जल संरक्षण के अभाव में हजारों एकड़ भूमि रह जाती है परती

Updated at : 25 Mar 2019 6:37 AM (IST)
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जल संरक्षण के अभाव में हजारों एकड़ भूमि रह जाती है परती

टेटिया बंबर : जल प्रबंधन के लिए मुंगेर जिला भले ही नजीर बन गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत हवेली खड़गपुर प्रखंड के गायघाट, दरियापुर, इस्लामपुर एवं बसबिट्टी सहित अन्य गांव में जल संरक्षण के लिए काम तो किये गये और भू-क्षरण और […]

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टेटिया बंबर : जल प्रबंधन के लिए मुंगेर जिला भले ही नजीर बन गया हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत हवेली खड़गपुर प्रखंड के गायघाट, दरियापुर, इस्लामपुर एवं बसबिट्टी सहित अन्य गांव में जल संरक्षण के लिए काम तो किये गये और भू-क्षरण और वर्षा के जल को संरक्षित करने के लिए बड़ी संख्या में पक्का चेक डैम व साद अवरोधक बांध का निर्माण करोड़ों की लागत से किया गया है. लेकिन इन योजनाओं का लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है.

क्षेत्र के किसानों की मानें तो प्रखंड क्षेत्र के दरियापुर इस्लामपुर, बसबिट्टी, गायघट, मोतीतरी सहित अन्य गांवों में जल संरक्षण के नाम पर सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किया जा चुका है. लेकिन इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पाता है.
यहां के किसान अब भी भगवान भरोसे कृषि करने को बाध्य हैं, क्योंकि जल संरक्षण के नाम पर किया गया कार्य केवल खानापूर्ति बनकर रह गया है. प्रखंड के नक्सल प्रभावित गंगटा पंचायत में जल संरक्षण के लिए सबसे अधिक कार्य किया गया है, बावजूद वह वर्षा का जल रोकने में सक्षम नहीं है.
किसान भोला यादव ने बताया कि गायघट के समीप घघरी नदी में के अलावा अन्य जल छाजन द्वारा जल संरक्षण कार्य वर्षा का जल रोकने में अक्षम साबित हो रहा है. केंद्र सरकार के नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय की ओर से मुंगेर को बेहतर जल प्रबंधन के लिए जल पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.
बिहार सरकार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार के अनुसार राष्ट्रीय जल पुरस्कार योजना के तहत पूर्वी जोन में मुंगेर जिले को तीसरा स्थान दिया गया है. बावजूद यहां का हजारों एकड़ भूमि सिंचाई के अभाव में आज भी परती रह रहा है.
जल संरक्षण के लिए जल छाजन द्वारा नक्सल प्रभावित गंगटा पंचायत में कार्य प्रारंभ होने के बाद यहां के किसानों में उम्मीद जगी कि अब जंगली इलाके के पहाड़ी क्षेत्रों के खेतों में लगी फसल लहलहाएगी. लेकिन जल छाजन द्वारा किये गये कार्य से किसानों को नहीं के बराबर फायदा मिल रहा है.
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