होर्डिंग बैनर तक सिमटा अभियान

Updated at :18 Jan 2017 6:30 AM
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होर्डिंग बैनर तक सिमटा अभियान

उदासीनता. सरकारी महकमों में नहीं दिया जाता है स्वच्छता पर ध्यान मधुबनी : गांव कस्बों से लेकर शहर मुख्यालय तक स्वच्छता की बातें हो रही है. लाखों रुपये इस अभियान के पीछे खर्च भी किये जा रहे है. शायद ही ऐसा कोई चौक चौराहा हो जहां पर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाले होर्डिंग व […]

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उदासीनता. सरकारी महकमों में नहीं दिया जाता है स्वच्छता पर ध्यान

मधुबनी : गांव कस्बों से लेकर शहर मुख्यालय तक स्वच्छता की बातें हो रही है. लाखों रुपये इस अभियान के पीछे खर्च भी किये जा रहे है.
शायद ही ऐसा कोई चौक चौराहा हो जहां पर स्वच्छता के प्रति जागरूक करने वाले होर्डिंग व बैनर नहीं लगा हो. पर इसका क्या किया जाय कि सरकारी महकमा खुद ही स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं है. सदर अस्पताल, नगर परिषद सहित अन्य अधिकांश सरकारी कार्यालयों में शौचालय इस प्रकार गंदा है कि लोग इसमें जायें तो बीमार हो जाये. प्रभात पड़ताल में विभिन्न सरकारी कार्यालयों के शौचालय की स्थिति का जायजा लिया. इस पड़ताल की बानगी इस प्रकार है.
यहां जायें शौचालय, तो पड़ जायें बीमार : सदर अस्पताल में अक्सर मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने आते है. पर यदि भूले से भी इसके शौचालय का उपयोग कर लिया तो बीमारी ना हो इसका कोई गारंटी नहीं है.
सदर अस्पताल में अक्सर हर वार्ड में शौचालय है. मरीजों के लिये भी और कर्मियों. सदर अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र में निचले फ्लोर पर पांच शौचालय हैं. पर जिस वक्त हमने पड़ताल किया. ऐसा एक भी शौचालय नहीं था जिसमें लोग जा सके. हरेक शौचालय के ऊपर ही गंदगी जमा था. ऐसा लगता था कि महीनों से इन शौचालयों को साफ नहीं किया गया है. यदि इस शौचालय में मजबूरी में भी लोग जायें तो बीमार पड़ जायें.
हर माह सफाई मद में 1.80 लाख खर्च : जानकारी के अनुसार सदर अस्पताल में साफ सफाई का काम एनजीओ पुष्प भारती को दिया गया है. हर माह साफ सफाई के लिये एक लाख 60 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है.
नप में 56 सफाई : कर्मी व एनजीओ काम करता है. जिस पर हर माह करीब 15 से 20 लाख रुपये खर्च होते हैं. पर इसके बाद भी स्थिति नारकीय है.
सदर अस्पताल, नप व अन्य कार्यालयों में स्थिति नारकीय
महिला व पुरुष के लिए एक ही शौचालय : इधर, नप विभाग की स्थिति भी ठीक नहीं है. मुख्यमंत्री के सात निश्चय में एक निश्चय हर घर शौचालय की योजना नप प्रशासन द्वारा चलायी जाती है. पर कहते हैं न कि चिराग तले अंधेरा, वह नप पर इन दिनों चरितार्थ हो रही है. नप कार्यालय में कहने को तीन शौचालय हैं. इसमें एक मुख्य पार्षद के चैंबर में, एक कार्यपालक पदाधिकारी के चैंबर और एक कर्मियों के कार्यालय से जुड़ा है. कर्मियों के लिये बने शौचालय में भी गंदगी का अंबार है. जानकारी के अनुसार इसी एक शौचालय में महिला- पुरुष दोनों जाते हैं. इसी प्रकार नप के सीढी के समीप ही लोगों ने इस कदर पान गुटखा खाकर थूका है कि देखने से ही स्वच्छता अभियान की कलई खुल जाती है.
टूटा है हॉज : इसी प्रकार सदर अस्पताल के कैदी वार्ड व ओपीडी की ओर जाने वाली शौचालय की स्थित बतदर है. शौचालय का हॉज टूट गया है. बाहर व भीतर गंदगी का अंबार है. ऐसा लगता है कि लोग बाहर ही शौचालय करते हैं. कैदी वार्ड के समीप शौचालय इस कदर खराब है कि लोगों को इसमें जाने की कल्पना से ही सिहरन होने लगती है. सीट के ऊपर ही गंदगी पड़ा हुआ है. ऐसा लगता है कि इस शौचालय की भी साफ सफाई शायद सालों से नहीं किया गया है.
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