अप्रैल में ही सूख गये तालाब

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Apr 2016 8:22 AM

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मुंगेर : मौसम की मार से जहां जल स्तर नीचे भाग रहा है, वहीं छोटे-छोटे नदी व बड़े-बड़े तालाब सूख चुके हैं. मुंगेर जिले में 541 तालाब पूरी तरह सुख चुके हैं. जिसमें 180 मत्स्य विभाग के सरकारी तालाब भी हैं. तालाबों के उचित रखरखाव नहीं होने के कारण बिना पानी का तालाब बन गया […]

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मुंगेर : मौसम की मार से जहां जल स्तर नीचे भाग रहा है, वहीं छोटे-छोटे नदी व बड़े-बड़े तालाब सूख चुके हैं. मुंगेर जिले में 541 तालाब पूरी तरह सुख चुके हैं. जिसमें 180 मत्स्य विभाग के सरकारी तालाब भी हैं. तालाबों के उचित रखरखाव नहीं होने के कारण बिना पानी का तालाब बन गया है. फलत: मछली उत्पादन ठप हो गया है और इस पर आश्रित मछुआरों का व्यवसाय भी चौपट हो रहा है.
सूख चूके है 85 प्रतिशत तालाब : जिले में मत्स्य विभाग के 204 जल कर हैं. जिसमें 160 तालाब है. जबकि निजी क्षेत्र में 517 तालाब है. जिसमें 85 प्रतिशत तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं. भागते जल स्तर के कारण लगातार तालाब सूखते जा रहे है. कुछ तालाब वैसे बचे है जहां बोरिंग से पानी तालाब में डालने की व्यवस्था है. लेकिन वैसे मत्स्य पालक भी इस भीषण गरमी के कारण तालाब को मोटर के सहारे पानी भरने में असमर्थ हो रहे हैं.
बारिश का करना होगा इंतजार : तालाब मालिकों को अब बारिश का ही सहारा है. उन्हें बारिश के लिए इंतजार करना होगा.
तभी तालाब में पानी आयेगी और मछली व्यवसाय को पुन: किया जा सकेगा. इस बार मानसून ठीक ठाक रहने के आसार है. लेकिन अब तक पानी आसमान से नहीं गिरना प्रारंभ हुआ है. इतना ही नहीं अप्रैल में ही इतनी तेज धूप है कि तेजी से जल स्तर भाग रहा है और तालाब व जलकर सूखते जा रहे हैं.
लाखों का व्यवसाय प्रभावित : तालाब और संपर्क नदी-नाले के सूखने के कारण मछली व्यवसाय पर बुरा असर पर रहा है. जिसके कारण मछुआरों के समक्ष रोजी-रोटी की समस्या उत्पन्न हो गयी है. आंकड़े बताते है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में 9.47 हजार मिट्रीक टन मछली का उत्पादन हुआ था. लेकिन अप्रैल माह में ही तालाब व जल कर सुखने के कारण उत्पादन बिल्कुल ही ठप हो गया.
कहते हैं अधिकारी
जिला मत्स्य पदाधिकारी गणेश राम ने कहा कि इन दिनों अमूमन हर वर्ष पानी की समस्या उत्पन्न हो जाती है. अभी तालाब सूख गये हैं और बारिश होने के बाद ही अब मछली पालन हो पायेगा.
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