रील बनाने के लिए जान जोखिम में डाल रहे युवा, अभिभावकों को सतर्क रहने की जरूरत
सांकेतिक तस्वीर
युवाओं में सोशल मीडिया पर तुरंत प्रसिद्धि पाने की होड़ खतरनाक होती जा रही है. चंद लाइक्स और व्यूज के लिए वे अपनी जान तक जोखिम में डाल रहे हैं, जिसके चलते रील बनाते समय कई हादसे सामने आ चुके हैं. यह स्थिति अभिभावकों और समाज के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है.
Social Media Reels Addiction: सोशल मीडिया पर रातोंरात मशहूर होने की चाहत युवाओं में इस कदर बढ़ रही है कि चंद लाइक्स और व्यूज के लिए वे अपनी जान तक जोखिम में डालने से नहीं हिचक रहे हैं. चकिया अनुमंडल क्षेत्र सहित जिले के अलग-अलग हिस्सों में रील बनाने के दौरान युवाओं के हादसे का शिकार होने की घटनाएं सामने आती रही हैं. कुछ मामलों में जान तक चली गई है. ऐसे में सोशल मीडिया फेम के बढ़ते जुनून को लेकर अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के लिए चिंता बढ़ गई है.
चंद मिनटों की डिजिटल फेम के लिए जोखिम उठा रहे युवा

सोशल मीडिया पर मिलने वाले लाइक्स, कमेंट और व्यूज को कई युवा सफलता का पैमाना मानने लगे हैं. विशेषज्ञों के अनुसार लगातार मिलने वाली डिजिटल प्रतिक्रिया युवाओं को अधिक ध्यान आकर्षित करने वाले कंटेंट की ओर प्रेरित कर सकती है.
ऐसे में कुछ युवा सामान्य वीडियो की जगह खतरनाक स्टंट, तेज रफ्तार वाहन, ऊंचाई या जोखिम भरे स्थानों पर वीडियो बनाने लगते हैं. दोस्तों के बीच खुद को अलग और साहसी साबित करने की चाह भी इस व्यवहार को बढ़ा सकती है.
चकिया अनुमंडल समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में रील या वीडियो बनाने के दौरान हादसों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं. कई बार युवा वीडियो बनाने के लिए ऐसी जगहों पर पहुंच जाते हैं, जहां जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है.
सोशल मीडिया पर वायरल होने की चाह में जोखिम को कम आंकना गंभीर समस्या बन सकती है. इसलिए युवाओं को यह समझना जरूरी है कि कुछ सेकंड की डिजिटल लोकप्रियता के लिए जीवन को खतरे में डालना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है.
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अभिभावकों और शिक्षकों को निभानी होगी जिम्मेदारी
युवाओं की सोशल मीडिया गतिविधियों पर अभिभावकों को नजर रखने की जरूरत है. बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव, खतरनाक वीडियो बनाने की आदत या लगातार सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने जैसी बातों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.
स्कूल और कॉलेज स्तर पर भी सोशल मीडिया के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकते हैं. युवाओं को यह समझाना जरूरी है कि सोशल मीडिया मनोरंजन और अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन इसका इस्तेमाल सुरक्षा की सीमा में रहकर ही किया जाना चाहिए.
खतरनाक कंटेंट की रिपोर्टिंग भी जरूरी
इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खतरनाक स्टंट या जोखिम भरे वीडियो सामने आने पर उनकी रिपोर्टिंग की जानी चाहिए. ऐसे कंटेंट को बढ़ावा देने के बजाय उसे रिपोर्ट करना युवाओं की सुरक्षा के लिहाज से ज्यादा जिम्मेदार कदम हो सकता है.
अभिभावकों और शिक्षकों को भी युवाओं को सोशल मीडिया एल्गोरिदम, डिजिटल लोकप्रियता और वास्तविक जीवन के जोखिम के बीच अंतर समझाने की जरूरत है.
क्या कहते हैं चिकित्सक
श्री जीवक हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक के अनुसार, सोशल मीडिया पर लगातार मिलने वाला लाइक्स और सकारात्मक प्रतिक्रिया कुछ युवाओं में डिजिटल रिवॉर्ड की आदत को मजबूत कर सकती है. लाइक्स और कमेंट मिलने पर मस्तिष्क की रिवॉर्ड प्रणाली सक्रिय होती है, जिससे व्यक्ति बार-बार उसी तरह की प्रतिक्रिया पाने के लिए अधिक आकर्षक या जोखिम भरा कंटेंट बनाने की कोशिश कर सकता है.
उन्होंने कहा कि यदि सोशल मीडिया का इस्तेमाल तनाव, अकेलेपन या पहचान बनाने के लिए अत्यधिक होने लगे और व्यक्ति जोखिम को नजरअंदाज करने लगे, तो परिवार को समय रहते संवाद, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए.
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