आपदा के समय अफवाह न फैलाएं : अपर समाहर्ता
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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आपदा प्रबंधन के तहत कार्यशाला अायोजित प्रोजेक्ट के माध्यम न्यूनतम आपदा जोखिम के संदर्भ में जानकारी दी मधुबनी : जिला आपदा प्रबंधन योजना के तहत बुधवार को समाहरणालय के सभागार में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से कार्यशाला आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता अपर समाहर्ता एसएन यादव ने की. कार्यशाला में पटना आपदा प्रबंधन विभाग […]
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आपदा प्रबंधन के तहत कार्यशाला अायोजित
प्रोजेक्ट के माध्यम न्यूनतम आपदा जोखिम के संदर्भ में जानकारी दी
मधुबनी : जिला आपदा प्रबंधन योजना के तहत बुधवार को समाहरणालय के सभागार में आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से कार्यशाला आयोजित की गयी. इसकी अध्यक्षता अपर समाहर्ता एसएन यादव ने की. कार्यशाला में पटना आपदा प्रबंधन विभाग से आये डीडी मिश्रा, तकनीकी सलाहकार केके मिश्रा एवं वरिष्ठ सलाहकार वरुण कांत मिश्रा ने प्रोजेक्टर के माध्यम से आपदा के समय किये जाने वाले बचाव व राहत के गुर बताये.
इस दौरान बताया गया कि पर्यावरण में अनवरत परिवर्तन, भूगर्भीय प्रक्रिया एवं अनियोजित विकास से खतरे बार बार प्रकट हो रहे हैं. जनसंख्या में वृद्धि, गरीबी एवं असुरक्षित बसावट से सामुदायिक भेद्दता में लगातार वृद्धि हो रही है. खतरा और भेद्दता मिलकर आपदा जोखिम की आशंका उत्पन्न कर देती है. अपर समाहर्ता ने कहा कि आपदा के समय अपवाह न फैलाए एवं दहशत का माहौल न बनने दें. ऐसे समय में एक दूसरे को मदद पहुंचायें.
हानिकारक स्थिति या घटना
कार्यशाला में बताया गया कि आपदा किसी समय एवं किसी क्षेत्र की वस्तुस्थिति या घटना है. यह हानि पहुंचा सकता है. यह प्राकृतिक एवं मानव जनित हो सकता है. इनमें भूकंप से क्षति, अनावृष्टि से अकाल, बाढ़, आंधी, चक्रवात, ओलावृष्टि, ठनका, लू, शीतलहर प्राकृतिक आपदा है. एवं मानव जनित आपदा में नदी का तटबंध टूटना, भवनों को ढहना, अगलगी, सड़क ट्रेन दुर्घटना, प्रदूषण, जहरीले रसायन का रिसाव, भगदड़, आतंकवादी आक्रमण, दंगा युद्ध आदि हैं.
भेद्दता का अर्थ खतरा के दुष्परिणाम का पूर्वानुमान नहीं कर पाना या खतरा से बचने या सामना करने में असमर्थ होना और खतरा के आघात से संभलने की क्षमता नहीं होना यह किसी समुदाय या व्यक्ति की भेद्दता की स्थिति है. इनमें अशिक्षा, गरीबी, अपर्याप्त चिकित्सा एवं स्वच्छता. खतरनाक क्षेत्र में सघन आबादी, आपदाओं में क्षतिग्रस्त हो सकने वाले घर, आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए अपर्याप्त आधारभूत संरचनाएं, खतरों से संबंधित जानकारी एवं जागरूकता का अभाव. कार्यशाला में आपदा प्रबंधन की मुख्य अवस्थाओं के संदर्भ में जानकारी दी गयी. इनमें शमन यानी रोक थाम एवं आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी यानी आपदा से पहले की तैयारी, रिस्पांस यानी जीवन बचाव की जरूरतों के लिए तैयारी एवं रिकवरी यानी सामान्य जीवन में वापसी की तैयारी के संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गयी.
कार्यशाला में ये अधिकारी थे उपस्थिति
आपदा पर आयोजित कार्यशाला में अपर समाहर्ता ऋषिकेश शर्मा, जिला आपदा प्रभारी वरीय उपसमाहर्ता उपेंद्र पंडित, एसडीओ सदर शाहिद परवेज, वरीय उपसमाहर्ता नवीन कुमार, जिप उपाध्यक्ष भारत भूषण, मिथिला विकास परिषद के सचिव षष्ठी नाथ झा, बिहार सेवा समिति, सखी सहित अन्य कई स्वयं सेवी संस्था के प्रतिनिधि सभी अनुमंडल के एसडीओ एवं अंचलाधिकारी मौजूद थे.
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