विश्व होमियोपैथ दिवस पर विशेष
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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गरीबों के लिए सस्ता होमियोपैथ चिकित्सा बिहार में होमियोपैथ चिकित्सा पर संकट के बादल मुंगेर : पूरी दुनिया में 10 अप्रैल को विश्व होमियोपैथ दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और जर्मनी में तो होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ हैनिमैन की याद में उनके नाम से ट्रेन भी चलायी जा रही. जबकि […]
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गरीबों के लिए सस्ता होमियोपैथ चिकित्सा
बिहार में होमियोपैथ चिकित्सा पर संकट के बादल
मुंगेर : पूरी दुनिया में 10 अप्रैल को विश्व होमियोपैथ दिवस के रूप में मनाया जा रहा है और जर्मनी में तो होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति के जनक डॉ हैनिमैन की याद में उनके नाम से ट्रेन भी चलायी जा रही. जबकि बिहार में होमियोपैथ चिकित्सा पर संकट का बादल छा गया है. पिछले दस दिनों से राज्य के होमियोपैथ चिकित्सक जहां सरकार के नीति के विरुद्ध आंदोलित हैं वहीं राज्य में होमियोपैथ दवा बनाने वाली 13 कंपनियों की लाइसेंस रद्द कर दिया गया है. जबकि इस चिकित्सा पद्धति को गरीबों के लिए सस्ता व सुलभ माना जाता है.
बिहार में 600 % होमियोपैथ का ग्रोथ : बिहार होमियोपैथिक चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में काफी अग्रणी रहा है और यहां प्रतिवर्ष लगभग 600 प्रतिशत का ग्रोथ है. अर्थात प्रतिवर्ष 6 गुणा अधिक लोग होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति को अपना रहे. जबकि भारत में यह ग्रोथ 400 प्रतिशत का है. होमियोपैथ चिकित्सा को सस्ता व सुलभ मानते हुए गरीब व मध्यम वर्ग के लोग अधिक अपना रहे. डॉ हैनीमेन ने भी कहा था कि यह चिकित्सा पद्धति गरीबों के लिए कारगर सिद्ध होगा. कम खर्च में लोग अधिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कर पायेंगे.
10 अप्रैल को ही लागू हुआ था ड्रग्स एक्ट : भारत में पहला ड्रग्स कानून 10 अप्रैल 1940 को लागू हुआ था. माना जाता है कि डॉक्टर हैनीमेन की जयंती के कारण ही तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत ने 10 अप्रैल को ही यहां ड्रग्स एक्ट लागू किया था. चूंकि होमियोपैथ चिकित्सा पद्धति सबसे सस्ती व लोकप्रिय चिकित्सा रही है. इसलिए इसी दिन का चयन ड्रग्स एक्ट लागू करने में किया गया था. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि ‘’ होमियोपैथ दुनिया का सबसे सस्ता, संपूर्ण व सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है. ‘’ लेकिन बिहार सरकार के नये कानून से राज्य में इस चिकित्सा पद्धति को ठेस पहुंची है.
नहीं मिल रही सरकारी स्तर पर बढ़ावा : होमियोपैथ चिकित्सा को जनमानस ने तो स्वीकार कर रखा है. किंतु सरकारी स्तर पर इस चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा नहीं मिल रहा. यही कारण है कि राज्य में जहां सरकारी स्तर पर एक मात्र होमियोपैथ मेडिकल कॉलेज मुजफ्फरपुर में है. वहीं जो प्राइवेट होमियोपैथ मेडिकल कॉलेज का संचालन हो रहा उसकी स्थिति अत्यंत ही बदहाल है. प्राइवेट होमियोपैथ मेडिकल कॉलेज में संसाधन की कमी के साथ ही पढ़ाई की भी व्यवस्था अच्छी नहीं है. इन कॉलेजों का उपयोग छात्र सिर्फ डिग्रियां प्राप्त करने के लिए ही कर रहे.
अस्पतालों में नहीं है होमियोपैथ दवाएं : बिहार सरकार ने एक नीति के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में आयुष चिकित्सक की तो बहाली की. किंतु इन चिकित्सकों द्वारा रोगियों के इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित नहीं है. आयुष चिकित्सक के तहत होमियोपैथ, आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सकों की बहाली की गयी. किंतु एलोपैथ दवा को छोड़ अस्पताल में दूसरी किसी भी पद्धति की दवाएं रोगियों के लिए अबतक उपलब्ध नहीं हो पायी है. इतना ही नहीं इन चिकित्सकों का उपयोग कहीं न कहीं प्रतिरक्षण कार्य में किया जा रहा और जहां कहीं भी ये रोगियों के इलाज करने के लिए बैठते हैं तो वे भी इक्के-दुक्के एलोपैथ दवाएं ही पुरजे पर लिख देते हैं.
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