आपात में होगी आफत
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jul 2016 1:28 AM
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दुखद . जिला नियंत्रण कक्ष में नहीं रहते अधिकारी आपात स्थिति से निबटने के लिए राज्य सरकार के निर्देश के आलोक में स्थापित जिला नियंत्रण कक्ष बिना अधिकारी के ही संचालित हो रहा है. यूं तो यहां प्रतिदिन तीन पालियों में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों की तैनाती होती है. लेकिन महज कागज पर. दंडाधिकारी […]
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दुखद . जिला नियंत्रण कक्ष में नहीं रहते अधिकारी
आपात स्थिति से निबटने के लिए राज्य सरकार के निर्देश के आलोक में स्थापित जिला नियंत्रण कक्ष बिना अधिकारी के ही संचालित हो रहा है. यूं तो यहां प्रतिदिन तीन पालियों में दंडाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी व कर्मियों की तैनाती होती है. लेकिन महज कागज पर. दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी यहां मौजूद नहीं रहते. सिर्फ पुलिसकर्मी के भरोसे इसका संचालन हो रहा.
मुंगेर : राज्य के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक के निर्देश के आलोक में मुंगेर मुख्यालय के किला परिसर स्थित अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी कार्यालय कक्ष में जिला नियंत्रण कक्ष का स्थापना किया गया.
जहां 24 घंटे दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी के साथ ही पुलिसकर्मियों की तैनाती की गयी. ताकि आम नागरिकों के सूचना के आधार पर विधि व्यवस्था व आपराधिक मामलों में त्वरित कार्रवाई की जा सके. इसके लिए दंडाधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति भी की जाती है. लेकिन वे यहां उपस्थित नहीं होते. फलत: जिला नियंत्रण कक्ष सही रूप से संचालित नहीं हो रहा.
नहीं रहते दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी
जिला पदाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक के संयुक्त आदेश से जिला नियंत्रण कक्ष में दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी की तैनाती की जाती है. जिसमें तीन पाली प्रात: 6 बजे अपराह्न 2 बजे तक, अपराह्न 2 बजे रात के 10 बजे तक तथा रात्रि 10 बजे से प्रात: 6 बजे तक की ड्यूटी लगती है. इसके लिए सप्ताह के प्रत्येक दिन अलग-अलग अधिकारियों व पुलिस पदाधिकारियों का रोस्टर चार्ट निर्गत है. लेकिन बदहाली यह है कि दंडाधिकारी व पुलिस पदाधिकारी यहां ड्यूटी नहीं करते. सिर्फ लिपिक व कार्यालय परिचारी के भरोसे नियंत्रण कक्ष का काम चल रहा.
नियंत्रण में नहीं नियंत्रण कक्ष
जिला नियंत्रण कक्ष नियंत्रण में नहीं है. तीन मजिस्ट्रेट की यहां प्रतिनियुक्ति है जिसमें मात्र एक मजिस्ट्रेट ही अपनी सेवा दे रहे है. नियंत्री पदाधिकारी के नहीं रहने से उसके अधिनस्थ काम करने वाले भी मस्ती में रहते है. पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने जब शनिवार को नियंत्रण कक्ष का औचक निरीक्षण किया तो यहां कई अनियमितताएं पायी गयी. यहां तक कि यहां का टेलीफोन भी मृत था. उनके नाराजगी व्यक्त करने पर आनन-फानन में टेलीफोन को ठीक कराया गया. साथ ही नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था पर एसपी ने नाराजगी व्यक्त की.
एसडीओ व डीएसपी प्रभारी
जिला नियंत्रण कक्ष के प्रभार में जहां अनुमंडल पदाधिकारी सदर व अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर संयुक्त रूप से हैं. वहीं एनइपी के निदेशक अमजद अली इसके वरीय प्रभारी हैं. बावजूद नियंत्रण कक्ष सही रूप से काम नहीं कर रहा.
कहते हैं एसडीओ
सदर अनुमंडल पदाधिकारी डॉ कुंदन कुमार ने बताया कि नियंत्रण कक्ष में तैनात दंडाधिकारी के नहीं रहने की शिकायत मिली है. इस मामले में जिलाधिकारी द्वारा संज्ञान लिया गया है. ड्यूटी में मौजूद नहीं रहने वाले दंडाधिकारी व कर्मियों के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी.
पहले वाहन मंगाते हैं तब करते हैं कूच
जिला नियंत्रण कक्ष में 1/4 का आर्म्स गार्ड एवं 1/4 का लाठी पार्टी की प्रतिनियुक्ति है, ताकि कोई भी सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके. दंगा एवं आपदा की स्थिति में तत्काल दंडाधिकारी, पुलिस अधिकारी व सशस्त्र बल मौके वारदात पर पहुंच सके. लेकिन नियंत्रण कक्ष की जो व्यवस्था है वह बेहाल है.
सूचना मिलने पर पुलिस पार्टी को कहीं जाने के लिए कोई वाहन की व्यवस्था नहीं है. पुलिस लाइन से वाहन मंगाया जाता है तब जाकर ये लोग घटनास्थल की ओर कूच करते है. इस प्रक्रिया में लगभग एक से दो घंटे लग जाते हैं जो नियंत्रण कक्ष के उद्देश्य को ही खत्म कर देता है.
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