तीन बेटियों की शादी की सता रही चिंता

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 27 May 2016 4:05 AM

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मुंगेर : गढ़ी नौवागढ़ी निवासी विद्युतकर्मी मनोज कुमार झा की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया. पत्नी निभा को तीन-तीन बेटियों की शादी की चिंता सता रही है. अस्पताल परिसर में मृतक की पत्नी व बेटियों की करुण क्रंदन से उपस्थित लोगों के आखों से आंसू […]

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मुंगेर : गढ़ी नौवागढ़ी निवासी विद्युतकर्मी मनोज कुमार झा की सड़क दुर्घटना में हुई मौत के बाद पूरे परिवार पर दुख का पहाड़ टूट गया. पत्नी निभा को तीन-तीन बेटियों की शादी की चिंता सता रही है. अस्पताल परिसर में मृतक की पत्नी व बेटियों की करुण क्रंदन से उपस्थित लोगों के आखों से आंसू टपकने लगे. निभा अपने पति के मौत से शोक में डूब गयी है. वह बार-बार एक ही बात कह रही थी कि यहां डॉक्टर यदि इलाज करते तो मेरे पति की जान बच जाती.

कैसे हुई घटना . मनोज कुमार झा मोटर साइकिल से नौवागढ़ी बाजार से वापस घर लौट रहा था. तभी एक मोटर साइकिल से उसकी टक्कर हो गयी. दोनों मोटर साइकिल सवार घायल हो गये. हेलमेट नहीं रहने के कारण मनोज गंभीर रुप से घायल हो गया. जबकि एसपी कार्यालय में कार्यरत कर्मी सच्चिदानंद सिंह हैलमेट पहने हुए था.
जिसके कारण उसे कम चोटें आयी. दोनों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां से सच्चिदानंद को उसके सहकर्मी लोगों ने रेफर करने पर भागलपुर भेज दिया. लेकिन मनोज के साथ कोई पुरुष परिजन नहीं रहने के कारण सदर अस्पताल में उसका समुचित इलाज नहीं हो पाया और उसकी मौत हो गयी.
उजागर हुई अस्पताल की कुव्यवस्था . मनोज झा की मौत के बाद एक फिर से अस्पताल की कुव्यवस्था की पोल खुल गयी है. मृतक की पत्नी निभा कुमारी ने बताया कि सुबह 5:45 बजे उसने अपने पति को अस्पताल में भरती कराया. डॉक्टर के. रंजन उस समय मौजूद थे. उन्होंने प्रारंभिक इलाज किया. किंतु कुछ देर बाद जब उसकी स्थिति बिगड़ने लगी तो मैं डाक्टर को बुलाने चली गयी. लेकिन डॉक्टर ने पुरजे पर एक सुई लिखकर इमरजेंसी वार्ड भेज दिया.
ड्यूटी पर तैनात मेडिकल स्टाफ को जब मैंने पुरजा दिखाया तो उन्होंने शांति से बैठने को कहा. इंतजार करते करते सुबह के 8 बज गये और चिकित्सक व मेडिकल स्टाफ की ड्यूटी बदल गयी. जब डॉ रमण कुमार इमरजेंसी वार्ड पहुंचे तो उन्हें घायल को देखने कहा. उन्होंने मेरे पति को मृत घोषित कर दिया. जबकि उसकी धड़कन चल रही थी. मैंने फिर से संतुष्टि के लिए जीओपीडी में तैनात डॉ रामप्रीत सिंह, डॉ अजय कुमार से अपने पति को देखने के लिए कहा तो वे दोनों अपनी कुर्सी से उठकर अस्पताल से बाहर चले गये. मेरे चीखने चिल्लाने पर ड्यूटी पर तैनात डॉ रमण भी चलते बने. मैं रोती रही लेकिन कोई भी चिकित्सक व
स्वास्थकर्मी देखने तक नहीं आये. काफी देर बाद डॉ सुधीर कुमार, डॉ पीएम सहाय व डॉ रईस इमरजेंसी वार्ड पहुंचे और बारी-बारी से जांच किया और उन्हें मृत घोषित कर दिया. चिकित्सकों के इस रवैये से एक बार फिर से अस्पताल की बदहाल व्यवस्था की पोल खुल गयी है.
आक्रोशित लोगों ने किया हंगामा . जानकारी होने पर मृतक के घर गढी नौवागढी से जहां ग्रामीण पहुंचे वहीं मृतक के ससुराल कासिम बाजार थाना क्षेत्र के महद्दीपुर से भी ग्रामीण पहुंच गये. मृतक की पत्नी ने जब चिकित्सक की लापरवाही की जानकारी दी तो परिजन व ग्रामीण आक्रोशित हो गये और हंगामा प्रारंभ कर दिया. आक्रोशित लोगों ने इंमरजेंसी में लगे टेबल, दवा काउंटर का शीशा तोड़ दिया. लगभग 11:45 बजे तक हंगामा के कारण अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा बाधित रहा.
चिकित्सक के विरुद्ध पुलिस में शिकायत . निभा कुमारी ने कोतवाली थाने में आवेदन देकर कई चिकित्सक पर इलाज में लापरवाही बरतने के कारण पति के मौत का आरोप लगाया. उसने डॉ के रंजन, डॉ रमण कुमार, डॉ रामप्रीत सिंह, डॉ अजय कुमार एवं ड्यूटी पर तैनात स्वास्थकर्मी को इसके लिए जिम्मेदार बनाते हुए कार्रवाई की मांग की. उसका कहना है कि अगर चिकत्सक लापरवाही नहीं बरतते तो उसके पति की मौत नहीं होती.
परिवार पर टूटा गमों का पहाड़ . मनोज की मौत के बाद परिवार टूट चुका है. मनोज ने अपने पीछे पत्नी व तीन बेटियों को छोड़ गया है. दो बेटियां अंशु कुमार एवं खुशी कुमारी अपने ननिहाल महद्दीपुर में रह कर पढ़ाई करती है. बड़ी बेटी बीए पार्ट-1 में पढ़ती है. जबिक छोटी बेटी अपनी मां के साथ गढ़ी गांव में ही रहती है. क्योंकि मृतक की पत्नी निभा कुमारी नियोजित शिक्षिका है. निभा को अब बेटियों के शादी की चिंता सता रही है. वह दहाड़ मार कर रो रही थी.
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