नौकरी को लेकर भूदाता गोलबंद
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jun 2016 5:03 AM (IST)
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विद्युत रेल इंजन कारखाने . स्थानीय भूदाता व मजदूरों ने की बैठक ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाने को अपनी जमीन देने वाले स्थानीय लोग गोलबंद हो रहे हैं. इस सिलसिले में सोमवार को तुनियाही स्थित शिव मंदिर में स्थानीय भूदाताओं ने बैठक कर कारखाने में मजदूरी तथा नौकरी देने की मांग की. मधेपुरा : […]
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विद्युत रेल इंजन कारखाने . स्थानीय भूदाता व मजदूरों ने की बैठक
ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाने को अपनी जमीन देने वाले स्थानीय लोग गोलबंद हो रहे हैं. इस सिलसिले में सोमवार को तुनियाही स्थित शिव मंदिर में स्थानीय भूदाताओं ने बैठक कर कारखाने में मजदूरी तथा नौकरी देने की मांग की.
मधेपुरा : विद्युत रेल इंजन कारखाने को अपनी जमीन देने वालों ने मुआवजा राशि में भी देरी तथा अब तक पूरा पैसा नहीं मिलने पर विरोध जताया. स्थानीय लोगों का कहना था कि इस कारखाने को जमीन उनलोगों ने दी है. अपना रोजी रोजगार व सर्वस्व जमीन के रूप में देने के बाद जब चाहरदीवारी के निर्माण कार्य में बाहरी मजदूर से काम लिया जा रहा है
तो यह सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि भविष्य में उनलोगों के साथ क्या बर्ताव होगा. ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजे की राशि में हो रही देरी पर सरकार को वर्ष 2008 से अद्यतन 12 प्रतिशत ब्याज की दर से भुगतान करना चाहिए. इस मौके पर श्रीपुर चकला के मुखिया अनिल अनल ने कहा कि सरकार जमीन मालिकों के साथ छल कर रही है. पहले तो उनकी जमीन ली और अब काम नहीं देकर यह जता रही है कि बस मतलब निकल गया है.
इस मौके पर अधिवक्ता निर्मल सिंह ने कहा कि 27 दिसंबर को आरबिट्रेटर द्वारा मुआवजा संबंधी फैसला सुनाया गया था. जिसके विरोध में सेक्शन 34 के तहत रिव्यू की याचिका को सात जनवरी को दायर की गयी. नियम के अनुसार एक माह के भीतर इस पर फैसला होना था. लेकिन आज भी यह याचिका लंबित है. उल्टे जमीन रेलवे कारखाना के लिए हस्तगत करा दी गयी और अब स्थानीय लोगों को मजदूरी तक नहीं करने दी जा रही है. इस मौके पर प्रकाश कुमार पिंटू, अभय कुमार सिंह, निर्मल कुमार सिंह, राकेश कुमार सिंह, विष्णुदेव यादव, रंजीत बहादूर सिंह, भंजन सिंह आदि उपस्थित थे.
तुनियाही में बैठक कर तैयार की रणनीति
2007 में हुई घोषणा, 2016 में हुआ भूमि पूजन
मधेपुरा में विद्युत रेल इंजन कारखाना की घोषणा वर्ष 2007 में की गयी. लेकिन इसे आकार लेने में नौ वर्ष लगे. चार मई 2016 को जब फ्रांस की कंपनी ऑल्सटॉम ने भूमि पूजन किया तो लोगों को लगा कि अब मधेपुरा औद्यगिक नगरी बन जायेगी.
बीस हजार करोड़ से बनेगा कारखाना
मधेपुरा में बीस हजार करोड़ की लागत से रेल विद्युत इंजन कारखाने का निर्माण होना है. विद्युत रेल इंजन कारखाना के निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी ऑल्सटॉम को दी गयी है. ये परियोजनाएं पूरी तरीके से एफडीआइ (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर आधारित है.
तीन सौ एकड़ जमीन पर बनेगा इंजन कारखाना
मधेपुरा के श्रीपुर चकला गांव के पास अधिग्रहित तीन सौ एकड़ जमीन पर बीस हजार करोड़ की लागत से रेल विद्युत इंजन कारखाने का निर्माण होना है. मधेपुरा में बनने वाले विद्युत रेल इंजन कारखाना के निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी ऑल्सटॉम को दी गयी है. ये परियोजनाएं पूरी तरीके से एफडीआइ (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर आधारित है. यह प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है.
पीएम ने किया था वादा
एक नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधेपुरा आये थे तो उन्होंने चुनाव के बाद मधेपुरा में लंबित रेल इंजन परियोजना को गति देने की बात कही थी. इसके बाद यहां काफी उथल पूथल के बाद रेल कारखाना का सपना धीरे धीरे आकार लेने लगा. हालांकि 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा और मढ़ौरा में रेल इंजन कारखाना बनाने की घोषणा की थी लेकिन तब तक रेलवे राशि के अभाव का रोना रोती रही थी.
07 मई 2016 को ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाने को अपनी जमीन देने वाले स्थानीय लोगों ने कारखाने की चाहरदीवारी के निर्माण कार्य में बाहरी मजदूरों से काम लेने का विरोध करते हुए शनिवार को अधिग्रहित स्थल पर जमकर विरोध प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की.
11 सौ एकड़ जमीन अधिग्रहण का है प्रस्ताव
तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के कार्यकाल में मधेपुरा में रेल इंजन कारखाना के लिए श्रीपुर चकला गांव के पास 11 सौ एकड़ जमीन अधिग्रहित कर कारखाना निर्माण की दिशा में विभागीय कार्रवाई पूर्ण की गयी थी. इसके बाद अधिग्रहित जमीन के खाता खेसरा के साथ कई दैनिक पत्रों में गजट भी प्रकाशित किया गया.
जब तक लालू यादव रेल मंत्री रहे, तब तक रेल मंत्रालय द्वारा काफी उत्सुकता के साथ कागजी प्रक्रिया पूरी की जाती रही. इसी दौरान सैकड़ों भू स्वामियों को मुआवजा भी दे दिया गया था. लेकिन लालू यादव के रेल मंत्री से हटते ही मंत्रालय कारखाना निर्माण के दिशा में सुस्त पड़ गयी. 2013 एक्ट एवं 2014 के प्रधानमंत्री के अध्यादेश के तहत ही अधिग्रहण का मुआवजा देने की मांग कर रहे थे.
फ्रांस की ऑल्सटॉम कंपनी को मिली इंजन कारखाना बनाने की जिम्मेदारी
आखिरकार मधेपुरा में ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाना निर्माण कार्य कुछ ही दिनों में शुरू होने की संभावना बन गयी है. सोमवार को रेल मंत्रालय ने बिहार के वर्षों से लंबित चली आ रही दो रेल इंजन कारखाना की टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर लिया. मधेपुरा में बीस हजार करोड़ की लागत से रेल विद्युत इंजन कारखाने का निर्माण होगा. जबकि छपरा के मढ़ौरा में डीजल इंजन कारखाना का निर्माण करीब 15 हजार करोड़ की राशि से होगा.
मधेपुरा में बनने वाले विद्युत रेल इंजन कारखाना के निर्माण की जिम्मेदारी फ्रांस की सबसे बड़ी ट्रांसपोर्ट कंपनी ऑल्सटॉम को दी गयी है. वहीं मढ़ौरा में बनने वाले डीजल इंजन कारखाना का निर्माण अमेरिकी कंपनी जेनरल इलेक्ट्रिक कंपनी करेगी. ये दोनों परियोजनाएं पूरी तरीके से एफडीआइ (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर आधारित है.
यह प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है.इसके बारे में ग्रीन फील्ड विद्युत रेल इंजन कारखाना के चीफ इंजीनियर राजेश कुमार ने बताया कि जल्द ही रेल इंजन कारखाना निर्माण का कार्य शुरू हो जायेगा. जमीन अधिग्रहण के लिए जिला प्रशासन की ओर से मांगी गयी राशि रेल मंत्रालय ने मुहैया करा दी है.
गौरतलब है कि विगत एक नवंबर को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मधेपुरा आये थे तो उन्होंने चुनाव के बाद मधेपुरा में लंबित रेल इंजन परियोजना को गति देने की बात कही थी. 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा और मढ़ौरा में रेल इंजन कारखाना बनाने की घोषणा की थी लेकिन अब तक रेलवे राशि के अभाव का रोना रोती रही थी.
प्रभारी जिला भू अर्जन पदाधिकारी अरुण कुमार झा ने बताया कि रेल इंजन कारखाना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम काफी समय से चल रहा था.
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