हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला: 28 करोड़ के गबन के आरोपी धीरेंद्र सिंह की जमानत खारिज, कोर्ट ने माना गंभीर अपराध

Published by : Sameer Oraon Updated At : 21 Apr 2026 9:22 PM

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हजारीबाग कोषागार घोटाला

Hazaribagh Treasury Scam: हजारीबाग के बहुचर्चित 28 करोड़ रुपये के कोषागार घोटाले में न्यायालय ने मुख्य आरोपियों पर शिकंजा कस दिया है. अपर मुख्य न्यायाधीश कुमारी निकिता की अदालत ने अभियुक्त धीरेंद्र सिंह की जमानत याचिका खारिज करते हुए मामले को अत्यंत गंभीर बताया है. पिछले 8 वर्षों से पुलिस विभाग की लेखा शाखा में चल रहे इस भ्रष्टाचार के खेल में तीन सिपाही और उनकी पत्नियां भी शामिल हैं. पढ़ें, इस बड़े घोटाले की अब तक की पूरी जांच रिपोर्ट.

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Hazaribagh Treasury Scam, हजारीबाग (जय नरायण की रिपोर्ट): हजारीबाग जिले के बहुचर्चित 28 करोड़ रुपये के ट्रेजरी (कोषागार) घोटाले में न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है. अपर मुख्य न्यायाधीश कुमारी निकिता की अदालत ने प्राथमिक अभियुक्त और पुलिस विभाग की लेखा शाखा के कर्मी धीरेंद्र सिंह की जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है. अदालत ने मामले की गंभीरता और सरकारी राशि के सुनियोजित गबन को देखते हुए प्रार्थी को राहत देने से इनकार कर दिया. इस फैसले ने घोटाले के अन्य आरोपियों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

डेटा विश्लेषण से उजागर हुआ 8 साल का ‘पाप’

इस घोटाले की परतें 8 अप्रैल 2026 को उस समय खुलनी शुरू हुईं, जब झारखंड सरकार के वित्त विभाग (कोषागार एवं संस्थागत वित्त निदेशालय) ने डेटा का गहन विश्लेषण किया. जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि पिछले आठ वर्षों के दौरान जिला कोषागार से मात्र दो बैंक खातों में 15.41 करोड़ रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन किए गए थे. जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ा, घोटाले की कुल राशि 28 करोड़ रुपये तक पहुंच गई.

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तीन सिपाही और उनकी पत्नियों का ‘नेक्सस’

हजारीबाग जिला प्रशासन द्वारा गठित चार सदस्यीय जांच टीम ने खुलासा किया कि इस पूरे खेल में पुलिस विभाग की लेखा शाखा में तैनात तीन सिपाही- शंभु कुमार, रजनीश सिंह और धीरेंद्र सिंह सीधे तौर पर संलिप्त थे. इन पुलिसकर्मियों ने सरकारी राशि की अवैध निकासी कर उसे विभिन्न संदिग्ध खातों में ट्रांसफर किया. इस भ्रष्टाचार में शंभु कुमार और रजनीश सिंह की पत्नियों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनकी गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है. लोहसिंगना थाना में कांड संख्या 32/2026 के तहत दर्ज इस मामले में पुलिस अब खातों के ट्रेल को खंगाल रही है.

बुधवार की सुनवाई पर टिकी नजरें

धीरेंद्र सिंह की जमानत अर्जी खारिज होने के बाद, अब सबकी नजरें बुधवार को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं. इस दिन मुख्य आरोपी शंभु कुमार की पत्नी काजल कुमारी की जमानत याचिका पर अदालत में बहस होगी. पुलिस इस जमानत का कड़ा विरोध करने की तैयारी में है ताकि घोटाले की आगे की जांच और रिकवरी की प्रक्रिया बाधित न हो.

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लेखक के बारे में

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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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