चापाकल के भरोसे पेयजल व्यवस्था

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झंझारपुर : झंझारपुर को शहर का दर्जा मिले चार दशक के करीब हो गये हैं. बावजूद पीने के पानी की समस्या 40 वर्ष बाद भी बरकरार है. 16 वार्ड वाले इस नगर पंचायत को मूलभूत समस्या से वंचित रखने की वजह से आज तक झंझारपुर पुरानी बाजार शहर का मूर्त रूप नहीं ले पाया है. […]

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झंझारपुर : झंझारपुर को शहर का दर्जा मिले चार दशक के करीब हो गये हैं. बावजूद पीने के पानी की समस्या 40 वर्ष बाद भी बरकरार है. 16 वार्ड वाले इस नगर पंचायत को मूलभूत समस्या से वंचित रखने की वजह से आज तक झंझारपुर पुरानी बाजार शहर का मूर्त रूप नहीं ले पाया है. ऐसा नहीं की सरकार व विभाग की ओर से पानी की समस्या को समाप्त करने के लिए पहल नहीं की गयी है.

नगर विकास एवं आवास विभाग के सौजन्य से नगर पंचायत को दो-दो पानी टंकी की व्यवस्था के लिए करोड़ों रुपये आवंटित किये गये. संवेदक की लारपरवाही के कारण नगर पंचायत वासी का पानी की सप्लाई से पानी पीना सपना बना हुआ है. नगरवासी को संवेदक द्वारा नवंबर माह में सप्लाई की पानी नगर पंचायत में दिये जाने की उम्मीद दिखाई गयी थी. नवंबर माह की कौन कहे जनवरी माह भी बीतने को है. आज औद्यौगिक प्रांगण में टंकी निर्माण की फाउंडेशन का कार्य भी नहीं किया जा सका है. साथ ही निर्माण कंपनी द्वारा की जा रही निर्माण को भी बंद रखा गया है. प्रभात खबर अखबार में छपने के बाद निर्माण प्रारंभ किया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद कार्य को पुन: बंद कर दिया गया.
दो जलमीनार व पाइप लाइन का होना है निर्माण
नगर पंचायत को पाइप लाइन के द्वारा जल उपलब्ध कराने को लेकर दो जल मीनार का निर्माण 50-50 लाख रुपये से कराना हैं. फाउंडेशन के बाद निर्माण बंद कर दिया गया है. साथ ही पाइप लाइन का कार्य भी कराना है. जो आधा बिछाने के बाद से बंद है. 2.5 लाख लीटर के एक टंकी का निर्माण औद्यौगिक प्रांगण में किया जाना है. वहीं अनुमंडल परिसर के समीप 4.5 लाख लीटर की टंकी का निर्माण होना है. इसके लिए नगर आवास विभाग द्वारा गरूड़ इंफ्रा कंपनी को काम दिया गया है.
इस कार्य के लिए विभाग लगभग चार करोड़ की राशि कंपनी को देगी. 2013 ई. में इस कार्य को लेकर शुभारंभ किया गया. लगभग तीन वर्ष होने को है, लेकिन अभी तक पाइप लाइन भी सभी जगहों पर बिछाया नहीं जा सका है. झंझारपुर पुरानी बाजार, बेलाराही गांव में अभी तक पाइप भी बिछाया नहीं जा सका है. झंझारपुर के काम देख रहे श्याम बिहारी सिंह ने बताया कि अनुमंडल अस्पताल, जनता कॉलेज, मदरसा चौक तक पाइप बिछाया जा चुका है. गौरतलब हो कि कंपनी के द्वारा आज तक निर्माण कार्य का बोर्ड भी नहीं लगया जा सका है.
1975 में मिला नगर पंचायत का दर्जा
शहर को पानी की समस्या से निजात दिलाने को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से 2013 में करोड़ों रुपये देकर जल मीनार व पाइप लाइन का निर्माण कार्य प्रारंभ करवाया, लेकिन संवेदक व विभाग की लापरवाही के कारण आज भी नगर पंचायत के लोगों को चापाकल के भरोसे ही रहना पड़ रहा है.
गौरतलब हो कि झंझारपुर नगर पंचायत को 1975 ई. में पहल के बाद नगर पंचायत का दर्जा मिला. नगर पंचायत को 16 वार्ड में विभक्त किया. नगर पंचायत के कुल 2830 होल्डिंग टैक्स देने वाले परिवार हैं. इसमें अधिकांश लोग होल्डिंग टैक्स भी दे रहे हैं, लेकिन आज तक जल मीनार व पाइप लाइन का निर्माण नहीं हुअा. इसके लिए किसी सदस्यों द्वारा पहल नहीं की जा रही है. जबकि पानी टंकी के निर्माण के बाद इसी कंपनी को पांच वर्ष तक टंकी व सप्लाई की जिम्मेदारी उठानी है.
क्या कहते हैं अधिकारी
गरूड़ इंफ्र कंपनी के प्रबंधक आनंत दुबे ने ने बताया कि कंपनी अपने काम में जुटी हुई है. काम जल्द शुरू कराया जायेगा तथा नगर वासी को जल्द सप्लाई की पानी मुहैया करा दी जायेगी.
कहते हैं नगर पंचायत के कार्यपालक
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी अरुण कुमार साफी ने बताया कि निर्माण एजेंसी को जल्द पानी मुहैया करवाने का निर्देश दिया गया था. दोबारा निर्माण बंद है इसकी जानकारी नहीं है. बताया कि नगर पंचायत विभाग सिर्फ निगरानी कर सकती है. संवेदक पर दवाब दिया गया है. निर्माण बंद की वजह निर्माण एजेंसी से पूछी जाएगी, साथ ही विभाग के वरीय अधिकारी को भी सूचित किया जायेगा.
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