो
नशामुक्ति केंद्र में प्रतिनियोजित लगभग सभी कर्मी को दो- दो जगहों पर ड्यूटी में लगाया गया है़ जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ अताउर रहमान को यहां का नोडल पदाधिकारी बनाया गया है़ ब्लड बैंक के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ फैजउद्दीन को नशामुक्ति केंद्र का प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, एड्स नियंत्रण कार्यालय के परामर्शदाता आदित्य राज तथा परिवार नियोजन कार्यालय के परामर्शदाता योगेश कुमार को नशामुक्ति केंद्र का भी परामर्शदाता बनाया गया है़ अब समक्षा जा सकता है कि एक ही समय पर एक ही व्यक्ति दो- दो स्थानों पर किस प्रकार काम करते हैं. अर्थात नशामुक्ति केंद्र में ड्यूटी के नाम पर महज खानापूर्ति की जा रही है़ प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ फैजउद्दीन साहब तो एएनएम स्कूल तथा रिमांड होम के भी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी हैं.
महिला नहीं हुई है भरती
जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा चिह्नित नशेड़ियों में लगभग 250 महिलाएं भी शामिल है़ं किंतु दुर्भाग्य यह है कि अब तक एक भी महिला को इलाज के लिए नशामुक्ति केंद्र में भरती नहीं किया गया है़ नशामुक्ति केंद्र के महिला वार्ड के नाम पर काफी खर्च भी किये गये, किंतु इसका लाभ महिला नशेड़ियों को नहीं मिल पा रहा.
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि विभाग द्वारा नशामुक्ति केंद्र में पद तो सृजित कर दिया गया, किंतु एक भी पद पर स्टाफ की बहाली नहीं की गयी़ तत्काल काम चलाने के लिए अस्पताल के ही चिकित्सकों एवं मेडिकल स्टाफों को अतिरिक्त प्रभार सौपा गया है़
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