गरीबी की मार: रोजगार की तलाश में मुंबई पहुंचे गढ़वा के युवक के कटे पैर, इलाज के अभाव में लौटा वतन

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गढ़वा के सदर अस्पताल में भर्ती पुरूषोत्तम

Garhwa Man Train Accident: घर की गरीबी मिटाने के लिए मायानगरी मुंबई गए गढ़वा का युवक पुरुषोत्तम पासवान के लिए एक लोकल ट्रेन काल बनकर आई. हादसे में अपने दोनों पैर गंवाने के बाद, आर्थिक तंगी के कारण उसे मुंबई के अस्पतालों से वापस सदर अस्पताल लौटना पड़ा. पढ़ें, कैसे एक हादसे ने एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को उम्र भर के दर्द में बदल दिया.

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Garhwa Man Train Accident, गढ़वा (अविनाश की रिपोर्ट): नियति की मार और घोर आर्थिक तंगी ने गढ़वा के एक परिवार को पूरी तरह बेबस कर दिया है. घर की गरीबी दूर करने का सुनहरा सपना लेकर मुंबई गए मझिआंव के एक युवक के लिए परदेस काल बन गया. एक दर्दनाक लोकल ट्रेन हादसे में उस युवक ने अपने दोनों पैर गंवा दिए. महानगर के महंगे इलाज का खर्च वहन न कर पाने के कारण परिजन उसे वापस गढ़वा लेकर आए हैं, जहां फिलहाल सदर अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है.

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रोजगार की तलाश में गया था पुरुषोत्तम

घटना मझिआंव थाना क्षेत्र के गेहरी गांव की है. यहां के निवासी स्वर्गीय राम आशीष पासवान के पुत्र पुरुषोत्तम पासवान कुछ समय पूर्व रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई गए थे. परिजनों ने बताया कि वही अपने परिवार का मुख्य कमाऊ सदस्य था. वह वहां कड़ी मजदूरी कर न केवल अपना और अपने परिजनों का पेट पाल रहा था, बल्कि घर की जर्जर आर्थिक स्थिति को सुधारने की जी-तोड़ कोशिश में भी लगा हुआ था.

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लोकल ट्रेन ने छिनी पैरों की शक्ति

जानकारी के अनुसार, बीते दिनों काम पर जाने के दौरान पुरुषोत्तम लोकल ट्रेन पकड़ने की कोशिश कर रहा था. इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे पटरी पर गिरकर ट्रेन की चपेट में आ गया. इस भीषण हादसे में उसके दोनों पैर बुरी तरह कट गए. स्थानीय पुलिस और प्रत्यक्षदर्शियों ने उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया और उसके मोबाइल से परिजनों को सूचना दी.

पूंजी खत्म हुई तो वापस लौटा घर

हादसे की खबर मिलते ही परिजन बदहवास होकर मुंबई पहुंचे, लेकिन वहां के निजी अस्पतालों का खर्च उनके सामर्थ्य से कोसों दूर था. परिजनों ने बताया कि जितने पैसे उनके पास थे, वे शुरुआती दवाओं में ही खर्च हो गए. बड़े अस्पतालों में लंबे उपचार और सर्जरी का खर्च सुनकर उनके होश उड़ गए. अंततः कोई रास्ता न देख, परिजन उसे एंबुलेंस के सहारे वापस गढ़वा लेकर आए और सदर अस्पताल में भर्ती कराया.

अंधेरे में डूबा परिवार का भविष्य

पुरुषोत्तम की इस हालत ने पूरे परिवार के सामने भविष्य का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है. वृद्ध मां और अन्य आश्रितों के सामने अब दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो गया है. सदर अस्पताल के डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है, लेकिन दोनों पैर कट जाने के कारण वह अब ताउम्र दूसरों के सहारे पर निर्भर हो गया है. ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से पीड़ित परिवार को सरकारी सहायता और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है.

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