गढ़वा डीसी ने विस्थापितों के लंबित सर्वे को पूरा करने का दिया अल्टीमेटम, 10 जून तक डेडलाइन

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 06 Jun 2026 6:47 PM

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अधिकारियों के साथ बैठक करते उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा (बीच में). फोटो: प्रभात खबर

Garhwa News: गढ़वा के उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने मंडल डैम एवं कांडी वितरणी परियोजना से जुड़े विस्थापितों के लंबित सर्वेक्षण कार्यों को 10 जून 2026 तक पूरा करने का अल्टीमेटम दिया है. पुनर्वास स्थलों पर सड़क, पेयजल, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास कार्यों की भी समीक्षा की गई. सोन-कनहर परियोजना के शेष कार्यों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गढ़वा से अविनाश सिंह की रिपोर्ट

Garhwa News: गढ़वा के उपायुक्ति पशुपति नाथ मिश्रा ने शनिवार को जिले में विस्थापितों के लंबित सर्वेक्षण के कामों को पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को अल्टीमेटम दिया है. उन्होंने सर्वेक्षण के कामों को पूरा करने के लिए 10 जून 2026 समय-सीमा तय की है. उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा की अध्यक्षता में शनिवार को समाहरणालय सभागार में मंडल डैम एवं कांडी वितरणी परियोजना के अवशेष कार्यों तथा पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं के विकास को लेकर जिला स्तरीय समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई. बैठक में डूब क्षेत्र से प्रभावित व विस्थापित परिवारों के पुनर्वास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभागों को निर्देश दिए गए.

ग्रामीण क्षेत्रों का विकास भी जरूरी

उपायुक्त ने कहा कि पुनर्वास का कार्य केवल विस्थापित परिवारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि पुनर्वास स्थलों और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों का भी समग्र विकास किया जाना आवश्यक है. उन्होंने रंका अंचल के मौजा विश्रामपुर और रमकंडा अंचल के मौजा बलिगढ़ में चिह्नित पुनर्वास स्थलों पर स्थल समतलीकरण, सड़क, सिंचाई, तालाब, आंगनबाड़ी केंद्र, सरना-मसना, पूजा स्थल, धुमकुड़िया भवन, स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, बिजली एवं पेयजल जैसी सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने का निर्देश दिया.

चार दिनों में मांगा बजट प्राक्कलन, लापरवाही पर सख्त रुख

उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने कहा कि पुनर्वास से संबंधित निर्माण कार्यों की योजनाओं को अब धरातल पर उतारने का समय आ गया है. जिन विभागों द्वारा अब तक प्राक्कलन (इस्टीमेट) उपलब्ध नहीं कराया गया है, वे आगामी चार दिनों के अंदर विस्तृत बजट प्राक्कलन तैयार कर समर्पित करें, ताकि प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति की कार्रवाई की जा सके. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण परियोजना की मॉनिटरिंग भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा नियमित रूप से की जा रही है, इसलिए सभी अधिकारी सर्वोच्च प्राथमिकता और आपसी समन्वय के साथ निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूरा करें.

डीसी द्वारा तय की गई समय-सीमा

  • 10 जून 2026 तक: अपर समाहर्ता परियोजना से जुड़े सभी लंबित सर्वेक्षण कार्यों को शत-प्रतिशत और त्रुटिरहित रूप से पूर्ण कर प्रस्तुत करेंगे.
  • 2 से 3 दिनों के भीतर: अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) लंबित प्रस्तावों को अंतिम रूप देकर उपायुक्त कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे.
  • 4 दिनों के अंदर: संबंधित विभाग लंबित योजनाओं का विस्तृत बजट प्राक्कलन जमा करेंगे.

सोन-कनहर परियोजना की भी हुई समीक्षा

बैठक के दौरान उपायुक्त ने सोन-कनहर परियोजना की भी प्रगति जांची. उन्होंने संबंधित कार्यान्वयन एजेंसी को निर्देश दिया कि क्षेत्र के किसानों के हित को देखते हुए इस सिंचाई परियोजना के जितने भी शेष कार्य बचे हैं, उन्हें अविलंब पूरा किया जाए.

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बैठक में ये लोग थे मौजूद

बैठक में पुलिस अधीक्षक आशुतोष शेखर वन प्रमंडल पदाधिकारी (दक्षिणी वन प्रमंडल), सिविल सर्जन डॉ जान एफ केनेडी पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के उप निदेशक, जल संसाधन विभाग व रूपांकन प्रमंडल (मेदिनीनगर) के कार्यपालक अभियंता, जिला कल्याण पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, गढ़वा के एसडीएम संजय कुमार व रंका के एसडीओ, विशेष भू-अर्जन पदाधिकारी, ग्रामीण कार्य विभाग, पथ निर्माण विभाग, भवन प्रमंडल, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल व विद्युत प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता, रंका व भंडरिया के बीडीओ, रंका, रमकंडा, भंडरिया व काण्डी के अंचल अधिकारी (सीओ) तथा वैपकोस के प्रतिनिधि उपस्थित थे.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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