टूरिस्ट परमिट के नाम पर दिल्ली तक चलाते हैं बस

Published at :05 May 2018 2:14 AM (IST)
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टूरिस्ट परमिट के नाम पर दिल्ली तक चलाते हैं बस

मधुबनी : मोतिहारी के कोटवा में हुए बस हादसे ने एक बार फिर परिवहन विभाग की लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है. इससे पहले बेनीपट्टी के बसैठा बस हादसे में भी यह बात सामने आया था कि अवैध रूप से बसों का परिचालन उस पथ पर किया जाता है, जहां का परमिट बस […]

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मधुबनी : मोतिहारी के कोटवा में हुए बस हादसे ने एक बार फिर परिवहन विभाग की लापरवाही की पोल खोल कर रख दी है. इससे पहले बेनीपट्टी के बसैठा बस हादसे में भी यह बात सामने आया था कि अवैध रूप से बसों का परिचालन उस पथ पर किया जाता है, जहां का परमिट बस मालिक के पास रहता भी नहीं है. परमिट के नाम पर बसों के परिचालन का गोरखधंधा यहां भी फल फूल रहा है.
जो बातें सामने आयी हैं उससे यह बात स्पष्ट रूप से सामने आ गयी है कि परमिट कहीं का होता है और बसों का परिचालन कहीं और रूट पर होता है. अभी बात दिल्ली जाने वाली बसों की हो रही है तो यहां यह बात सामने आयी है कि मधुबनी से दिल्ली जाने वाली अधिकांश बसों का परमिट टूरिस्ट बस का है. पर इसके आड़ में इन बसों में यात्रियों को दिल्ली तक की सेवा दी जाती है और मोटी रकम की कमाई की जा रही है. जानकारी के अनुसार लंबी दूरी की चलने वाले किसी भी बस मालिक के पास स्थायी परमिट नहीं होता. यह बसे टूरिस्ट परमिट के नाम पर चलती है. यह गोरखधंध वर्षों से चल रहा है.
राज्य के सीमावर्ती चेकपोस्ट पर कटता है टैक्स. एक राज्य से दूसरे राज्य में टूरिस्ट परमिट पर प्रवेश करने वाले बड़ी बसे राज्य के सीमावर्ती इलाके में परिवहन विभाग द्वारा स्थापित चेकपोस्ट पर स्टेट इंट्री टैक्स कटाते हैं. यह टैक्स तीन माह तक वैध होता है. टूरिस्ट परमिट की अवधि एक सप्ताह होने के बाद पुन: उसे रिनुअल करा लिया जाता है .
बस की नहीं होती नियमित जांच
जानकारी के अनुसार लंबी दूरी की बसें अत्याधुनिक होती है. यह पूर्णतया कंप्यूटराइज्ड सिस्टम रहता है. ड्राइवर के फिंगर प्रिंट से यह चलता है. पर व्यवसाय के कारण बस माफिया इन नियमों का अनुपालन नहीं करते है. सूत्रों के अनुसार जम्मू से कटरा जाने वाली लगभग 60 बसें जो जम्मू से कटरा जाती थी. परिचालन बंद हो जाने के कारण बसें बंद हो गयी थी. जिसे बिहार के बस माफिया द्वारा खरीद कर उन्हीं बसों को विभिन्न ट्रेवेल्स के नाम पर दिल्ली तक चलाया जा रहा है. इन बस चालकों के बस की नियमित जांच भी नहीं हो पाती है. फलत: लंबी दूरी की यात्राओं में दुर्घटना की संभावना बन जाती है.
हरकत में आया प्रशासन . मोतिहारी के कोटवा के समीप एनएच 28 पर गुरुवार को हुए भीषण बस हादसे के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया. शुक्रवार को परिवहन पदाधिकारी दिल्ली जाने वाले वाहनों के संबंध में जानकारी लेने बस स्टैंड सहित अन्य स्थान, जहां से बस खुलती है, उस स्थल का निरीक्षण किया. हालांकि दुर्घटना के बाद शुक्रवार को मधुबनी से दिल्ली जाने वाली बसे नहीं चली.
बस की छत पर अब भी चढ़ रहे यात्री
बसैठ बस हादसा के बाद जिला प्रशासन ने बसों की छत पर यात्रियों के चढ़ने पर पूरी तरह रोक लगाने के आदेश जारी किये थे. पर आज तक उस आदेश पर अमल नहीं किया गया. बड़ी बस हो या छोटी, हर बस के छत पर गठ्ठर की तरह यात्री सवार देखे जा रहे हैं.
जिले से लगभग डेढ़ दर्जन बसों का होता है परिचालन
जिला मुख्यालय एवं जिला के विभिन्न अनुमंडल एवं प्रखंड से लगभग डेढ़ दर्जन बस का परिचालन दिल्ली के लिए होता है. इन बसों के परिचालन का कोई आंकड़ा परिवहन विभाग के पास नहीं है. पर जिला मुख्यालय से 4 बस प्रतिदिन एवं खुटौना, बाबूबरही फुलपरास एवं अन्य स्थानों से
लगभग 14 बसें दिल्ली के लिए प्रस्थान करती है.
एक राज्य से दूसरे राज्य में जाने वाली अधिकतर बसे टूरिस्ट परमिट पर चलती है. इन बसों का परमिट तीन दिन से लेकर 10 दिनों तक का ही मिलता है. यह परमिट राज्य के पर्यटन विभाग द्वारा जारी किया जाता है. ट्रांजिस्ट परमिट प्राप्त कर बस मालिकों द्वारा पर्यटक के नाम पर दिल्ली या अन्य राज्यों में यात्रियों को ढ़ोने का काम होता है.
अप्रशिक्षित ड्राइवर करते हैं बस का परिचालन
जानकार बताते हैं कि कभी-कभी नौसिखुआ चालक के द्वारा भारी वाहन चलाने पर भी बस दुर्घटना बढ़ जाती है. ऐसी बसों में स्लीपर की व्यवस्था रहने के कारण यह बसें लंबी होती है व उनकी उंचाई भी अधिक होती है. जिस कारण दुर्घटना की स्थिति में अप्रशिक्षित ड्राइवर इन बसों पर से नियंत्रण खाे देते हैं.
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