आसमान निहार रहे किसान, सूखे की आशंका से बैठ रही सांसें

Updated at : 18 Jun 2019 7:14 AM (IST)
विज्ञापन
आसमान निहार रहे किसान, सूखे की आशंका से बैठ रही सांसें

मुंगेर : जिले में मौसम की बेरुखी से किसान परेशान हैं. बारिश की आस में आसमान की ओर किसान टकटकी लगाये हैं कि कब आसमान से आग के बदले बारिश की बूंदें खेतों में गिरे और धान के बिचड़े की बुआई शुरू करें. लेकिन खेतों में पड़ रही दरार को देख किसानों का कलेजा फट […]

विज्ञापन

मुंगेर : जिले में मौसम की बेरुखी से किसान परेशान हैं. बारिश की आस में आसमान की ओर किसान टकटकी लगाये हैं कि कब आसमान से आग के बदले बारिश की बूंदें खेतों में गिरे और धान के बिचड़े की बुआई शुरू करें. लेकिन खेतों में पड़ रही दरार को देख किसानों का कलेजा फट रहा है और सूखे की आशंका से सांसें बैठने लगी है. पानी के अभाव में खेतों में दरारें पड़ने लगी है.

किसान बारिश के लिए आसमान निहार रहे. बारिश नहीं होने से किसानों की उम्मीद टूट गयी है. औसत से काफी कम यानी नहीं के बराबर बारिश होने से किसानों के समक्ष विकट स्थिति पैदा हो गयी है. जिले में धान रोपनी का लक्ष्य 33 हजार हेक्टेयर भूमि में रखा गया है. कृषि विभाग की माने तो अब तक 6380.72 हेक्टेयर यानि 17.34 प्रतिशत ही धान के बिचड़े की रोपाई हो पायी है. संयुक्त निदेशक शस्य मुंगेर के सहायक मोनी चौधरी ने जुन में राज्य को भेजे अपने रिर्पोट में कहा कि 31 मई तक लगभग 15 मिमी बारिश हुई है.
जबकि 139 एमएम बारिश होने का अनुमान था. अगर रिपोर्ट की माने तो मुंगेर जिला में 10 एमएम बारिश भी नहीं हुई है. जबकि रोहिणी नक्षत्र को बिचड़ा गिराने के लिए उपयुक्त माना जाता है. कृषि वैज्ञानिकों ने 15 जून से 10 जु़लाई के बीच बिचड़ा गिराने की बात कही है. लेकिन पानी के अभाव में किसान हताश है. मौसम विभाग के अनुसार 20 जून तक बिहार में मॉनसून प्रवेश करेगा. मॉनसून आने के बाद भी ही धान का बिचड़ा गिराने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है.
कहते हैं जिला कृषि पदाधिकारी
जिला कृषि पदाधिकारी महेश प्रसाद सिंह ने कहा कि मुंगेर में मॉनसून आधारित खेती है. बारिश नहीं होने से धान का बिचड़ा अब तक खेतों में नहीं के बराबर डाला गया है. माना जाता है कि दो-तीन दिनों में मॉनसून प्रवेश करेगा. अभी धान के बिचड़ा बुआई के लिए पर्याप्त समय है. 10 जुलाई तक बिचड़ा गिराया जा सकता है.
आसमान से बरस रही आग, खेतों में उड़ रही धूल
मुंगेर में खेती बारिश पर आश्रित है. आषाढ़ शुरू होने वाला है और रोहिणी नक्षत्र को बीते एक सप्ताह हो गया है. लेकिन पानी के अभाव में किसान धान का बिचड़ा खेतों में नहीं डाल सके हैं. अब भी आसमान से बारिश के बदले आग बरस रही है. जिसके कारण जिस खेत में धान की फसल लहलहाना चाहिए था उस खेत में धूल उड़ रही है. सुखे की आशंका से किसानों की सांसें बैठने लगी हैं. क्योंकि तारापुर, संग्रामपुर, असरगंज, हवेली खड़गपुर, टेटियाबंबर जो धान का कटोरा कहा जाता है. वहां अब तक बिचड़ों की भी बुआई नहीं हुई है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन