मोतिहारी में एफआरएस से टीएचआर वितरण की रफ्तार सुस्त, 2.68 लाख में सिर्फ 6.09% लाभार्थियों को मिला लाभ
सांकेतिक तस्वीर
पूर्वी चंपारण में टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण में फेस रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) की धीमी गति चिंताजनक है. जिले के 2.68 लाख पात्र लाभार्थियों में से केवल 6.09% को ही FRS के माध्यम से टीएचआर मिल पाया है. घोड़ासहन जैसे परियोजनाएं 1% से भी कम उपलब्धि के साथ सबसे पीछे हैं.
Motihari News: पूर्वी चंपारण जिले में टेक होम राशन (टीएचआर) वितरण को लेकर विभागीय दावों के बीच एफआरएस (फेस रिकॉग्निशन सिस्टम) के आंकड़ों ने जमीनी स्थिति सामने रखी है. 4 अगस्त 2026 तक जिले की 28 बाल विकास परियोजनाओं में कुल 2,68,841 पात्र लाभार्थियों में से सिर्फ 16,381 लाभार्थियों को एफआरएस के माध्यम से टीएचआर वितरित किया जा सका है. इस तरह एफआरएस आधारित टीएचआर वितरण की उपलब्धि महज 6.09 प्रतिशत है.
आधार फेस मैचिंग के बाद भी टीएचआर वितरण सुस्त
आंकड़ों के अनुसार जिले में 2,61,874 लाभार्थियों का आधार फेस मैचिंग पूरा हो चुका है. इसके बावजूद एफआरएस के माध्यम से टीएचआर वितरण की रफ्तार काफी धीमी है. आधार फेस मैचिंग के बाद भी करीब 2.45 लाख लाभार्थियों के एफआरएस आधारित टीएचआर वितरण का रिकॉर्ड दर्ज नहीं हुआ है.
यह स्थिति फेस मैचिंग और वास्तविक टीएचआर वितरण के बीच बड़े अंतर की ओर संकेत करती है. इससे एफआरएस के माध्यम से वितरण की प्रगति पर सवाल उठ रहे हैं.
घोड़ासहन में सबसे खराब स्थिति
एफआरएस से टीएचआर वितरण के मामले में घोड़ासहन परियोजना की स्थिति सबसे खराब बतायी जा रही है. यहां कुल 10,484 पात्र लाभार्थियों में सिर्फ 91 को ही एफआरएस के माध्यम से टीएचआर वितरित किया गया है. परियोजना की उपलब्धि महज 0.87 प्रतिशत है.
इसके अलावा पकड़ीदयाल में 0.92 प्रतिशत, फेनहारा में 1.37 प्रतिशत, ढाका में 1.76 प्रतिशत, आदापुर में 2.17 प्रतिशत और हरसिद्धि में 2.57 प्रतिशत लाभार्थियों तक एफआरएस के माध्यम से टीएचआर पहुंचा है.
इन परियोजनाओं में भी 5 प्रतिशत से कम वितरण
आंकड़ों के मुताबिक केसरिया में एफआरएस आधारित टीएचआर वितरण 2.61 प्रतिशत, बनजरिया में 2.88 प्रतिशत, अरेराज में 3.20 प्रतिशत, मेहसी में 3.44 प्रतिशत और सुगौली में 4.12 प्रतिशत रहा.
मधुबन और संग्रामपुर में भी एफआरएस के माध्यम से टीएचआर वितरण की उपलब्धि सिर्फ 4.86 प्रतिशत है. यानी जिले की कई परियोजनाओं में वितरण का आंकड़ा अभी 5 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच सका है.
पहाड़पुर सबसे आगे, फिर भी 20 प्रतिशत से नीचे
एफआरएस से टीएचआर वितरण में पहाड़पुर परियोजना जिले में सबसे आगे है. यहां 9,471 पात्र लाभार्थियों में से 1,633 को एफआरएस के माध्यम से टीएचआर वितरित किया गया है. इसकी उपलब्धि 17.24 प्रतिशत है.
मोतिहारी ग्रामीण 12.58 प्रतिशत और रामगढ़वा 11.87 प्रतिशत उपलब्धि के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. खास बात यह है कि जिले में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली परियोजनाएं भी अभी 20 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं कर सकी हैं.
एफआरएस वितरण में तेजी लाने की जरूरत
आंकड़ों से स्पष्ट है कि आधार फेस मैचिंग की प्रक्रिया काफी हद तक आगे बढ़ चुकी है, लेकिन उसके अनुपात में एफआरएस आधारित टीएचआर वितरण नहीं हो पाया है. ऐसे में पात्र लाभार्थियों तक टीएचआर वितरण सुनिश्चित करने के लिए संबंधित परियोजनाओं में एफआरएस प्रक्रिया की निगरानी और गति बढ़ाने की जरूरत है.
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लेखक के बारे में
By सामंत कुमार गौतम
सामंत वर्ष 2013 से यानी पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. वाणिज्य (बी.कॉम) और कानून (एलएलबी) स्नातक सामंत को समाचार संकलन, संपादन, कंप्यूटर तकनीक और समाचार प्रबंधन का व्यापक अनुभव है. ये पत्रकारिता के साथ-साथ समाचारों के तकनीकी व प्रबंधकीय कार्यों में विशेष रुचि रखते हैं.
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