भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव को किया नमन
Updated at : 25 Mar 2019 6:43 AM (IST)
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मुरलीगंज : नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत महावीर स्थान जय रामपुर चौक शनिवार की शाम शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव का शहीद दिवस मनाया गया. भाकपा-माले मुरलीगंज एवं खेग्रामस राष्ट्रीय परिषद सदस्य केके सिंह राठौर ने बताया कि शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव का शहीद दिवस हम लोग प्रतिवर्ष मनाते हैं. कार्यक्रम […]
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मुरलीगंज : नगर पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत महावीर स्थान जय रामपुर चौक शनिवार की शाम शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव का शहीद दिवस मनाया गया. भाकपा-माले मुरलीगंज एवं खेग्रामस राष्ट्रीय परिषद सदस्य केके सिंह राठौर ने बताया कि शहीद-ए-आजम सरदार भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव का शहीद दिवस हम लोग प्रतिवर्ष मनाते हैं.
कार्यक्रम का प्रारंभ शहीद भगत सिंह के तैल चित्र पर माल्यार्पण कर हुआ. इसके बाद संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस अवसर मंच संचालन का प्रभास कुमार ने किया.
इस अवसर पर विभिन्न वक्ताओं ने अपने अपने विचार प्रस्तुत किये. वहीं देश भक्ति से ओतप्रोत एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. सुशील कुमार रघु ने शहीद भगत सिंह के जीवन पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में नगर वासियों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली. मौके पर दिनेश राम, विजय कुमार, दिनेश यादव आदि की सहभागिता रही.
सावित्री नंदन पब्लिक स्कूल में मना शहादत दिवस : शंकरपुर. प्रखंड स्थित सावित्री नंदन पब्लिक स्कूल में शहादत दिवस पर स्कूली बच्चों व शिक्षकों ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी. श्रद्धांजलि के बाद विद्यालय प्राचार्य आमोद ने कहा कि भारत वर्ष में कई शहीदों काे शहीद दिवस पर श्रद्धांजलि दी जाती है.
पर यह दिल को झकझोर देने वाला दिन रहा है, क्योंकि 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दी गयी थी. ये ऐसे नौजवान थे, जिन्होंने भारतवर्ष के लिए ना जाने कितने सपने देखे थे. उन्होंने कहा कि भगत सिंह ने तो शक्तिशाली ब्रिटिश सरकार से भी मुकाबला किया. भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को बंगा गांव जिला लायलपुर पंजाब में हुआ था वह जगह आज पाकिस्तान में है.
उन्होंने नौजवान भारत सभा, हिंदुस्तान सोशलिस्ट, रिपब्लिकन एसोसिएशन संगठन में काम किया और जालियांवाला बाग हत्याकांड के बाद मीलों चल कर वहां पहुंचे थे. वे जेल के दिनों में भी क्रांतिकारी काम में लगे रहते थे. जेल में भगत सिंह ने करीब दो साल रहे.
इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रान्तिकारी विचार व्यक्त करते रहे. जेल में रहते हुए उनका अध्ययन बराबर जारी रहा. उनके उस दौरान लिखे गये लेख व सगे संबन्धियों को लिखे गये पत्र आज भी उनके विचारों के दर्पण हैं.
अपने लेखों में उन्होंने कई तरह से पूंजीपतियों को अपना शत्रु बताया है. उन्होंने लिखा कि मजदूरों का शोषण करने वाला चाहे एक भारतीय ही क्यों न हो, वह उनका शत्रु है. उन्होंने जेल में अंग्रेज़ी में एक लेख भी लिखा जिसका शीर्षक था मैं नास्तिक क्यों हूं. जेल में भगत सिंह व उनके साथियों ने 64 दिनों तक भूख हडताल की.
उनके एक साथी यतीन्द्रनाथ दास ने तो भूख हड़ताल में अपने प्राण ही त्याग दिये थे. फांसी को जाते समय भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु मेरा रंग दे बसंती चोला गाते हुए फांसी पर चढ़ गये. प्राचार्य ने कहा कि आज भी उन्हें याद कर हमें बल मिलता है. मौके पर शिक्षक शोभा, गुड़िया, प्रियम, प्रियंका, कल्पना, इं नीरज, राहुल, संजय, विनोद, मो अलीमुद्दीन सहित अन्य लोग मौजूद थे.
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