बाइक पर चार लोगों को बैठने में नहीं आती शर्म

Updated at : 27 Aug 2019 5:52 AM (IST)
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बाइक पर चार लोगों को बैठने में नहीं आती शर्म

मधेपुरा : शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के कस्बों तक इन दिनों वाहनों की कमान नाबालिगों के हाथ है. आये दिन हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी पुलिस व परिवहन विभाग के लोग सबकुछ जान कर भी अनजान बने हुए हैं. हालांकि नाबालिगों के हाथों में वाहनों की कमान खुद परिजनों ने दी हुई है. […]

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मधेपुरा : शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के कस्बों तक इन दिनों वाहनों की कमान नाबालिगों के हाथ है. आये दिन हो रही दुर्घटनाओं के बाद भी पुलिस व परिवहन विभाग के लोग सबकुछ जान कर भी अनजान बने हुए हैं.

हालांकि नाबालिगों के हाथों में वाहनों की कमान खुद परिजनों ने दी हुई है. अभिभावक भी कम उम्र में इन्हें महंगी बाइक दिलाने में गुरेज नहीं कर रहे हैं, जो आये दिन हो रही दुर्घटनाओं की वजह बनता जा रहा है. नाबालिग अधिकतर बाइकों पर ही स्कूल जाते है.
नाबालिग से हादसा हो जाय तो फिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी. जी हां यह कड़वा सत्य है जिसकी अनदेखी पुलिस और परिवहन विभाग कर रहा है. इसी का परिणाम है कि दिन भर व्यस्त सड़कों पर नाबालिग सरपट तेज रफ्तार में कहर बरपाते वाहन चलाते नजर आते हैं, लेकिन पुलिस सिर्फ हेलमेट देखती है. उसके अंदर के चेहरे को नजरअंदाज करती है.
रफ्तार की कहर से मौत का डर : एक तरफ वर्तमान समय में वाहनों की संख्या में वृद्धि हो रही है, तो दूसरी ओर सड़क दुर्घटना इजाफा हो रहा है. जिला प्रशासन और परिवहन विभाग इस दिशा में कुछ भी पहल करते नहीं दिखाई दे रहे है. गत कुछ महीनों का आंकड़ा देखे तो दर्जन से अधिक सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है.
इसमें से अधिकांश घटना में व्यक्ति की घटना स्थल पर ही मौत हो चुकी है. वहीं कुछ लोग जिंदगी भर के लिए अपाहिज हो चुके हैं. सड़क दुर्घटना थमने का नाम नहीं ले रही है. आगे निकलने के क्रम में अथवा पास देने के क्रम में दुर्घटना घटित होती है. तेज रफ्तार में वाहन पर जरा भी कंट्रोल नहीं है. नये युवक सड़क पर फुल स्पीड के साथ वाहन चलाते निकल जाते है.
कई लोग तो गाड़ी की आवाज सुनकर अचंभित रहे जाते है. शहर में कहीं भी ट्रैफिक व्यवस्था नाम कोई चीज नहीं है. यूं तो ट्रैफिक कंट्रोल के नाम पर कुछ पुलिस के जवानों को प्रतिनियुक्त भले ही करा दी गई है. लेकिन उसका असर होता नहीं दिखता है.
अभिभावक हैं जिम्मेदार : वाहन देने में बच्चों के परिजन भी कम जिम्मेदार नहीं है. उनको किसी भी गाड़ी की चाभी सौंप दी जाती है चाहे बाइक हो या कार. बच्चों के हाथ में वाहन आते ही वे तेज रफ्तार से दौड़ाने लगते हैं.
सदर अस्पताल से लेकर पीएचसी व निजी अस्पतालों के आंकड़ों की कि मानें तो 14 से 16 वर्ष के बच्चे अधिक दुर्घटना ग्रस्त होकर अस्पताल पहुंचते हैं. जिस बच्चे की उम्र 18 साल से कम है, वह नियम के मुताबिक वाहन चलाने के लिए सक्षम नहीं हैं और मां-बाप खुद जिम्मेदार हैं कि वह अपने बच्चे को बाइक खरीद कर दे देते हैं.
इसके बाद रफ्तार की कमान हाथ में आते ही बच्चे बाइकों को दौड़ाते हैं और हादसों का सबसे बड़ा कारण बनते हैं. अब इन पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस को इस मुद्दे पर अहम कदम उठाना चाहिए. स्कूलों में होने वाली हर पेरैंट्स मीटिंग में पुलिस की ओर से उन्हें जागरूक किया जाय. स्कूल प्रबंधकों व बच्चों के परिजनों को बताया जाय कि वह नाबालिग को बाइक न दें क्योंकि इससे सड़क हादसे बढ़ते हैं.
लगायी जाती है सड़कों पर रेस : दिन की शुरुआत होते ही क्षेत्र के बच्चे गाड़ियों को सड़कों पर दौड़ाना शुरू कर देते हैं. इन बच्चों को न तो सड़क परिवहन के नियमों का पूरा ज्ञान होता है और न ही ये पूरे ध्यान से वाहन चलाते हैं. तेज रफ्तार में वाहन चलाना मानो उनकी आदत बन चुकी है.
दोस्तों के साथ रेस लगाने सहित अन्य नियमों का उल्लंघन करते नज़र आते हैं. यह करना नाबालिकों के जान के लिए खतरनाक है. वहीं आम लोगों को दुर्घटना के लिए आमंत्रित करती है. क्षेत्र के निजी कोचिंग संचालक इन मामलों में बिल्कुल ध्यान नहीं देते हैं. कोचिंग के परिसर से बाहर निकलते ही बच्चे मनमानी पर उतर जाते हैं.
आवाजाही करने वाले लोगों के लिए खतरनाक : मुख्यालय के व्यस्त सड़कों पर जब गाड़ियों की गड़गड़ाहट पैदल यात्री या आमजन को सुनाई देती है. वे पहले ही साइड हो जाते हैं. जरा सी भी देरी गाड़ी की चपेट में ला सकता है. नाबालिग बच्चों को तेज रफ्तार के साथ बाइक की सवारी करते देखना आम बात है.
सोमवार को जिला मुख्यालय वार्ड दो निवासी नीरज यादव के पुत्र अंशु कुमार (13) सड़क दुर्घटना में जख्मी हो गया. जानकारी के अनुसार नीरज यादव के पुत्र अंशु अपने पिता का बाइक लेकर बाजार गया हुआ था. इसी दौरान उसकी बाइक अनियंत्रित हो गयी, जिससे उसकी दुर्घटना हो गयी. जिसके बाद स्थानीय लोगों की मदद से उसे प्राथमिक उपचार के लिए सदर अस्पताल में लाया गया, जहां चिकित्सक के द्वारा प्राथमिक उपचार किया गया.
सोमवार को सदर प्रखंड के मरूवाहा वार्ड नंबर चार निवासी दीपनारायण यादव के 26 वर्षीय पुत्र सोनू कुमार की सड़क दुर्घटना हुई. जानकारी के अनुसार सोनू नवटोल मेला गए हुए थे.
लौटने के क्रम में जीतापुर के समीप एक पशु बाइक के सामने आ गया, जिससे उनकी बाइक अनियंत्रित होकर गिर गयी. जिससे उनकी दुर्घटना हो गई. जिसके बाद वहां के स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए सदर अस्पताल में लाया गया. चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार कर रेफर कर दिया गया.
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