मुंगेर : लोगों की दुआएं आयीं काम, सन्नो को सकुशल देख छा गयीं खुशियां

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Aug 2018 8:10 AM

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मासूम बच्ची दो दिन पहले पिता के साथ आयी थी नाना के घर मुंगेर : मुंगेर जिले में मंगलवार शाम 4.05 मिनट पर 110 फुट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की सन्नो को बुधवार रात 9.35 बजे यानी 29.30 घंटे के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया. सन्नो को सकुशल देख हर किसी के […]

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मासूम बच्ची दो दिन पहले पिता के साथ आयी थी नाना के घर
मुंगेर : मुंगेर जिले में मंगलवार शाम 4.05 मिनट पर 110 फुट गहरे बोरवेल में गिरी तीन साल की सन्नो को बुधवार रात 9.35 बजे यानी 29.30 घंटे के बाद सकुशल बाहर निकाल लिया गया. सन्नो को सकुशल देख हर किसी के चेहरे पर खुशियां छा गयीं. इस दौरान घटनास्थल कोतवाली थानांंतर्गत मुर्गियाचक मोहल्ले में हजारों की भीड़ लगी रही.
सन्नो अपने ननिहाल आयी हुई थी, जहां घर के आंगन में एक बोरवेल में गिर गयी थी. बोरवेल में बच्ची को जिंदा रखने के लिए ऑक्सीजन पहुंचाया गया था. वह दो दिन पहले ही अपने पिता के साथ नाना उमेश नंदन साह के घर आयी थी. पुलिस प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम को बुलावा भेजा. एनडीआरएफ की टीम को भी बुलाया गया था. आईटीसी के चेयरमैन वाईपी सिंह ने घटनास्थल पर आधुनिकतम लाइट की व्यवस्था की थी, ताकि बोरवेल में गिरी बच्ची के हालात को देखा जा सके.
29 घंटे से गमगीन था पूरा मुहल्ला, घरों में नहीं जले चूल्हे
सन्नो के 29 घंटे से बोरवेल में गिरे रहने से पूरा मुहल्ला गम में डूबा था. मुर्गियाचक, गांधी चौक, रामपुर भिखारी, पूरबसराय सहित मुर्गियाचक से सटे आधे दर्जन मुहल्लों में मातमी सन्नाटा पसर था. मुर्गियाचक मुहल्ले के लोग रात भर जगे रहे.
मंगलवार को जहां मुहल्ले के घरों में खाना नहीं बना, वहीं बुधवार को भी चूल्हे नहीं जले. बच्चों को लोग बिस्कुट, चूड़ा एवं बाजार से खाने की सामग्री खरीद कर खिलाते देखे गये. मुहल्ले के अधिकतर लोग मंगलवार की रात से भूखे रहे, वहीं बुधवार को भी लोगों को खाना नसीब नहीं हुआ. लोगों ने बताया कि हमारे मुहल्ले की बच्ची थी. उसका चेहरा सामने नाचता था. इसके कारण पेट की भूख ही मर गयी.
सिर्फ हमलोग सना के बाहर निकलने की दुआ कर रहे थे. इधर सना के मूल घर वीर कुंवर सिंह कॉलोनी में भी बच्ची के गम में कई घरों में चुल्हा नहीं जला. लोगों के आंखों से आंसू भी टपक रहे थे.
मंगलवार को खेलते समय बोरवेल में जा गिरी थी बच्ची
उमेश ने अपने घर के आगे वाले कमरे में समरसेबुल के लिए बोरवेल करवाया था. पाइप डाल कर आधा बोरवेल में ग्रेबुल डाला जा चुका था. उसे एक पतले बोरे से ढ़क दिया गया था. मंगलवार को उमेश वहां बैठा हुआ था. उसकी तीन वर्षीया नतिनी सन्नो वहीं पर खेल रही थी. इसी क्रम में उसका पांव फिसल गया और वह बोरवेल में 25 फुट की गहराई पर फंस गयी.
बोरवेल में डाले गये पाइप के हिलने-डोलने से बच्ची फिसल कर और नीचे चली गयी, जिसकी दूरी 43 फुट मापी गयी है. इसके बाद से उसे सकुशल निकालने का प्रयास शुरू हो गया.
राज्यपाल ने दी बधाई
पटना. राज्यपाल सत्यपाल मलिक व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने बोरवेल में गिरी मासूम बच्ची सन्नो की प्राणरक्षा पर प्रसन्नता जतायी है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया है कि वह जल्द स्वस्थ हो जायेगी. उन्होंने बचाव दल के सदस्यों को बधाई दी है़ राज्यपाल ने राज्य सरकार को भी कुशल मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया है.
पूरी रात जगी रही मां, बच्ची के साहस को सलाम
तीन साल की सना ने जिस तरह से इतने बड़े हादसे में अदम्य साहस का परिचय दिया, उस तरह का साहस किसी बड़े लोगों में संभव नहीं हो पाता है.
एक ओर जहां बोरवेल में डाले गये सीसीटीवी कैमरे की मदद से बच्ची का हिलने-डोलने का पता चल रहा था, वहीं दूसरी ओर जब बच्ची के रोने की आवाज आने लगी, तब उसकी मां सुधा देवी ने बोरवेल में झांकते हुए जोर से आवाज लगायी कि बेटा मैं भी अंदर में ही हुं, तुमको जल्दी ही बाहर निकाल लेंगे. जब भी बच्ची के रोने की आवाज आती थी, तब उसकी मां उसे यही सांत्वाना देती रही. हर आधे घंटे, एक घंटे पर बच्ची की आवाज सुनाई दे रही थी और उसकी मां उसे बार-बार दिलासा दे रही थी. बुधवार की सुबह जब बच्ची से पूछा गया कि चॉकलेट खाओगी, तब बच्ची ने हांमी भरी. जिसके बाद एक पतली रस्सी के सहारे उसके हाथ तक चॉकलेट पहुंचाया गया, किंतु बच्ची का हाथ इस कदर उपर की ओर फंसा हुआ था कि वह अपने हाथ को मुंह तक नहीं पहुंचा पायी और चॉकलेट उसके हाथ में ही रह गया. जो भी हो इस मासूम बच्ची ने जो साहस दिखाया, वैसा बड़ों से काफी मुश्किल था.
कितना लाचार हूं, अपनी बच्ची को एक बूंद पानी भी पिला नहीं सकता : एक ओर जहां सना की मां सुधा देवी लगातार अपनी बच्ची से बात कर उसे सांत्वना दिये जा रही थी. वहीं दूसरी ओर सना के पिता नचिकेता मायूस हो कर बैठा हुआ था.
उन्होंने बताया कि सुबह सना से उसकी बात हुई, सना ने उनसे कहा कि ‘पापा मुझे बाहर निकालो, मुझे जोर से प्यास लगी है’. किंतु जिस स्थिति में वह फंसी हुई है, उस स्थिति में उसे पानी पिलाना मुमकिन ही नहीं था. कितना लाचार हूं कि अपनी फूल सी बच्ची को मैं एक बूंद पानी तक पिला नहीं सकता.
उन्होंने बताया कि कार्य में व्यस्तता के कारण मंगलवार को वे दोपहर का खाना खाने के लिए भी घर पर नहीं जा पाये थे. अचानक 4:15 बजे उसे फोन पर सूचना मिला कि सना बोरवेल में गिर गयी है. जिसके बाद वह बैंक से सीधा घर पहुंचा.
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