भेड़-बकरियों की तरह स्कूली बस में ठुसे जाते हैं बच्चे
भेड़-बकरियों की तरह स्कूली बस में ठुसे जाते हैं बच्चे फोटो संख्या : 13फोटो कैप्सन : बस में खड़े होकर स्कूल जाते बच्चे प्रतिनिधि, बरियारपुर शिक्षा ग्रहण करना बच्चों के लिए आसान नहीं है. सरकारी विद्यालय तो दूर अभिभावकों से पढ़ाई व सुविधा के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले निजी विद्यालय की भी स्थिति […]
भेड़-बकरियों की तरह स्कूली बस में ठुसे जाते हैं बच्चे फोटो संख्या : 13फोटो कैप्सन : बस में खड़े होकर स्कूल जाते बच्चे प्रतिनिधि, बरियारपुर शिक्षा ग्रहण करना बच्चों के लिए आसान नहीं है. सरकारी विद्यालय तो दूर अभिभावकों से पढ़ाई व सुविधा के नाम पर मोटी रकम वसूलने वाले निजी विद्यालय की भी स्थिति बदहाल है. सरस्वती विद्या मंदिर के बच्चों को घर से विद्यालय लाने व ले जाने के लिए जो बसें चलायी जा रही उसमें भेड़-बकरियों की तरह बच्चों को ठुसा जाता है. मुंगेर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर में पढ़ने वाले बरियारपुर के बच्चों के लिए विद्यालय की ओर से बस की व्यवस्था की गयी है. जिसमें सीट से दोगुने बच्चे को ढोया जाता है. जाहिर है कि जितने बच्चे सीट पर बैठ कर विद्यालय आते-जाते हैं उतने ही बच्चे बस में खड़े रहते हैं. अभिभावक मनोज कुमार, शिव नारायण सिंह, गौतम कुमार, सुनील कुमार ने बताया कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा बतौर वाहन शुल्क 700 रुपये लिये जाते हैं. किंतु उन्हें 18 से 20 किलोमीटर का सफर खड़े होकर ही तय करना पड़ता है. ऐसी परिस्थिति में बच्चे वाहन पर धक्के खाकर विद्यालय पहुंचते हैं.
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