मोतिहारी में सड़क पर नशा करते दिखा बच्चा, बच्चों को नशे से बचाने के लिए सामूहिक पहल जरूरी

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सड़क किनारे प्लास्टिक में नशीली पदार्थ रख सूंघता बच्चा

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मोतिहारी शहर में बच्चों और युवाओं के बीच नशे की प्रवृत्ति चिंता का विषय बन गई है. स्टेशन मार्ग पर एक बच्चे को व्हाइटनर का नशा करते देखना शहर की गंभीर समस्या को उजागर करता है. इस समस्या से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं.

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Motihari News: मोतिहारी शहर में बच्चों और युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंता का विषय बनती जा रही है. स्टेशन जाने वाले मार्ग पर एक बच्चे को प्लास्टिक में व्हाइटनर और सॉल्यूशन जैसी सामग्री लेकर नशा करते देखा गया. सड़क किनारे कम उम्र के बच्चे का इस तरह नशा करते दिखना शहर में बढ़ती नशे की समस्या की गंभीर तस्वीर सामने लाता है.

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स्टेशन रोड समेत कई सार्वजनिक स्थानों पर दिखते हैं बच्चे

स्थानीय लोगों के अनुसार स्टेशन रोड समेत शहर के कई सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे बच्चे अक्सर दिखाई देते हैं. इनमें कई बच्चे स्कूल से दूर हैं और दिनभर इधर-उधर घूमते रहते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इन बच्चों पर परिवार और समाज की निगरानी कमजोर होने के कारण कम उम्र में ही नशे की आदत लगने का खतरा बढ़ रहा है.

व्हाइटनर और सॉल्यूशन से शुरू हो सकती है नशे की आदत

जानकारों के अनुसार व्हाइटनर और सॉल्यूशन जैसी वस्तुओं का गलत तरीके से इस्तेमाल बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है. कम उम्र में ऐसी आदत विकसित होने से आगे चलकर बच्चे दूसरे गंभीर नशे की गिरफ्त में भी जा सकते हैं. इसलिए शुरुआती स्तर पर ही ऐसे बच्चों की पहचान और काउंसिलिंग जरूरी है.

सिर्फ पुलिस कार्रवाई से नहीं होगा समस्या का समाधान

सड़क पर नशा करते बच्चों के मामले में केवल पुलिस कार्रवाई से समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है. ऐसे बच्चों की पहचान कर उनके परिवार का पता लगाने, काउंसिलिंग कराने और उन्हें दोबारा शिक्षा से जोड़ने की जरूरत है.

जरूरत के अनुसार बच्चों को बाल संरक्षण इकाई और नशामुक्ति केंद्रों से भी जोड़ा जाना चाहिए, ताकि उन्हें सुरक्षित माहौल और आवश्यक सहायता मिल सके.

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बिक्री और इस्तेमाल पर भी निगरानी की जरूरत

व्हाइटनर, सॉल्यूशन समेत उन वस्तुओं की बिक्री पर भी निगरानी जरूरी है, जिनका इस्तेमाल बच्चे नशे के लिए कर रहे हैं. स्टेशन और अन्य संवेदनशील स्थानों पर नियमित गश्ती और निगरानी बढ़ाने की जरूरत है.

स्थानीय स्तर पर दुकानदारों को भी ऐसे मामलों में सतर्क रहने और बच्चों द्वारा संदिग्ध तरीके से वस्तुओं की खरीदारी किए जाने पर संबंधित विभाग को सूचना देने के लिए जागरूक किया जाना चाहिए.

बच्चों को डांटने के बजाय मदद और संरक्षण जरूरी

सड़क पर नशा करते बच्चे को देखकर केवल डांटकर या वहां से भगाने से समस्या खत्म नहीं होगी. ऐसे बच्चों को काउंसिलिंग, संरक्षण और सही दिशा की जरूरत है.

प्रशासन, पुलिस, बाल संरक्षण इकाई, स्कूल, अभिभावक और सामाजिक संगठनों को मिलकर अभियान चलाना होगा. सामूहिक प्रयास से ही नशे की गिरफ्त में पहुंच रहे बच्चों को बचाकर उन्हें शिक्षा और समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सकता है.

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