मधेपुरा में शहर से गांव तक वटसावित्री पर्व की धूम, सुहागिन महिलाओं ने की पूजा-अर्चना
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 16 May 2026 12:03 PM
Vat Savitri Puja
Vat Savitri Puja 2026: मधेपुरा में वटसावित्री पर्व को लेकर शुक्रवार को श्रद्धा, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला. शहर से गांव तक सुहागिन महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा कर पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली की कामना की.
Vat Savitri Puja 2026: मधेपुरा से कुमार आशीष की रिपोर्ट. मधेपुरा जिले में वटसावित्री पर्व पूरे धार्मिक उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया. सुबह से ही महिलाएं सज-धज कर मंदिरों और वट वृक्ष स्थलों पर पहुंचीं. सुहागिन महिलाओं ने विधि-विधान के साथ व्रत रखकर पूजा-अर्चना की और पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि तथा परिवार की खुशहाली की कामना की. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक भक्ति और उल्लास का माहौल बना रहा.
वट वृक्ष के नीचे जुटीं सुहागिन महिलाएं
शहर के विभिन्न मंदिरों और सार्वजनिक पूजा स्थलों पर सुबह से महिलाओं की भीड़ देखने को मिली. महिलाओं ने पूजा की थाल सजाकर वट वृक्ष की परिक्रमा की और धागा बांधकर सावित्री-सत्यवान की कथा सुनी. इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति गीतों और मंगलगान से गूंजता रहा. कई महिलाओं ने पारंपरिक लाल और पीले परिधानों में पूजा कर पर्व की गरिमा को और खास बना दिया.
गांवों में भी दिखा आस्था का उत्साह
ग्रामीण क्षेत्रों में भी वटसावित्री पर्व को लेकर खास उत्साह नजर आया. गांवों में महिलाएं समूह बनाकर पूजा स्थलों तक पहुंचीं और पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार पूजा संपन्न की. कई जगहों पर महिलाओं ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर अखंड सौभाग्य की शुभकामनाएं दीं. ग्रामीण इलाकों में सुबह से ही धार्मिक माहौल बना रहा.
बाजारों में बढ़ी पूजा सामग्री की खरीदारी
पर्व का असर बाजारों में भी साफ दिखाई दिया. पूजा सामग्री, फल, मिठाई, चूड़ी, सिंदूर और श्रृंगार सामग्री की दुकानों पर दिनभर खरीदारों की भीड़ लगी रही. दुकानदारों ने बताया कि वटसावित्री पर्व को लेकर इस बार बाजार में अच्छी रौनक रही और सुबह से ही महिलाओं की आवाजाही बनी रही.
सावित्री-सत्यवान की कथा से जुड़ी है आस्था
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वटसावित्री व्रत में माता सावित्री द्वारा अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लाने की कथा का विशेष महत्व है. इसी आस्था के साथ विवाहित महिलाएं यह व्रत रखती हैं और परिवार की सुख-शांति तथा पति की लंबी आयु की कामना करती हैं.
पर्व ने बढ़ाया सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव
वटसावित्री पर्व ने महिलाओं के बीच सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूत किया. पूजा स्थलों पर महिलाओं ने एक-दूसरे से मिलकर शुभकामनाएं दीं और पारंपरिक रीति-रिवाजों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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