मिशन 2019 : मिथिलांचल की मधुबनी लोकसभा सीट पर एक ओर होगी भाजपा तो दूसरी ओर राजद या कांग्रेस

मिथिलांचल की मधुबनी लोकसभा सीट को लेकर कांग्रेस और राजद की तकरार नहीं हुई है अब तक खत्म पटना : मिथिलांचल की मधुबनी सीट को लेकर कांग्रेस और राजद की तकरार खत्म नहीं हुई है. एनडीए के भीतर यह सीट भाजपा को मिलनी तय मानी जा रही है. दरभंगा की सीट जदयू को मिलने के […]
मिथिलांचल की मधुबनी लोकसभा सीट को लेकर कांग्रेस और राजद की तकरार नहीं हुई है अब तक खत्म
पटना : मिथिलांचल की मधुबनी सीट को लेकर कांग्रेस और राजद की तकरार खत्म नहीं हुई है. एनडीए के भीतर यह सीट भाजपा को मिलनी तय मानी जा रही है. दरभंगा की सीट जदयू को मिलने के बाद यह तय हो गया है कि मधुबनी से भाजपा का ही उम्मीदवार होगा. भाजपा के मौजूदा सांसद हुकुमदेव नारायण यादव के इस बार चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा के बाद उनके पुत्र अशोक यादव इस सीट से दावा कर रहे हैं.
जबकि, संभावना विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में आये पूर्व मंत्री नीतीश मिश्रा के नाम की भी बनती दिख रही है. 2014 के चुनाव में मधुबनी, दरभंगा और झंझारपुर की सीट भाजपा के कब्जे में रही थी. इस बार दरभंगा सीट जदयू के खाते में जाना तय माना जा रहा है. ऐसे में भाजपा पर दरभंगा के मौजूदा सांसद कीर्ति आजाद की नाराजगी की भरपाई के लिए मधुबनी की सीट पर ब्राह्मण उम्मीदवार बनाये जाने का दवाब है. नीतीश मिश्रा के नाम पर सहमति नहीं बनी तो भाजपा किसी यादव उम्मीदवार को अपना प्रत्याशी बना सकती है. भाजपा इस सीट को तीन बार जीत चुकी है. हालांकि, संख्या के आधार पर देखा जाये तो सबसे अधिक भाकपा यहां छह बार चुनाव जीती है. जबकि, कांग्रेस को पांच बार जीत का अवसर मिला है.
पिछले चुनाव में हुकुमदेव नारायण यादव हुए थे विजयी
पिछले चुनाव में राजद-कांग्रेस की ओर से यह सीट राजद के पास रहा था. राजद नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी पार्टी के उम्मीदवार थे. जदयू ने राजद से निकल कर आये मो गुलाम गौस को अपना उम्मीदवार बनाया था. वोट के मामले में गुलाम गौस तीसरे स्थान पर रहे थे. कांग्रेस के डाॅ शकील अहमद यहां से पूर्व में सांसद रह चुके हैं.
उनकी नजर भी गठबंधन से उम्मीदवारी पर टिकी है. 2014 के चुनाव में भाजपा उम्मीदवार हुकुमदेव नारायण यादव को 3,57989 वोट मिले थे और जीत सेहरा उनके सिर बंधा था. दूसरे नंबर पर राजद के अब्दुल बारी सिद्दीकी रहे थे, जिन्हें 3,37459 वोट मिले थे. तीसरे स्थान पर जदयू के गुलाम गौस को मात्र 56,388 वोट मिले थे. मधुबनी कम्युनिस्ट पार्टी के दबदबा पूर्व में रहा है. पर, बीते दो लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस और भाकपा दोनों बड़े पार्टियों को पटकनी देकर जीत अपने नाम किया है. महागठबंधन से यहां पर कांग्रेस, राजद व सीपीआई की दावेदारी चल रही है.
कांग्रेस को यदि यह सीट मिलती है तो डाॅ शकील अहमद या डॉ मदन मोहन झा उम्मीदवार हो सकते हैं. अगर यह सीट राजद के कोटे में जाती है तो अब्दुल बारी सिद्दीकी या डाॅ फैयाज अहमद प्रत्याशी हो सकते हैं. जबकि, सीपीआई से रामनरेश पांडेय का दावा बनता दिख रहा है. बहुत कुछ प्रत्याशी के नाम क्लियर होने के बाद ही सामने आ सकेगा.
छह विधानसभा क्षेत्र हैं इसमें शामिल
मधुबनी सीट में छह विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. इसमें बेनीपट्टी, बिस्फी, हरलाखी, मधुबनी, केवटी एवं जाले विधानसभा क्षेत्र हैं. यहां करीब 16 लाख 27 हजार मतदाता हैं. मधुबनी में 1952 में दरभंगा पूर्वी सीट से अनिरुद्ध सिन्हा ने चुनाव जीता था. इसके बाद मधुबनी लोकसभा सीट से 1957 में कांग्रेस के श्याम नारायण मिश्रा, 1962 में यमुना प्रसाद मंडल, 1980 में सफीकुल्लाह अंसारी, 1984 में मौलाना अब्दुल हन्नान अंसारी, 1998 में डाॅ शकील अहमद ने चुनाव जीता था. जबकि, सीपीआइ के खाते में 1967, 1971, 1980, 1989, 1991 एवं 1996 का चुनाव आया. वहीं, भाजपा के खाते में यह सीट 1999, 2009 एवं 2014 में आयी थी.
इनपुट : रमण मिश्रा, मधुबनी
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




