ट्रेड यूनियन एकता कमेटी ने सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर बोला हल्ला

Updated at : 03 May 2019 7:36 AM (IST)
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ट्रेड यूनियन एकता कमेटी ने सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों पर बोला हल्ला

जमालपुर : रेल नगरी जमालपुर में बुधवार को ट्रेड यूनियन एकता कमेटी के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया गया. इस दौरान अहले सुबह जहां प्रभात फेरी निकाली गयी, वहीं संध्याकाल में स्टेशन परिसर में आम सभा का आयोजन किया गया. जिसमें वक्ताओं ने सरकार के मजदूर विरोधी नीतियों पर हल्ला बोला. आम सभा की […]

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जमालपुर : रेल नगरी जमालपुर में बुधवार को ट्रेड यूनियन एकता कमेटी के तत्वावधान में अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया गया. इस दौरान अहले सुबह जहां प्रभात फेरी निकाली गयी, वहीं संध्याकाल में स्टेशन परिसर में आम सभा का आयोजन किया गया. जिसमें वक्ताओं ने सरकार के मजदूर विरोधी नीतियों पर हल्ला बोला. आम सभा की अध्यक्षता इआरएमयू कारखाना शाखाध्यक्ष विश्वजीत कुमार ने की. अध्यक्ष मंडली में चांदसी पासवान, केडी यादव, मुरारी प्रसाद और सखीचंद मंडल शामिल थे.

शहीद वेदी पर पुष्पार्पण और 2 मिनट के मौन के बाद मुख्य अतिथि केंद्रीय उपाध्यक्ष राम नगीना पासवान ने मजदूर दिवस इतिहास पर चर्चा करते हुए कहा कि इसकी शुरुआत वर्ष 1923 को लेबर किसान पार्टी ऑफ हिंदुस्तान ने की थी. जबकि इसकी शुरुआत 1 मई 1886 को ही शिकागो शहर में हो गयी थी. वक्ताओं ने कहा कि आज सरकार की गलत नीतियों के कारण मजदूर, किसान, व्यवसायी एवं बेरोजगार वर्ग त्रस्त है.
किसान एवं बेरोजगार आत्महत्या कर रहे हैं. जिस प्रकार गुलाम भारत में गोरे काले के आधार पर वेतन निर्धारण होता था, उसी तर्ज पर आज अनुबंध के नाम पर समान कार्य के लिए समान वेतन नहीं दिया जाता. 8 घंटा काम करने के कानून का पालन नहीं होता. अधिकतर प्राइवेट कंपनियों में अभी 2 से 3 हजार रुपये मासिक मजदूरी पर लोग 12 घंटा से अधिक काम करने पर विवश हैं.
केवल केंद्रीय विभागों में ही 5 लाख से अधिक रिक्तियां हैं. पूरे देश में 24 लाख पदों पर बहाली नहीं की गयी है. सरकार पूंजीपतियों को प्रश्रय देती है. जिसके कारण वर्ष 2016 में देश का लगभग 58% संपत्ति पूंजीपतियों के पास थी, जो 2017 में बढ़कर 73% हो गया.
वर्ष 2017 में अरबपतियों की संख्या 101 थी, जो वर्ष 2018 में बढ़कर 119 हो गयी. आज भी 67 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करते हैं. 20 करोड़ लोग झुग्गियों में और इतने ही फुटपाथ पर जिंदगी काट रहे हैं.
वक्ताओं ने कहा कि भारतीय रेल देश की जीवन रेखा है. जिसके विकास से ही देश का विकास संभव है. डॉ विवेक देवराय कमेटी की रिपोर्ट पूंजीपतियों को सहयोग करने वाली है. परंतु सरकार इसे धीरे-धीरे लागू कर रही है. अगर यह रिपोर्ट पूर्णतया लागू हो जाती है तो रेलवे बचने वाला नहीं है.
सरकार ने भारतीय रेल में कैटरिंग, स्टेशन सफाई कार्य, बोगी अनुरक्षण कार्य, प्रिंटिंग प्रेस, ट्रेनों में बिछावन बांटने जैसे कार्य को प्राइवेट एजेंसी को सौंप दिया है. जिसके कारण वर्ष 1990 में रेलवे में कार्यरत कर्मियों की संख्या 15 लाख से घटकर मात्र 8 लाख पर पहुंच चुकी है. इससे पहले एकता कमेटी के तत्वावधान में प्रातः स्टेशन परिसर से प्रभातफेरी निकाली गई.
जो शहर के प्रमुख मार्गों से भ्रमण कर मुख्य रेलवे अस्पताल चौक पर संपन्न हो गई. प्रभात फेरी में शामिल मजदूर लाल झंडे से लैस थे तथा मजदूर एकता जिंदाबाद, दुनिया के मजदूरों एक हो और मई दिवस के शहीदों तुझे हमारा लाल सलाम के नारे लगा रहे थे.
मौके पर विभिन्न यूनियन के ओमप्रकाश साह, टूरा मुर्मू, सत्यजीत कुमार, ज्योति कुमार, मुरारी प्रसाद, अनिल प्रसाद यादव, संजीव कुमार, गोपाल जी, रंजीत कुमार सिंह, अंशुमन कुमार, दीपक सिन्हा, बहाउद्दीन, एसके ओझा, शैलेंद्र कुमार, शिवव्रत गौतम और पूरन सोरेन सहित दर्जनों मजदूर उपस्थित थे.
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