किसान हूं...आसमान में धान बो रहा हूं..!

Published at :13 Dec 2015 6:44 PM (IST)
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किसान हूं...आसमान में धान बो रहा हूं..!

किसान हूं…आसमान में धान बो रहा हूं..! फोटो – मधेपुरा 12 एवं 13 कैप्शन – गोशाला परिसर में शोक सभा के दौरान उद्गार व्यक्त करते वक्ता एवं मौजूद बुद्धिजीवी – जन कवि एवं किसान कवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ को याद करते हुए जन संस्कृति मंच ने किया सभा का आयोजन प्रतिनिधि, मधेपुरा मैं किसान हूं. […]

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किसान हूं…आसमान में धान बो रहा हूं..! फोटो – मधेपुरा 12 एवं 13 कैप्शन – गोशाला परिसर में शोक सभा के दौरान उद्गार व्यक्त करते वक्ता एवं मौजूद बुद्धिजीवी – जन कवि एवं किसान कवि रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ को याद करते हुए जन संस्कृति मंच ने किया सभा का आयोजन प्रतिनिधि, मधेपुरा मैं किसान हूं. आसमान में धान बो रहा हूं. कुछ लोग कह रहे हैं कि पगले.. आसमान में धान नहीं जमा करता.. जवाहर लाल विश्वविद्यालय में रह कर सत्ता और व्यवस्था के खिलाफ जन कविता के जरिये लोगों की आवाज बुलंद करने वाले कवि रमा शंकर यादव ‘ विद्रोही’ को याद करते हुए जिला मुख्यालय स्थित गोशाला परिसर में एक सभा का आयोजन किया गया. शंभू शरण भारतीय की अध्यक्षता में जन संस्कृति मंच की ओर से आयोजित इस सभा में शहर विचारशील, प्रबुद्ध एवं प्रगतिशील लोगों एकत्रित हुए थे. सभा के बाद जन संस्कृति मंच के सचिव अमित कुमार राजा ने शोक सभा का आयोजन किया. सभा की शुरूआत में पूर्णिया से आये पंकज कुमार सिंह ने जेएनयू दिल्ली में कवि विद्रोही से हुई मुलाकात का संस्मरण सुनाया. पंकज ने विद्रोही को अत्याधुनिक और मौलिक चिंतन का कवि बताया. अधिवक्ता श्यामानंद गिरी ने जन कवि विद्रोही को क्रांतिकारी चेतना का कवि करार देते हुए उनकी भावनाएं प्रसारित करने का संकल्प लिया. अधिवक्ता कृतनारायण यादव ने जन कवि विद्रोही को सामाजिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया. प्रो मणिभूषण प्रसाद वर्मा ने ‘विद्रोही’ को इतिहास मर्मज्ञ के रूप में रेखांकित किया. उन्होंने कहा कि विद्रोही ने अपनी कविताओं में इतिहास से नये प्रतिमान और प्रतीक लिये. यह अद्भुत है.वहीं साहित्य मर्मज्ञ शंभू शरण श्रीवास्तव ने जन कवि विद्रोही की रचनाओं को व्यवस्था परिवर्तन का कारगर हथियार बताया. उन्होंने विद्रोही की कविताओं को समग्रता में परखने की बात कही. मोहनजोदाड़ो कविता का खास तौर पर उन्होंने उल्लेख किया. भाकपा माले के जिला सचिव कामरेड रामचंद्र दास ने कहा कि जनकवि रमाशंकर यादव विद्रोही जन संस्कृति मंच के सदस्य थे और हमने एक महत्वपूर्ण साथी खो दिया है. मुख्य अतिथि पत्रकार रूपेश ‘रूपक’ ने कवि विद्रोही के साथ जेएनयू में हुई मुलाकात का वाकया सुनाया. उन्होंने विद्रोही की कविता ‘जन गण मन’ सुनाते हुए उनके व्यक्तित्व को रेखांकित किया. मंच संचालन जन संस्कृति मंच के अध्यक्ष शंभू शरण भारतीय ने किया. धन्यवाद ज्ञापन किसान संसद के अध्यक्ष आद्यानंद यादव ने कवि विद्रोही के प्रति अपने उद्गार व्यक्त किये.

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