बेटे-बहू की प्रताड़ना से तंग वृद्ध मां ने गंगा में लगायी छलांग
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 May 2016 8:47 AM
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मुंगेर : आधुनिकता की चकाचौंध में मशगूल इस समाज में मां-बेटे जैसे रिश्ते भी तार-तार हो रहे हैं. वृद्ध माता-पिता को कलियुगी बेटे बोझ समझने लगे हैं. उनके लिए यह रिश्ता कोई मायने नहीं रखता. जन्म देने वाली मां को भी प्रताड़ित किया जा रहा. इसका जीता जागता उदाहरण है 75 वर्षीय उर्मिला देवी. उसने […]
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मुंगेर : आधुनिकता की चकाचौंध में मशगूल इस समाज में मां-बेटे जैसे रिश्ते भी तार-तार हो रहे हैं. वृद्ध माता-पिता को कलियुगी बेटे बोझ समझने लगे हैं. उनके लिए यह रिश्ता कोई मायने नहीं रखता. जन्म देने वाली मां को भी प्रताड़ित किया जा रहा. इसका जीता जागता उदाहरण है 75 वर्षीय उर्मिला देवी. उसने बेटा-बहू की प्रताड़ना से तंग आकर शुक्रवार को गंगा में छलांग लगा दी. लेकिन उसे बचा लिया गया. उर्मिला देवी को इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल में भरती कराया गया है.
संग्रामपुर थाना क्षेत्र के नवगांई धौरी गांव निवासी स्व हरिकिशोर सिंह की पत्नी उर्मिला देवी लाठी के सहारे चलती है. शुक्रवार की सुबह वह बबुआ घाट पहुंची और बबुआघाट से जनमडिगरी जाने वाले लोगों के साथ नाव पर बैठ गयी. जब नाव गंगा के बीचो-बीच पहुंची तो वृद्ध महिला ने नाव से गंगा में छलांग लगा दी.
नाव पर सवार जनमडिगरी गांव निवासी सत्यजीत कुमार भी उसके पीछे गंगा में कूद पड़ा और उसे बचा लिया. नाव से पुन: उसे वापस बबुआ घाट पर लाया गया. जहां वह दहाड़ मार कर रोने लगी. उसने जो आपबीती सुनायी, तो उसे सुन हर आंख नम हो गयी. हर कोई कलियुगी बेटे को कोसने लगे. घटना की सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस बबुआ घाट पहुंची और महिला को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भरती कराया.
वृद्धा की जुबानी, बेटे के प्रताड़ना की कहानी
वृद्ध महिला ने कपकपाते होठों से जो कहानी बतायी वह वर्तमान सामाजिक व्यवस्था पर लोगों को सोचने के लिए मजबूर कर दिया. उसने बताया कि उसके पति की मौत हो चुकी है. तीन बेटे हैं. बड़ा बेटा पटना में काम करता है और देवघर में रहता है. जबकि छोटा बेटा आर्मी में है. वह अपने मंझले बेटे के साथ रहती है जो अधिवक्ता है. जबकि उसकी पतोहू शिक्षिका है. मैं पोता-पोती को घर पर पालती हूं. लेकिन बेटा और पतोहू मुझे प्रताड़ित करते हैं.
तंग हो कर मैंने मरने की सोची. मैं घर से 2300 रुपये लेकर निकल गयी. सुलतानगंज पहुंची और वहां से रिक्शा कर सुलतानगंज गंगा घाट पहुंची. मैंने गंगा में डूबने का प्रयास किया तो लोगों ने मुझे रोक लिया. मैं इतनी परेशान थी कि सुलतानगंज से गाड़ी पकड़ कर मुंगेर आयी और बबुआघाट में गंगा में कूद पड़ी. पानी पीने का प्रयास किया लेकिन मुझे बचा लिया गया. मैं अब जीना नहीं चाहती, लेकिन भगवान मुझे मौत भी नहीं दे रहे.
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