सुहागिनों ने मांगा अखंड सुहाग

Updated at : 04 Jun 2019 5:03 AM (IST)
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सुहागिनों ने मांगा अखंड सुहाग

मधेपुरा : जिले भर में वट सावित्री पर्व आस्था के साथ मनायी गयी. सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा कर पति के दीर्घ आयु की कामना की. ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को मनाये जाने वाले वट सावित्री पर्व के लिए सुहागिनों ने दिन भर व्रत रखकर पूजा की. इस पूजन में सुहागिन वट वृक्ष […]

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मधेपुरा : जिले भर में वट सावित्री पर्व आस्था के साथ मनायी गयी. सुहागिनों ने वट वृक्ष की पूजा कर पति के दीर्घ आयु की कामना की. ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तिथि को मनाये जाने वाले वट सावित्री पर्व के लिए सुहागिनों ने दिन भर व्रत रखकर पूजा की. इस पूजन में सुहागिन वट वृक्ष के जड़ को सींच कर कम से कम पांच बार वट वृक्ष के चारों तरफ धागा लपेट कर वट वृक्ष की प्रदक्षिणा करती हैं.

बांस की बीनी से जल को सिक्त कर नाना प्रकार के फल व मिठाइयों की प्रसाद चढ़ा कर पूजा-अर्चना की जाती है. बीनी से वट वृक्ष को हवा कर सावित्री की कथा श्रवण की जाती है. सुहागिन बीनी से अपने पति को हवा दे कर पेड़ के अंगूठे का चरणामृत लेती है. इसके बाद अरबा भोजन ग्रहण करती हैं. खास कर नव विवाहिताओं के लिए इस व्रत का विशेष महत्व है. जिले के सिंहश्वर, शंकरपुर, मुरलीगंज, बिहारीगंज, आलमनगर, उदाकिशुनगंज, गम्हरिया, पुरैनी, चौसा में महिलाओं ने वट सावित्री का पर्व मनाया.
वट सावित्री का पर्व मनाया : ग्वालपाड़ा/नयानगर. वट सावित्री का व्रत ग्वालपाड़ा प्रखंड के नोहर, झंझरी, शाहपुर, पीरनगर, कंटाही आदि गांवों में संपन्न हो गया. जानकारी के अनुसार ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या को मनाये जाने वाले वट -सावित्री व्रत हिंदू सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत ही महत्व समझा जाता है. वट -सावित्री पर्व में वट वृक्ष व सावित्री शब्द का व्यापक अर्थ माना जाता है. वट वृक्ष के नीचे ही सावित्री अपने पति सत्यवान का जीवन दान यमराज के प्राप्त किया था.
वट-सावित्री व्रत के दिन सुहागिन महिला सुबह में ही स्नान, ध्यान के नव वस्त्र से सुसज्जित हो विभिन्न प्रकार की पकवान, फल व मिठाई बांस की बिनी, बांस की डाली में लेकर वट वृक्ष के नीचे उत्तर या पूर्व मुख बैठ कर सावित्री व सत्यवान की मूर्ति की पूजा कर वट वॄक्ष में लाल धागा लपेट कर वृक्ष की प्रदक्षिणा कर वट वृक्ष को साक्षी रख बांस की बिनी से हवा लगा पंडितों के द्वारा कथा श्रवण कर व्रत का समापन करती है.
जहां वट वृक्ष नहीं होता है वहां सुहागिन अपने आंगन में वट वृक्ष की डाली को खड़ा कर उसकी पूजा करती है. घर पहुंच कर सुहागिन अपने पति को बांस की विनी से हवा लगा कर संध्या बेला में अरवा भोजन कर व्रत का समापन करती हैं. संतान सुख समृद्धि व पति की लंबी उम्र के लिये सुहागिनों के लिए पर्व महत्व समझा जाता है.
नयानगर प्रतिनिधि के अनुसार, उदाकिशुनगंज प्रखंड अंतर्गत शहजादपुर, नयानगर, बुधमा व खारा पंचायत में सुहागिन महिलाओं ने अपने पति के लंबी उम्र की वट सावित्री की पूजा की. कहा जाता है कि सावित्री के पति सत्यवान रोजाना की तरह लकड़ी काटने जंगल गया था.
पेड़ पर लकड़ी काटते वक्त सत्यवान को विषेला सर्प ने काट लिया और सत्यवान मूर्छित हो गया. सावित्री ने यमराज के पीछे चलने लगी. यमराज के लाख मना करने के बाद भी सावित्री वापिस नहीं लौटी. अंतः सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किया. सवित्री को देवताओं द्वारा वरदान प्राप्त हुआ था कि आज से नारी जाति सच्चे मन से पूजा करेंगी तो उसका मनोकामना पूर्ण होगा.
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