जिले में परिवार नियोजन कार्यक्रम की रफ्तार धीमी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 07 Jul 2016 5:01 AM
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तीन माह में मात्र चार प्रतिशत हुआ बंध्याकरण, गत वर्ष की उपलब्धि रही 42.47 प्रतिशत मुंगेर :परिवार नियोजन कार्यक्रम मुंगेर जिले में पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है. गत वित्तीय वर्ष में जहां मात्र 42.47 प्रतिशत की उपलब्धि रही. वहीं चालू वित्तीय वर्ष के तीन माह की उपलब्धि मात्र 4 प्रतिशत है. हाल यह […]
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तीन माह में मात्र चार प्रतिशत हुआ बंध्याकरण, गत वर्ष
की उपलब्धि रही
42.47 प्रतिशत
मुंगेर :परिवार नियोजन कार्यक्रम मुंगेर जिले में पूरी तरह फ्लॉप साबित हो रही है. गत वित्तीय वर्ष में जहां मात्र 42.47 प्रतिशत की उपलब्धि रही. वहीं चालू वित्तीय वर्ष के तीन माह की उपलब्धि मात्र 4 प्रतिशत है. हाल यह है कि विभाग ने जो गत वित्तीय वर्ष में जो 14,773 का लक्ष्य निर्धारित किया था वह लक्ष्य चालू वित्तीय वर्ष में भी लागू है. विभागीय अधिकारी व कर्मी इस दिशा में पूरी तरह उदासीन है.
तीन महीने में चार प्रतिशत बध्याकरण
चालू वित्तीय वर्ष के तीन माह में जिले भर में मात्र 4 प्रतिशत बंध्याकरण किया गया है़ इन तीन माह में जिले भर में कुल 450 लोगों का बंध्याकरण किया गया है़ मालूम हो कि पिछले वित्तीय वर्ष में जिले को 14,773 बंध्याकरण का लक्ष्य दिया गया था़ जिसमें लक्ष्य का मात्र 42.47 प्रतिशत ही उपलब्धी हासिल हो पायी थी़ उसमें भी 632 बंध्याकरण निजी क्लिनिकों में ही किये गये थे़ हालांकि इस बार विभाग द्वारा अबतक नया लक्ष्य निर्धारित नहीं किया गया है़ जिस कारण पुराने लक्ष्य को ही अबतक फॉलो किया जा रहा है़ किंतु परिवार नियोजन कार्यक्रम की यह धीमी रफ्तार को देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि 12 महीने में लक्ष्य का महज 20-25 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पायेगा़
सदर अस्पताल से आगे निजी क्लिनिक
परिवार नियोजन कार्यक्रम में निजी क्लिनिकों का अहम योगदान है़ जो सदर अस्पताल को पीछे छोड़ जाती है़ इस बार दो महीने के उपलब्धि में सदर अस्पताल में जहां मात्र 43 बंध्याकरण हो पाये हैं. वहीं निजी क्लिनिकों में 63 बंध्याकरण किये गये़ वहीं संग्रामपुर में पिछले दो महीने में कुल 41 महिलाओं का बंध्याकरण किया गया़ वहीं सबसे खराब प्रदर्शन टेटियाबंबर का है जहां एक भी बंध्याकरण नहीं किया गया़
कहते हैं सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ श्रीनाथ ने कहा कि वित्तीय वर्ष के शुरूआती महीनों में काफी कम लोग बंध्याकरण कराना चाहते हैं. जबकि डंड के दिनों व्यापक पैमाने पर बंध्याकरण किया जाता है़ इस बार पिछले साल से अधिक बंध्याकरण होने की संभावना है़
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