कोयला खदानों के कर्मचारियों के लिए PF नियमों में बदलाव, केंद्र सरकार लाई 'CMPF रूल्स 2026', पढ़ें नए प्रावधान

कोयला खदानों के कर्मचारियों के PF में हुआ बड़ा बदलाव
केंद्र सरकार ने कोयला खदानों में कर्मचारियों के भविष्य निधि (CMPF) से जुड़े कानूनों के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर नए नियमों का मसौदा जारी किया है. यह पहली बार है जब कानून के उल्लंघन की जांच, जुर्माने और अपील के अधिकार को स्पष्ट किया गया है.
रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट
रांची : केंद्र सरकार ने कोयला खदानों में कर्मचारियों के भविष्य निधि (सीएमपीएफ) से जुड़े कानून के उल्लंघन पर कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर नया रूल्स बनाया है. कोयला मंत्रालय ने "कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस (एडजुडिकेशन ऑफ पेनाल्टीज एंड अपील) रूल्स, 2026" का मसौदा (ड्राफ्ट) जारी किया है. इस पर लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगा गया है. इन नियमों के माध्यम से पहली बार यह स्पष्ट किया गया है कि कानून के उल्लंघन के मामलों की जांच कैसे होगी. जुर्माना किस प्रक्रिया से लगाया जायेगा. संबंधित व्यक्ति या कंपनी को अपील करने का क्या अधिकार होगा. ड्राफ्ट नियमों के अनुसार यह नियम कोल माइंस प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजंस एक्ट- 1948 के तहत दंड निर्धारण और अपील की प्रक्रिया को लागू करेंगे. नियमों के लागू होने के बाद प्रत्येक मामले में तय प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा.
शिकायत या रिपोर्ट के आधार पर होगी जांच
मसौदे में कहा गया है कि यदि एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को यह विश्वास होता है कि किसी कंपनी, नियोक्ता, ठेकेदार या अन्य संबंधित व्यक्ति ने अधिनियम अथवा उसके तहत बनाई गई किसी योजना का उल्लंघन किया है, तो वह स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) या शिकायत, निरीक्षण रिपोर्ट, अनुपालन रिपोर्ट अथवा अन्य रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू कर सकता है. जांच के दौरान संबंधित अभिलेख, रजिस्टर, रिटर्न, दस्तावेज और स्पष्टीकरण मांगे जा सकेंगे.
नोटिस के बिना नहीं लगेगा जुर्माना
ड्राफ्ट नियमों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को महत्व दिया गया है. यदि प्रथम दृष्टया मामला बनता है, तो संबंधित व्यक्ति को फॉर्म-1 में नोटिस जारी किया जायेगा. नोटिस में उल्लंघन का विवरण, संबंधित कानूनी प्रावधान, मांगे गए दस्तावेज तथा जवाब देने की समय-सीमा का उल्लेख होगा. जवाब देने के लिए सामान्यतः 15 से 30 दिन का समय दिया जायेगा.
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ऑनलाइन भी हो सकेगी सुनवाई
संबंधित व्यक्ति स्वयं या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से अपना पक्ष रख सकेगा. सुनवाई फिजिकल या डिजिटल माध्यम से भी कराई जा सकेगी. यदि नोटिस मिलने के बावजूद कोई जवाब नहीं दिया जाता या सुनवाई में उपस्थित नहीं होता, तो एडजुडिकेटिंग ऑफिसर एकपक्षीय (एक्स-पार्टी) निर्णय भी ले सकता है.
जुर्माना तय करने के लिए तय होंगे मानदंड
ड्राफ्ट नियमों में पहली बार यह भी स्पष्ट किया गया है कि जुर्माना तय करते समय किन-किन बातों पर विचार किया जायेगा. इनमें उल्लंघन की गंभीरता और अवधि का भी ख्याल रखा जायेगा. प्रभावित कर्मचारियों या पेंशनभोगियों की संख्या के आधार पर जुर्माना तय होगा. यह भी देखा जायेगा कि संस्था पहले भी ऐसा उल्लंघन किया है कि नहीं. उल्लंघन से प्राप्त अनुचित लाभ, सार्वजनिक हित या फंड को हुई क्षति, जानबूझकर की गई गलती तथा जांच में सहयोग जैसे पहलू का भी ख्याल रखा जायेगा.
आदेश में कारण बताना होगा अनिवार्य
एडजुडिकेटिंग ऑफिसर को प्रत्येक मामले में कारणयुक्त आदेश जारी करना होगा. यदि उल्लंघन सिद्ध नहीं होता है तो मामला समाप्त किया जायेगा. उल्लंघन साबित होने पर अधिनियम के अनुसार जुर्माना लगाया जायेगा. आदेश में यह भी बताया जायेगा कि जुर्माना कब और कैसे जमा करना है तथा अपील का अधिकार क्या है.
30 दिन में अपील का अधिकार
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, एडजुडिकेटिंग ऑफिसर के आदेश से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिनों के भीतर अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकेगा. पर्याप्त कारण होने पर विलंब से दायर अपील भी स्वीकार की जा सकेगी. अपील का निपटारा यथासंभव 60 दिनों के भीतर करने का प्रयास किया जायेगा.
क्या कहना है यूनियन का
ऑल इंडिया कोल पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके सिंह राठौर का कहना है कि इसमें कर्मियों के हितों की बात नहीं की गयी है. अगर समय पर पीएफ जमा नहीं हु्आ तो कर्मियों को क्या मिलेगा. कर्मियों के नुकसान भरपाई की बात नहीं की गयी है. इस लड़ाई के लिए सभी श्रमिक संगठनों को भी आगे आना चाहिए.
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लेखक के बारे में
By समीर उरांव
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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