मोदी सरकार मजदूर कानून को समाप्त करने में तुली है
Author Prabhat khabar digital desk
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मधेपुरा : मोदी सरकार मजदूर कानून को समाप्त करने पर तुली है. निर्माण श्रमिकों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा लाभ को जटिल किया जा रहा है. विभिन्न तरह के सांप्रदायिक रंग रंगने वाले बिल लाकर उसकी आड़ में मालिक परस्त नीति लागू हो रही है. इसके खिलाफ बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन संघर्ष कर रहा […]
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मधेपुरा : मोदी सरकार मजदूर कानून को समाप्त करने पर तुली है. निर्माण श्रमिकों को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा लाभ को जटिल किया जा रहा है. विभिन्न तरह के सांप्रदायिक रंग रंगने वाले बिल लाकर उसकी आड़ में मालिक परस्त नीति लागू हो रही है. इसके खिलाफ बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन संघर्ष कर रहा है. धुरगांव पंचायत के लक्ष्मी स्थान प्रांगण में मजदूर यूनियन की बैठक को संबोधित करते हुए कॉमरेड रामचंद्र दास ने उक्त बाते कही.
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मौके पर वक्ताओं ने बताया कि गरीब मजदूरों को लाभ से वंचित रखने के लिए नियमों को जटिल किया जा रहा है. हजारों निर्माण मजदूर आज भी भूमिहीन है. हर सरकारी सड़क किनारे पोखर पार पर रहने को मजबूर हैं. श्रम कार्यालय मधेपुरा में रजिस्ट्रेशन व नवीकरण के मजदूरों का अभी तक ऑनलाइन नहीं हो पाया है.
इसके कारण से सालाना चिकित्सा व्यवस्था तीन हजार का लाभ नहीं मिल पाया है. श्रमिक श्रम कार्यालय का चक्कर लगाते लगाते बदहाल है. देश में बढ़ रहे महंगाई बेरोजगारी आर्थिक संकट से लोग तबाह है. बिहार में हत्या बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि हो रही है. सरकार मुख्य मुद्दा से ध्यान भटका रही है.
19 दिसंबर को वामदलों के बिहार बंद में माले व सभी संगठन सड़क पर उतरकर बंद में भाग लेंगे. सभा में सुभाष मल्लिक, महिया देवी, राजेंद्र दास, सावित्री देवी, सबिया देवी, हावा देवी, लूटनी देवी, चंदन कुमार, महेंद्र दास, शैलेंद्र ,मनोज कुमार, लक्ष्मी देवी, बिंदेश्वरी ऋषिदेव, पटवारी दास, सीताराम रजक आदि ने भाग लिया.
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