नियमावली प्रारूप तैयार नहीं किये जाने से अधर में है दलपतियों की बहाली प्रक्रिया

Published at :19 Nov 2015 6:43 PM (IST)
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नियमावली प्रारूप तैयार नहीं किये जाने से अधर में है दलपतियों की बहाली प्रक्रिया

नियमावली प्रारूप तैयार नहीं किये जाने से अधर में है दलपतियों की बहाली प्रक्रिया — 18 वर्षों से अटका है मामला — –ग्रामीणों की रक्षा के लिए की जाती थी दलपतियों की बहाली, पुलिस को मिलता था सहयोग– प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा. नियमावली प्रारूप समिति द्वारा 18 वर्ष बाद भी प्रतिवेदन तैयार नहीं किये जाने से […]

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नियमावली प्रारूप तैयार नहीं किये जाने से अधर में है दलपतियों की बहाली प्रक्रिया — 18 वर्षों से अटका है मामला — –ग्रामीणों की रक्षा के लिए की जाती थी दलपतियों की बहाली, पुलिस को मिलता था सहयोग– प्रतिनिधि, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा. नियमावली प्रारूप समिति द्वारा 18 वर्ष बाद भी प्रतिवेदन तैयार नहीं किये जाने से दलपति बहाली प्रक्रिया अधर में लटक गया है. जबकि अभी के समय में ग्राम कचहरी को दलपति की जरूरत आ पड़ी है. अनुमंडल के तहत छह प्रखंडों में किसी भी ग्राम पंचायत में दलपति व ग्राम रक्षा दल गठित नहीं है. जब दलपति कार्यरत था तो पंचायत के कार्यों में मुखिया सरपंच व ग्राम सेवक को कार्यों के निष्पादन में सहयोग मिला करता था. अगर समाज में किसी भी विवाद को सरपंच द्वारा बैठक बुलाने की जरूरत आ पड़ी तो आम लोगों के साथ – साथ वादी व प्रतिवादी को दल पति के माध्यम से सूचना भेजवायी जाती थी. इतना ही नहीं दलपति ग्राम रक्षा दल कर्मियों के साथ रात में पहरेदारी का काम भी किया करते थे. इन कर्मियों से थानेदार को भी अच्छी मदद मिल जाया करती थी. — बहाली बंद करने का दिया था निर्देश — दिनांक 09 फरवरी 1993 को ज्ञापांक 164 द्वारा बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग पंचायत राज्य निदेशालय के तत्कालीन आयुक्त व सचिव केएएच सुव्रमणियम ने दलति बहाली पर रोक लगाया था. इस संदर्भ में उन्होंने जिला पंचायत राज्य पदाधिकारी को पत्र भेजा था. जिसमें उल्लेख किया गया था कि पुराने अधिनियम ग्राम रक्षा दल नियमावली 1949 को निरस्त कर दिया गया है. ऐसी स्थिति में निरस्त नियमावली के प्रावधानों के तहत कोई नियुक्ति या अन्य कार्य नहीं लिये जा सकते है. — नहीं बनायी जा सकी नियमावली — उस पत्र में स्पष्ट किया गया था कि सरकार ग्राम रक्षा दल के संगठन कर्तव्य व व्यवहार के लिए नियमावली बनाने हेतु एक समिति को प्राधिकृत किया गया है. किंतु यह आश्चर्य की बात है कि 1993 से आज तक नियमावली नहीं बनायी जा सकी है. जिसके कारण दलपतियों व ग्राम रक्षा दल कर्मियों की बहाली नहीं की जा सकी है. — ग्राम रक्षा दल का किया जाता था गठन — ग्राम पंचायत के मुखिया ग्राम रक्षा दल का गठन किया करते थे. हर वार्ड से एक एक व्यक्ति का चयन किया जाता था. जिसका नेतृत्व चयनित दलपति किया करते थे. इन कर्मियों के जिम्मे ही ग्रामीण जनता की सुरक्षा का कमान रहा करता था. जिन्हें समय समय पर राज्य सरकार द्वारा वर्दी की आपूर्ति की जाती थी.– दलपति को दी जाती थी पदोन्नति — अच्छा का काम करने व शैक्षणिक योग्यता रखने वाले दलपति को स्थायी तौर पर राज्य सरकार ग्राम पंचायत सेवक की नौकरी दे कर पदोन्नति देती थी. लेकिन अब तो उस सुविधा से भी वंचित होना पड़ गया है. — चौकीदार उपलब्ध कराने का निर्देश — जरूरत को देखते हुए करीब एक वर्ष पूर्व बिहार सरकार ने पुलिस अधीक्षक को आदेश दिया था कि ग्राम कचहरी को चौकीदार उपलब्ध कराया जाय. किंतु सरकार के आदेश का असर कितना पड़ा इसी से समझा जा सकता है कि अनुमंडल के एक मात्र चौसा प्रखंड मुख्यालय के पश्चिमी ग्राम पंचायत के ग्राम कचहरी को दो माह पूर्व चौकीदार उपलब्ध कराया गया है. शेष ग्राम कचहरी को आज तक चौकीदार नसीब नहीं हो सका है. — कहते है पूर्व दलपति — पूर्व दलपति व ग्राम रक्षा दल के सदस्य दिनेश पूर्वे राजेंद्र साह, मुन्ना साह, दुखी रजक, कैलाश राम व सुरेश पासवान का कहना है कि उन लोगों को पद से हटा देने के बाद बेरोजगार हो गये है. कोई दिल्ली पंजाब में मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण कर रहे है. तो कोई मिठाई बनाने, तो कोई तांगा चलाने का काम कर रहे है. हमलोग गांव वालों की सेवा किया करते थे. दिन में ग्राम कचहरी का काम तो रात में गांव में घुम-घुम कर पहरेदारी किया करते थे. उसके बदले में राज्य सरकार द्वारा वर्दी उपलब्ध करायी जाती थी. जबकि ग्राम कचहरी व ग्रामीणों से आर्थिक मदद मिल जाया करता था. सेवा की भावना अभी भी मन में है. ग्राम कचहरी में कार्यरत न्यायमित्र व अधिवक्ता विनोद कुमार मेहता ने कहा कि नई सरकार गठन होने के बाद सरकार को याद दिलाने के लिए वे अपने स्तर से पत्राचार कर दलपति व ग्राम रक्षा दल की बहाली की मांग करेंगे. इस तरह नई सरकार से कुछ हद तक अपेक्षाएं है. लेकिन सरकार को याद दिलाने की जरूरत जरूर पड़ गयी है. देखना यह है कि नई सरकार कुछ कर पाती है या नहीं.

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