शराब बंदी का असर: अब शाम ढ़लते चौक चौराहो पर रहता सन्नाटा
शराब बंदी का असर: अब शाम ढ़लते चौक चौराहो पर रहता सन्नाटा शराब बंदी का असर: अब शाम ढ़लते चौक चौराहो पर रहता सन्नाटा सख्त कानून बनने से लोगों में हुआ असर शराब बंदी की हो रही सराहना मधुबनी . नई उत्पाद नीति लागू होने से पहले जहां शाम होते है ढ़ाबे, छोटे होटलों, भूजा […]
शराब बंदी का असर: अब शाम ढ़लते चौक चौराहो पर रहता सन्नाटा शराब बंदी का असर: अब शाम ढ़लते चौक चौराहो पर रहता सन्नाटा सख्त कानून बनने से लोगों में हुआ असर शराब बंदी की हो रही सराहना मधुबनी . नई उत्पाद नीति लागू होने से पहले जहां शाम होते है ढ़ाबे, छोटे होटलों, भूजा की दुकानों एवं कुछ चाउमीन सेंटरों पर पियक्कड़ों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता था. वहीं एक अप्रैल से नई शराब नीति के लागू होने व पुलिस की सख्ती के कारण व शराबों की दुकानों के बंद हो जाने के कारण इन दुकानों पर सन्नाटा सा रहने लगा है. गर्मी के दिनों में जहां पहले बीयरों की बयार बहती थी. वह सब नजारा अब बीते दिनों की बात लगने लगी है. जहां पहले गांव के चौक चौराहो से लेकर शहर के बाजारों में शाम ढ़लते ही जहां- तहां पियक्कड़ नजर आते थे. वहीं अब शाम ढ़लते ही बाजार सूना सूना सा दिखाई पड़ने लगा है. सख्त है कानूननई उत्पाद नीति के तहत सरकार द्वारा बनाये गए कानून इतने सख्त है कि अब शराब बेचने वाले व शराब पीने वाले इस कार्य को करने से पहले 10 बार सोचेगें कि कही पकड़ जाने पर लेने के देने न पड़ जाए. सरकार द्वारा बनाए गए कानून के अनुसार शराब पिने वालों के विरूद्ध कम से कम 5 साल व बेचने वालों के विरूद्ध 10 साल या उससे उपर तक के सजा का प्रावधान कानून में किया गया है. पंचायत चुनाव पर असर की आशंका राज्य में पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी होने के समय शराब बंदी की घोषणा नहीं हुई थी. पंचायत चुनाव में बड़े पैमाने पर शराब की मांग व खपत का अंदेशा था. पर नई उत्पाद नीति के जारी होने व पूर्ण शराब बंदी के कारण शराब के आदि कुछ मतदाताओं को बड़ी निराशा हाथ लगी है. उन्हें यह विश्वास था कि चुनाव में खड़े प्रत्याशी उन्हें शराब की आपूर्ति कर सकते थे. पर अब शराब बंदी को लेकर उन्हें प्रत्याशी भी शराब की आपूर्ति नहीं कर सकेगें. ऐसे में चुनाव परिणाम पर शराब का असर पर सकंट है. चोरी छिपे अगर कुछ मतदाताओं को शराब की आपूर्ति करने का प्रयास किया तो आने वाले चुनाव में इसका असर देखा जा सकता है. और यह उल्टा भी पड़ सकता है. लोगों में है हर्ष का माहौल राज्य में पूर्ण शराब बंदी को लेकर जिले के अधिकांश लोगों में हर्ष का माहौल है. खासकर महिलाओं में शराब बंदी की काफी सराहना हो रही है. सरकार का पहले देशी शराब पर प्रतिबंध का फैसला का महिलाओं ने जमकर विरोध किया एवं पूर्ण शराब बंदी के लिए जगह जगह आंदोलन करना शुरू कर दिया फलत: सरकार द्वारा नगर निगम व नगर परिषद क्षेत्र में अंग्रेजी शराब के बेचने के फैसले को रद्द करना पड़ा व पूर्ण शराब बंदी की घोषणा करनी पड़ी. समाज सेवी राजू कुमार राज ने कहा कि सरकार का शराब बंदी की घोषणा राज्य की जनता के लिए सराहनीय है. भविष्य में इसकी पुनरावृति नहीं हो क्योंकि शराब से समाज में विकृति आ रहा था. यह नशा घर – घर प्रवेश कर रहा था. राजा ठाकुर ने कहा कि शराब बंदी की सराहना जितनी की जाए वह कम है. क्योंकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की जनता को नया साल का यह नायाब तोहफा दिया है. वहीं पूनम देवी ने इसकी सराहना करते कहा कि अब गरीब घरों के बच्चे भी अच्छे स्कूल में पढ़ेगें क्योंकि जिन घरों में मालिक शराब पीते थे. उनके कमाई का अधिकांश रूपया शराब में ही खर्च हो जाता था. इस कारण उनके घर का ठीक से चलना भी मुश्किल था. अब शराब नहीं मिलेगी तो परिवार की आर्थिक हालत भी सुधरेंगे.
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