माननीय शब्द के दुरुपयोग पर विरोध, राज्यपाल, मुख्यमंत्री व कुलपति से की शिकायत

Updated at : 09 Feb 2025 6:53 PM (IST)
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माननीय शब्द के दुरुपयोग पर विरोध, राज्यपाल, मुख्यमंत्री व कुलपति से की शिकायत

भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई हरिहर साहा महाविद्यालय उदाकिशुनगंज में शिलापट्ट अनावरण की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है.

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प्रतिनिधि, मधेपुरा. भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय की अंगीभूत इकाई हरिहर साहा महाविद्यालय उदाकिशुनगंज में शिलापट्ट अनावरण की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है. मामला बीते सात फरवरी को आयोजित प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान योजनांतर्गत बहुद्देश्यीय भवन निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में लगे शिलापट्ट से जुड़ा है. बीएनएमयू अंतर्गत हरिहर साहा महाविद्यालय उदाकिशुनगंज में सात फरवरी को महाविद्यालय परिसर में लगे बहुद्देशीय भवन निर्माण के शिलापट्ट पर बीएनएमयू कुलसचिव प्रो डा विपिन कुमार राय के पद कुलसचिव के साथ माननीय का प्रयोग पर अब विरोध शुरू हो गया है. कुलसचिव के पद में माननीय लगाया जाना बन गया है विवाद बीएनएमयू के सीनेट सदस्य के साथ-साथ कई छात्र संगठन विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म पर विरोध करने के साथ-साथ राज्यपाल, मुख्यमंत्री व बीएनएमयू कुलपति को लिखित शिकायत कर रहे हैं. मालम हो कि बीते शुक्रवार को बीएनएमयू अंतर्गत हरिहर साहा महाविद्यालय उदाकिशुनगंज में सात फरवरी को महाविद्यालय परिसर में लगे बहुद्देशीय भवन निर्माण के शिलापट्ट का शिलान्यास किया गया. इस शिलापट्ट पर कुलसचिव के पद में माननीय लगाया जाना विवाद बन गया है और यह विवाद तूल पकड़ने लगा है. छह वर्ष साल पहले बीएनएमयू की हुई थी बड़ी फजीहत छह साल पहले ऐसे ही मामले में हुई फजीहत से हरिहर साहा महाविद्यालय प्रशासन ने सीख नहीं ली. जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने 2019 में दो फरवरी को विश्वविद्यालय के नये परिसर में विश्वविद्यालय परीक्षा भवन के उद्घाटन के शिलापट्ट में तत्कालीन कुलसचिव कर्नल नीरज कुमार के नाम के साथ माननीय लगा दिया था. जिसपर बड़ा विवाद ही नहीं हुआ था, बल्कि खुद कर्नल नीरज ने इसे अवैध करार दिया था, तब बाद में माननीय को शिलापट्ट से धूमिल किया गया था. पदाधिकारी को खुश करने के लिए किया गया है प्रोटोकॉल का उल्लंघन बीएनएमयू के सीनेट सदस्य डा रंजन यादव ने कहा कि विश्वविद्यालय ने अगस्त 2024 के अंतिम सप्ताह में प्रभारी प्राचार्य अर्थात प्रोफेसर इंचार्ज बनाया है, लेकिन शिलापट्ट पर उन्होंने स्वयं को प्रधानाचार्य लिखा है और अपने नाम के आगे माननीय भी लगा लिया है. इस अवसर पर शिलापट्ट अनावरण में मुख्य अतिथि कुलसचिव प्रो डा बिपिन कुमार राय के नाम के आगे भी माननीय शब्द लगाया है, जबकि नियम के तहत कुलसचिव के नाम में माननीय शब्द नहीं लगता है. यहां भी पदाधिकारी को खुश करने के लिए प्रोटोकॉल का जमकर उल्लंघन किया गया है. कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में बिहारीगंज के विधायक निरंजन कुमार मेहता के साथ बीएनएमयू के कुलानुशासक डा विमल सागर का नाम है, जो प्रभारी प्राचार्य के पति हैं. बीएनएमयू डीएसडब्ल्यू व सीसीडीसी को कार्यक्रम में आने के लिए पूछा तक नहीं गया है. डा रंजन यादव ने कुलपति से शिलान्यास कार्यक्रम में प्रोटोकॉल उल्लंघन के मामले पर कार्रवाई करने की मांग की है. कुलसचिव के साथ माननीय का प्रयोग सर्वथा गलत एआईवाईएफ जिला संयोजक हर्ष वर्धन सिंह राठौर ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री व कुलपति को पत्र लिखकर संगठन की ओर से कड़ी नाराजगी जताई है और इसे माननीय शब्द का दुरुपयोग बताया है. राठौर ने कहा कि बीएनएमयू में सेमिनार के नाम पर राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय शब्दों के दुरुपयोग की पुरानी रीत रही है, लेकिन हरिहर साहा महाविद्यालय द्वारा लगाये शिलापट्ट में नई परंपरा शुरू हो गयी है, जो माननीय शब्द को मजाक बनाने की साजिश प्रतीत होती है. राठौर ने कहा कि बीएनएमयू कुलसचिव प्रो डा विपिन कुमार राय के पद कुलसचिव के साथ माननीय का प्रयोग सर्वथा गलत है. नियमों की मानें तो रजिस्टार का ओहदा प्रोफेसर से भी नीचे होता है. दुखद है कि शिलापट्ट शिलान्यास के समय कुलसचिव के उपस्थित होने के बाद भी उन्होंने इसपर आपत्ति नहीं जताई, मानों मौन सहमति हो. प्राचार्य के साथ लगे माननीय ने तो मानों रही सही कसर ही पूरी कर दी. कुलानुशासक को नीचा दिखाने की साजिश शर्मनाक राठौर ने कहा कि उसी शिलापट्ट में अध्यक्षता के रूप में जहां विश्वविद्यालय प्रतिनिधि का नाम विचारणीय है, जब कार्यक्रम महाविद्यालय का है तो अध्यक्षता विश्वविद्यालय प्रतिनिधि क्यों किए. वहीं कुलसचिव से बड़े पद के कुलानुशासक को नीचे रख और माननीय से वंचित कर, जान बुझकर नीचा दिखाने की कोशिश की गयी है. यद्यपि यह पद माननीय के दायरे में नहीं आता है जो प्रशासनिक अपरिपक्वता के साथ साथ कुलानुशासक पद का अपमान है. नियमानुसार कुलानुशासक का पद कुलसचिव से ऊपर होता है.

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