गैस संकट से महंगी हुई शादियां, कैटरिंग हुई 20% तक महंगी, मेन्यू हुआ छोटा

Updated at : 08 Apr 2026 12:53 PM (IST)
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LPG crisis - 8 April 2026.

सांकेतिक तस्वीर

LPG crisis : बिहार में शादियों का सीजन शुरू होते ही गैस सिलेंडर की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण शादी-विवाह के आयोजन अब पहले से काफी महंगे हो गए हैं, इसका सीधा असर कैटरिंग, मेन्यू और पूरे आयोजन के खर्च पर दिख रहा है. लोग खर्च कम करने के लिए मेन्यू छोटा कर रहे हैं.

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LPG crisis : बिहार में गैस सिलेंडर की भारी किल्लत के कारण कैटरिंग के दामों में 15 से 20 प्रतिशत तक का उछाल आया है. अब लोग शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं ताकि किसी तरह व्यावसायिक सिलेंडरों का जुगाड़ हो सके.

बढ़ती लागत के कारण अब शादियों का मेन्यू छोटा हो रहा है और ‘लाइव काउंटर’ बंद होने की कगार पर हैं.

थाली की बढ़ी कीमत

गैस की कमी और कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने प्रति प्लेट की दर 50 से 100 रुपये तक बढ़ा दी है. पहले जो शाकाहारी प्लेट 650 रुपये में मिल रही थी, अब उसकी कीमत 700 रुपये पार कर गई है. वहीं, मांसाहारी थाली 800 से बढ़कर 900 रुपये की हो गई है.

पटना के पॉश इलाकों और बड़े होटलों में तो वेज थाली की दर 1000 से बढ़कर 1200 रुपये तक पहुंच गई है. इस खर्च को काबू करने के लिए अब लोग व्यंजनों की संख्या में कटौती कर रहे हैं.

लाइव काउंटर और फंक्शन्स पर चली ‘कैंची’

गैस की खपत कम करने और लागत बचाने के लिए शादियों से डोसा, चाट, जलेबी और पाव-भाजी जैसे लाइव काउंटर हटाए जा रहे हैं. इतना ही नहीं, लोग अब हल्दी, मेहंदी और संगीत जैसे प्री-वेडिंग कार्यक्रमों को या तो रद्द कर रहे हैं या उन्हें बेहद सादगी से मना रहे हैं.

इन कार्यक्रमों में अब व्यंजनों की लंबी फेहरिस्त की जगह ‘रेडिमेड नाश्ता’ परोसने की तैयारी है.

शादी का कार्ड लेकर गैस एजेंसी पहुंच रहे लोग

एलपीजी गैस वितरक संघ के अनुसार, बड़ी संख्या में लोग शादी का कार्ड और आवेदन लेकर व्यावसायिक सिलेंडर के लिए गुहार लगा रहे हैं. तेल कंपनियों की ओर से शादियों के लिए अलग से सिलेंडर आवंटित करने का कोई विशेष प्रावधान नहीं है.

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) का अनुमान है कि 15 अप्रैल से 11 जुलाई के बीच शादी के 28 मुहूर्त हैं, जिसमें केवल पटना जिले में ही डेढ़ लाख से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत होगी. यदि किल्लत बरकरार रही, तो शादियों का रंग और भी फीका पड़ सकता है.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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