एसएफसी-बैंकों के बीच फंसे किसान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Apr 2016 4:52 AM

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धान खरीद. धान बेचने पर 48 घंटे के अंदर राशि देने का दावा फेल बिहार सरकार किसानों को पैक्स में धान बेचने पर 48 घंटे के अंदर राशि देने का दावा किया. लेकिन सरकार के यह दावा फेल हो गया है. किसान पैक्स, मिलर, एसएफसी व बैंकों की पेच में यहां के किसान पीस रहे […]

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धान खरीद. धान बेचने पर 48 घंटे के अंदर राशि देने का दावा फेल

बिहार सरकार किसानों को पैक्स में धान बेचने पर 48 घंटे के अंदर राशि देने का दावा किया. लेकिन सरकार के यह दावा फेल हो गया है. किसान पैक्स, मिलर, एसएफसी व बैंकों की पेच में यहां के किसान पीस रहे हैं.
तारापुर : धान की राशि भुगतान को लेकर किसान लगातार इस चिलचिलाती धूप में बैंक का चक्कर लगा-लगा कर थक गये. लेकिन धान की राशि का भुगतान अब तक नहीं हो पाया है. मुश्कीपुर के किसान सुनील यादव एवं इंद्रदेव यादव मुंगेर-जमुई सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक पहुंचे. वे पूरी तरह से थक चुके थे.
उन्होंने बताया कि महीने भर से बैंक का चक्कर लगा रहे है. लेकिन धान की राशि अब तक नहीं दी गयी. अफजलनगर के भोभी लाल यादव, सिसुआ के गौरव कुमार, सविता देवी, विषय के राम किशोर सिंह, रामपुर विषय पंचायत के निर्वतमान मुखिया दीपक कुमार, धौनी के सुधीर चौधरी, नारायणपुर के किसान निरंजन सिंह ने बताया कि हमलोगों ने पैक्स में धान बेचा. ताकि सरकार द्वारा निर्धारित दर का लाभ उठा सके.
हमें कहा गया था कि आप धान पैक्स को दे और 48 घंटे में राशि भुगतान प्रारंभ करे. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. उल्टे राशि के लिए बैंक का चक्कर लगाना पड़ रहा है. अगर बिचौलिया के हाथों धान बेचते तो कुछ रुयये का झटका लगता लेकिन हाथों-हाथ राशि का भुगतान हो जाता है. पैक्स को धान बेच कर हमने बहुत बड़ी गलती कर दी है. राशि के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. घर के कई काम है जो कर्ज में रुपये लेकर पूरा करना पर रहा है.
कहते हैं पैक्स अध्यक्ष
पैक्स अध्यक्ष रवि रंजन कुमार, अरुण सिंह ने बताया कि हमारे सीसी खाते से राशि निकासी कर किसानों के खाते में चला गया है. हमें उसका सूद भी भरना पड़ रहा है. लेकिन बैंक किसानों को राशि नहीं दे रही है. जिसके कारण पैक्स अध्यक्षों की छवि भी धूमिल हो रही है.
कहते हैं बैंक प्रबंधक
को-ऑपरेटिव बैंक के शाखा प्रबंधक सुनील कुमार बैंक नहीं आये थे. जब बैंक में उपस्थित सहायक शाखा प्रबंधक शिव शंकर से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि एसएफसी के जिला प्रबंधक द्वारा राशि बैंक के खाते में नहीं डाला गया है. यूको बैंक जो जिला अग्रणी बैंक है हमें सही तरीके से राशि नहीं देती है. सभी किसानों को राशि देने के लिए एक करोड़ रुपये की आवश्यकता है. लेकिन यूको बैंक द्वारा 5-6 लाख रुपये ही दिया जाता है.
कहते हैं सहकारिता पदाधिकारी
प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी राम कुमार ने से जब इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि 29 मार्च को ही एडभाईस के अनुसार सभी किसानों के खाते में राशि हस्तांतरित कर दी गयी है. किसानों को राशि नहीं दी जा रही है. तो यह गंभीर मामला है. वे अपने स्तर से इसकी पड़ताल करेंगे.
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