जीरो एफआइआर, इ-एफआइआर व चार्जशीट होगा डिजिटल

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जीरो एफआइआर, इ-एफआइआर व चार्जशीट होगा डिजिटल

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सिंहेश्वर. बीपी मंडल इंजीनियरिंग कॉलेज सिंहेश्वर में नये कानून को लेकर पुलिस पदाधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण बेल्ट्रॉन विश्वान के माध्यम ज्ञान भवन पटना से इसका ऑनलाइन प्रशिक्षण पूरे बिहार में चल रहा है. बताया गया कि देश में आइपीसी- सीआरपीसी की जगह अब तीन नये कानून लेंगे. ये कानून हैं भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम. नये कानून में राजद्रोह को खत्म किया गया है. बताया कि एक जुलाई से पूरे देश में तीन नये आपराधिक कानून लागू हो रहे हैं. ये कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता व भारतीय साक्ष्य अधिनियम औपनिवेशिक युग के पुराने कानूनों की जगह लेंगे और आपराधिक न्याय प्रणाली को आधुनिक बनायेंगे. इसी संदर्भ में पीटीसी स्तर से लेकर पुलिस अधीक्षक स्तर तक के सभी 330 से अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जाना है, जो 110-110 के बैच में तीन-तीन दिन तक चलेगा. देश में वर्षों पुराने कानूनों को एक नये रूप में लागू किया जा रहा है. भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 के माध्यम से एक नये युग की शुरुआत होगी. इन तीन नये प्रमुख कानूनों का मकसद सजा देने की बजाय न्याय देना है. साइबर अपराध के मामलों में बढ़ोतरी हुई है, जबकि पुराने कानूनों में साइबर अपराधों के लिए कोई प्रावधान नहीं था. नये कानून में इसके लिए व्यवस्था की गयी है. इन नये कानूनों में सूचना प्रौद्योगिकी के साथ ही फॉरेंसिक लैब की स्थापना पर बल दिया गया है. इन कानूनों में इ- रिकॉर्ड का प्रावधान किया जा रहा है. इसके अंतर्गत जीरो एफआइआर, इ-एफआईआर व चार्जशीट डिजिटल होंगे. पीड़ित को 90 दिनों के भीतर सूचना प्रदान की जायेगी एवं सात साल या उससे अधिक की सजा के प्रावधान वाले मामलों में फॉरेंसिक जांच अनिवार्य होगी. वही राजद्रोह कानून की जगह देशद्रोह को परिभाषित किया गया है. आतंकवाद से जुड़े मामलों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. इन नये कानूनों के तहत थाने से कोर्ट तक कि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी. इसके अंतर्गत देश में एक ऐसी न्यायिक प्रणाली स्थापित होगी, जिसके जरिये तीन वर्षों के भीतर न्याय मिल सकेगा. जानकारी के अनुसार 35 धाराओं में न्याय प्रक्रिया का समय सीमा निर्धारित किया गया है. इलेक्ट्रॉनिक तरीके से शिकायत दायर करने के तीन दिन के भीतर एफआइआर दर्ज करने का प्रावधान है. साथ ही यौन उत्पीड़न के मामलों में तय समय के भीतर जांच रिपोर्ट देना अनिवार्य होगा. मौके पर एएसपी प्रवेंद्र भारती, डीएसपी मुख्यालय मनोज कुमार, यातायात डीएसपी, थानाध्यक्ष श्रीकांत शर्मा, इंस्पेक्टर रामलखन पंडित, विजय पासवान, हुस्न आरा, अशोक सिंह, विनोद कुमार आदि मौजूद थे.

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