PHOTOS : थावे धाम से लेकर भोरे के शिवालय तक, गोपालगंज के इन सात प्रसिद्ध मंदिरों का वैभव देखिए

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बिहार राज्य के गोपालगंज जिले के थावे में स्थित है. माँ शक्ति के अनेक नाम और रूप हैं. भक्त अनेक नामों और रूपों में उनकी पूजा करते हैं, जिनमें से एक माँ थावेवाली भी हैं. पूरे भारत में 52 शक्तिपीठ हैं, यह स्थान भी एक शक्तिपीठ के समान है. ऐसा कहा जाता है कि माँ अपने परम भक्त श्री राहु भगत जी की प्रार्थना पर अपने दूसरे पवित्र स्थान कामरूप, असम से यहाँ आई हैं, जहाँ वे "माँ कामाख्या" के नाम से प्रसिद्ध हैं. माँ को "सिंहासिनी देवी" और "राहसु भवानी" के नाम से भी जाना जाता है.
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थावे मंदिर गोपालगंज

बिहार राज्य के गोपालगंज जिले के थावे में स्थित है. माँ शक्ति के अनेक नाम और रूप हैं. भक्त अनेक नामों और रूपों में उनकी पूजा करते हैं, जिनमें से एक माँ थावेवाली भी हैं. पूरे भारत में 52 शक्तिपीठ हैं, यह स्थान भी एक शक्तिपीठ के समान है. ऐसा कहा जाता है कि माँ अपने परम भक्त श्री राहु भगत जी की प्रार्थना पर अपने दूसरे पवित्र स्थान कामरूप, असम से यहाँ आई हैं, जहाँ वे "माँ कामाख्या" के नाम से प्रसिद्ध हैं. माँ को "सिंहासिनी देवी" और "राहसु भवानी" के नाम से भी जाना जाता है.

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यह सुप्रसिद्ध मंदिर गोपालगंज-सीवान राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 6 किमी दूर घने जंगलों के बीच स्थित है. मान्यता है कि माँ दुर्गा अपने परम भक्त 'रहसू भगत' की पुकार पर असम के कामाख्या से यहाँ प्रकट हुई थीं.
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थावे मंदिर की फाइल फोटो

यह सुप्रसिद्ध मंदिर गोपालगंज-सीवान राष्ट्रीय राजमार्ग पर जिला मुख्यालय से लगभग 6 किमी दूर घने जंगलों के बीच स्थित है. मान्यता है कि माँ दुर्गा अपने परम भक्त 'रहसू भगत' की पुकार पर असम के कामाख्या से यहाँ प्रकट हुई थीं.

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थावे माता मंदिर से महज 800 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर माँ थावेवाली के अनन्य भक्त रहसू भगत को समर्पित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता के प्रकट होने पर रहसू भगत का मस्तक फट गया था और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी
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रहसू भगत की मंदिर

थावे माता मंदिर से महज 800 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर माँ थावेवाली के अनन्य भक्त रहसू भगत को समर्पित है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता के प्रकट होने पर रहसू भगत का मस्तक फट गया था और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी

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गोपालगंज के ऐतिहासिक हथुआ पैलेस परिसर के पास स्थित यह भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित एक भव्य ऐतिहासिक मंदिर है. यह मंदिर सफेद संगमरमर की बेहतरीन नक्काशी और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है.
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हथुआ गोपाल मंदिर

गोपालगंज के ऐतिहासिक हथुआ पैलेस परिसर के पास स्थित यह भगवान कृष्ण और राधा को समर्पित एक भव्य ऐतिहासिक मंदिर है. यह मंदिर सफेद संगमरमर की बेहतरीन नक्काशी और स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है.

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श्री पीताम्बरा पीठ, प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक है. हिन्दू धर्म अनुसार बंगलामुखी दस महाविद्याओं (महान ज्ञान) में से एक हैं. बंगलामुखी देवी भक्त की गलतफहमी और भ्रम को अपनी गदा से दूर कर देती हैं. इस नाम का शाब्दिक अर्थ वग्ला स्वरुप होता है. बंगला संस्कृत के ‘वग्ला’ शब्द का विरूपण है.
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श्री पीताम्बरा पीठ मंदिर

श्री पीताम्बरा पीठ, प्रसिद्ध शक्ति पीठों में से एक है. हिन्दू धर्म अनुसार बंगलामुखी दस महाविद्याओं (महान ज्ञान) में से एक हैं. बंगलामुखी देवी भक्त की गलतफहमी और भ्रम को अपनी गदा से दूर कर देती हैं. इस नाम का शाब्दिक अर्थ वग्ला स्वरुप होता है. बंगला संस्कृत के ‘वग्ला’ शब्द का विरूपण है.

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गोपालगंज के स्थानीय इलाकों में आस्था का एक और बड़ा केंद्र माई लछवार मंदिर है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ हर बुधवार को विशेष पूजा होती है और लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं.
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माई लछवार मंदिर

गोपालगंज के स्थानीय इलाकों में आस्था का एक और बड़ा केंद्र माई लछवार मंदिर है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ हर बुधवार को विशेष पूजा होती है और लोग अपनी मन्नतें लेकर आते हैं.

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गोपालगंज के भोरे प्रखंड के दिघवा गांव में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है.
मंदिर के सामने करीब 7,556 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला ऐतिहासिक पोखरा इसकी खूबसूरती और धार्मिक महत्व को बढ़ाता है. सावन में यहां पूरे एक महीने तक ग्रामीणों द्वारा रुद्र महायज्ञ और विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है.
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श्री दिगम्बरेस्वर महादेव मंदिर (दिघवा, भोरे)

गोपालगंज के भोरे प्रखंड के दिघवा गांव में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है. मंदिर के सामने करीब 7,556 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में फैला ऐतिहासिक पोखरा इसकी खूबसूरती और धार्मिक महत्व को बढ़ाता है. सावन में यहां पूरे एक महीने तक ग्रामीणों द्वारा रुद्र महायज्ञ और विशाल धार्मिक मेले का आयोजन किया जाता है.

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भोरे प्रखंड के लखराव गांव में हुस्सेपुर मार्ग पर स्थित यह प्राचीन शिवालय क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण ऐतिहासिक हथुआ राज के राजा ने करवाया था.
मंदिर के सामने बना सुंदर तालाब श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.
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शिव मंदिर, लखराव (भोरे)

भोरे प्रखंड के लखराव गांव में हुस्सेपुर मार्ग पर स्थित यह प्राचीन शिवालय क्षेत्र के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण ऐतिहासिक हथुआ राज के राजा ने करवाया था. मंदिर के सामने बना सुंदर तालाब श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है.

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साक्षी कुमारी

लेखक के बारे में

By साक्षी कुमारी

साक्षी कुमारी को डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 वर्षों का अनुभव है. पिछले तीन वर्षों से वह डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. उन्हें राजनीति, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सरोकारों और समसामयिक मुद्दों से जुड़ी खबरों की रिपोर्टिंग और लेखन का अनुभव है. बिहार की राजनीति और क्षेत्रीय मुद्दों पर उनकी विशेष रुचि है. डिजिटल पत्रकारिता के साथ-साथ उन्हें SEO (Search Engine Optimization) की भी अच्छी समझ है, जिससे वह पाठकों तक समय पर और प्रभावी ढंग से खबरें पहुंचाने में दक्ष हैं. तथ्यपरक, विश्वसनीय और SEO-अनुकूल समाचार तैयार करना उनकी प्रमुख कार्यशैली है.

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