सफाई को ठेंगा दिखा रहा एनजीओ, दीवार व पंखों पर वर्षों से जमा है मकड़ी का जाला, वार्डों में फैली रहती है दुर्गंध
Updated at : 18 Mar 2019 1:04 AM (IST)
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मुंगेर : सदर अस्पताल में साफ-सफाई के लिए आउटसोर्स के तहत एनजीओ की व्यवस्था की गयी है. जिसकी जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल परिसर को पूरी तरह से स्वच्छ बनाये रखे. इसके लिए एनजीओ को निर्धारित रेट के अनुसार राशि का भुगतान भी किया जाता है. किंतु अस्पताल प्रशासन की उदासीनता तथा एनजीओ की मनमानी […]
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मुंगेर : सदर अस्पताल में साफ-सफाई के लिए आउटसोर्स के तहत एनजीओ की व्यवस्था की गयी है. जिसकी जिम्मेदारी है कि वह अस्पताल परिसर को पूरी तरह से स्वच्छ बनाये रखे. इसके लिए एनजीओ को निर्धारित रेट के अनुसार राशि का भुगतान भी किया जाता है.
किंतु अस्पताल प्रशासन की उदासीनता तथा एनजीओ की मनमानी के कारण अस्पताल परिसर में बेहतर साफ-सफाई का ख्याल नहीं रखा जा रहा है.
हाल यह है कि अस्पताल के विभिन्न वार्डों तथा विभागों में जहां दीवारों व पंखों पर मकड़ी का जाला जमा हुआ है, अच्छी तरह से सफाई नहीं होने के कारण वार्डों में दुर्गंध फैला रहता है. जिसके कारण वार्ड में प्रवेश करने के दौरान लोगों को नाम पर रूमाल रखना पड़ता है.
साफ-सफाई के मामले में संबंधित एनजीओ सदर अस्पताल को ठेंगा दिखाने का काम कर रही है, बावजूद अस्पताल प्रशासन उस पर कार्रवाई करने के बदले मौन समर्थन देने का काम कर रही है.
अस्पताल में नहीं होती है बेहतर सफाई: सदर अस्पताल के साफ-सफाई की जिम्मेदारी एक निजी संस्था को सौंपी गयी है. जिन्हें प्रतिदिन तीन बार सफाई का कार्य करना है. किंतु सफाई के नाम पर सदर अस्पताल में महज खानापूर्ति की जाती है. सुबह आठ बजे की सफाई के दौरान एक छोटे से बोतल के ढक्कन फिनायल से एक वार्ड में पोंछा लगा कर सफाई कर दी जाती है.
वहीं दोपहर तथा संध्याकाल में बूंद भर भी फिनायल का प्रयोग नहीं किया जाता है. वहीं वार्ड के बाहर आंगन में दिन में एक बार झाड़ू लगा कर छोड़ दिया जाता है.
जिसके कारण अस्पताल परिसर में जगह-जगह पर खून लगे कॉटन तथा इस्तेमाल किये हुए सिरिंज बिखरे नजर आते हैं. ऐसे में आधे-अधूरे सफाई कार्य पर भी पूरी राशि का भुगतान कर दिया जाता जाता है.
दीवार व पंखों पर लगा हुआ है मकड़ी का जाला: सदर अस्पताल के विभिन्न वार्डों के दीवारों तथा पंखों पर काफी लंबे वक्त से मकड़ी का जाला लगा हुआ है. ऐसा प्रतीत होता है कि संबंधित एनजीओ को दीवार व पंखों पर लगे जाले को हटाने का दायित्व नहीं दिया गया हो. कई बार चलते हुए पंखा से मकड़े के जाले का कचड़ा मरीजों के उपर गिर जाता है. जिससे मरीजों को संक्रमण होने का खतरा बना रहता है.
मालूम हो कि वर्ष 2017 में जब स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सदर अस्पताल के निरीक्षण को पहुंचे थे, तब उन्होंने इसी तरह से दीवारों तथा पंखों पर फैली गंदगी को देख कर आपत्ति जतायी थी और आगे से कम से कम प्रत्येक सप्ताह दीवारों व पंखों पर जमे मकड़ी के जाले को साफ करने का निर्देश भी दिया था. किंतु स्वास्थ्य मंत्री के चले जाने के बाद स्थिति यथावत है.
वार्डों में फैली रहती है दुर्गंध: सदर अस्पताल में मुकम्मल साफ-सफाई नहीं होने के कारण विभिन्न वार्डों में गंदगी फैली रहती है. जिसमें प्रसव केंद्र, महिला सर्जिकल वार्ड, पुरुष सर्जिकल वार्ड, पुरुष मेडिकल वार्ड, महिला मेडिकल वार्ड शामिल है. इन वार्डों में प्रवेश करते ही एक अजीब तरह की गंध आने लगता है. नजीजतन उक्त वार्डों में प्रवेश करते ही लोगों को रूमाल से अपना नाक ढ़ंक लेते हैं.
हैरत की बात तो यह है कि अस्पताल प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी उक्त वार्डों का निरीक्षण करने के बावजूद बदहाल सफाई व्यवस्था के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई करने से परहेज करते हैं. अस्पताल प्रशासन किसी कारण से सफाई के जिम्मेदार एनजीओ पर किस कारण से अपना दबाव नहीं बना पाते हैं, यह सोचनीय है.
कहते हैं अस्पताल उपाधीक्षक : अस्पताल उपाधीक्षक डॉ सुधीर कुमार सिन्हा ने बताया कि वे फिलहाल बाहर हैं, अस्पताल पहुंचते ही वे अस्पताल के विभिन्न वार्डों का निरीक्षण करायेंगे. सफाई के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जायेगी.
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