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उदाकिशुनगंज के हरिहर साहा महाविद्यालय भवन का छत गिरा

Updated at : 07 Aug 2024 9:11 PM (IST)
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उदाकिशुनगंज के हरिहर साहा महाविद्यालय भवन का छत गिरा

उदाकिशुनगंज के हरिहर साहा महाविद्यालय भवन का छत गिरा

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प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज

अनुमंडल मुख्यालय में अभी हाल ही में नेशनल डीएवी पब्लिक स्कूल का छज्जा गिरने का जख्म भरा भी नहीं कि एक और मामला सामने आ गया. अनुमंडल मुख्यालय स्थित बीएन मंडल विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई हरिहर साहा महाविद्यालय के जर्जर भवन का छत गिर गया. संयोग रहा कि उस वक्त उक्त कमरे में कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था. काॅलेज के प्रो मेंहदी सरवर ने कहा कि यह अनुमंडल क्षेत्र का एक मात्र सरकारी महाविद्यालय है. कॉलेज का भवन पुराना है. भवन की जर्जरता को लेकर कई बार महाविद्यालय प्रशासन द्वारा विश्वविद्यालय और सरकार को अवगत कराया गया है, लेकिन कॉलेज की व्यवस्था की सुधि नहीं ली गयी. नतीजन मंगलवार को जर्जर भवन का छत गिर गया.

गिरने के इंतजार में हैं दो और कमरे

अभी जिस बिल्डिंग का एक कमरा गिरा है, उसी बिल्डिंग के दो कमरे एक वर्ष पूर्व गिर चुका है. पांच कमरों वाले इस बिल्डिंग के शेष बचे दो कमरे भी उसी जर्जर स्थिति में हैं. बचे दो कमरों में अभी भी कक्षाएं संचालित की जा रही है. कॉलेज व विश्वविद्यालय प्रशासन यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के जीवन से खिलवाड़ कर रहा है.

68 साल पुराना था बिल्डिंग

मालूम हो कि हरिहर साहा महाविद्यालय 1956 से ही अस्तित्व में है. भरभराकर टूटने वाला बिल्डिंग भी स्थापना काल यानी 68 वर्षों में था. भवन पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है. कॉलेज में पढ़ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को हमेशा हादसे की आशंका बनी रहती है.

प्रभात खबर ने किया था सजग

बीते 13 मई को प्रभात खबर ने अपने स्पेशल रिपोर्ट में हरिहर साहा महाविद्यालय: धरोहर मिटाने की हो रही साजिश शीर्षक से कॉलेज के जर्जर भवनों की कहानी बतायी थी. बताया था कि उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र का एक मात्र अंगीभूत हरिहर साहा महाविद्यालय विश्वविद्यालय प्रशासन के उदासीनता व सरकार की उपेक्षापूर्ण नीति का शिकार हो रहा है. हरिहर साहा महाविद्यालय स्थापना काल से ही अपेक्षा का दंश झेल रहा है, जबकि यह कॉलेज बीएनएमयू का एक अंगीभूत इकाई है. बड़े नेताओं ने आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं दिया है. महाविद्यालय के छात्रों को भवन के अभाव में वर्षों से खाली जमीन पर पढ़ाया जाता है. सभी कमरे जर्जर हो चुका है. जर्जर स्थिति कभी भी छात्र-छात्राओं के लिए जानलेवा साबित हो सकता है और भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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