दो साल पहले पैसे के लेन देन में की गयी थी युवक की हत्या

Updated at :17 Jan 2017 5:08 AM
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दो साल पहले पैसे के लेन देन में की गयी थी युवक की हत्या

युवक को फोन कर बुलाया था आरोपित ने धक्का देने पर स्टार्ट होता है एंबुलेंस मधुबनी : सदर अस्पताल से कहीं किसी मरीज को लेकर 102 एंबुलेंस से आप जाने वाले हैं तो अपने साथ पांच सात आदमी को भी जरूर साथ कर लें. कब कहां आपके मरीज को लेकर जा रहा एंबुलेंस बंद हो […]

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युवक को फोन कर बुलाया था आरोपित ने

धक्का देने पर स्टार्ट होता है एंबुलेंस
मधुबनी : सदर अस्पताल से कहीं किसी मरीज को लेकर 102 एंबुलेंस से आप जाने वाले हैं तो अपने साथ पांच सात आदमी को भी जरूर साथ कर लें. कब कहां आपके मरीज को लेकर जा रहा एंबुलेंस बंद हो जाये यह कहा नहीं जा सकता है. यदि बंद हो गया तो फिर आप किसी भी सूरत में अपने मरीज को समय से अस्पताल नहीं पहुंचा सकते हैं. दरअसल सदर अस्पताल का एंबुलेंस सेवा दिन व दिन लचर होते जा रहा है. आलम यह है कि अस्पताल में रखे गये दो 102 नंबर का एंबुलेंस धक्का मारकर स्टार्ट होता है. जबकि हर साल एक एंबुलेंस पर करीब छह लाख 72 हजार रुपये खर्च होते हैं.
बैटरी डाउन . इस व्यवस्था को सुदृढ़ करने में अस्पताल प्रबंधन नकारा साबित हो रहा है. 65 दिनों के हड़ताल के बाद 5 जनवरी से पुन: 102 एंबुलेंस सेवा चालू हुआ. इस बीच मरीजों को निजी एंबुलेंस सेवा के सहारे लगभग 65 दिनों तक निर्भर रहना पड़ा. अब नतीजा यह है, कि बिना धक्का दिये दोनों एंबुलेंस स्टार्ट ही नहीं होता है. कई बार पदाधिकारी को इसकी सूचना दी गयी है. लेकिन, अब तक एंबुलेंस बैटरी नहीं बदला गया है. ऐसे में एंबुलेंस सेवा की सुविधा मरीजों के लिए कितना सुरक्षित है इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है.
हर साल एक एंबुलेंस पर होता है 6.7 लाख खर्च पर हालत बदतर
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