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सरकार कर रही वादा खिलाफी, भड़क सकते हैं नियोजित शिक्षक

सरकार शिक्षकों के साथ वादाखिलाफी कर रही है. ये बातें बिहार टेट शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सह राज्य अध्यक्ष मंडली सलाहकार समिति सदस्य विनोद कुमार वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही.

लखीसराय : सरकार शिक्षकों के साथ वादाखिलाफी कर रही है. ये बातें बिहार टेट शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष सह राज्य अध्यक्ष मंडली सलाहकार समिति सदस्य विनोद कुमार वर्मा ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही. उन्होंने बताया कि सूबे के चार लाख नियोजित शिक्षकों का चला आ रहा हड़ताल 78 दिनों के बाद सरकार और संघ के बीच मानवीय जीवन का ख्याल रखते हुए सकारात्मक माहौल में समाप्ति की घोषणा की गयी थी.

परंतु अब सरकार अपनी बातों से मुकर वादाखिलाफी कर रही है. आज के एक समाचार पत्र में शिक्षा विभाग और शिक्षा मंत्री के हवाले से छपी एक खबर की नियोजित शिक्षकों को न तो पुराने शिक्षकों की भांति वेतनमान मिलेगा और न ही सेवाशर्त. यह खबर शिक्षकों के बीच खलबली मचा कर कह दी है. ऐसे खबरों से सरकार के प्रति शिक्षकों का भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है. अगर यह खबर सही है तो शिक्षक फिर से भड़क सकते हैं और सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे. लगभग पांच साल से तैयार हो रहे सेवाशर्त अब जुलाई में लागू होगा यह और आग में घी डालने का काम कर रहा है.

सरकार को अविलंब सेवाशर्त की घोषणा करनी चाहिए. दूसरी तरफ उन्होंने कहा कि हड़ताल से वापस आने पर शिक्षकों में योगदान को लेकर भारी असमंजस बना हुआ है. भिन्न भिन्न प्रकार के पत्र जिला और राज्य से निकल रहे हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन से लेकर राज्य प्रशासन को मालूम है कि सभी शिक्षक स्थानीय नहीं होकर अलग अलग जिले से आते हैं. कई जिले रेड जोन में भी शामिल है. जहां यातायात व्यवस्था पूर्णरूपेण ठप्प है. बहुतों के पास अपनी निजी गाड़ी नहीं है फिर वो कैसे योगदान लेंगे. ऐसा होने पर संबंधित कार्यालय परिसर में भारी भीड़ हो जायेगी.

जहां सोशल डिस्टेंसिंग, लॉक डाउन और महामारी एक्ट के खुला उल्लंघन होगा और क्या गारंटी है कि उस भीड़ में कोई कोरोना पॉजिटिव नहीं है, और कोई शिक्षक इसके संक्रमण में नहीं आ सकते हैं. अतः स्थानीय एवं राज्य प्रशासन को लॉकडाउन एवं महामारी को देखते हुए पूर्व की भांति सामूहिक योगदान या व्हाट्सएप्प योगदान का विकल्प दिया जाय, ताकि संक्रमण व अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके. जब सभी शिक्षक बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर सामूहिक रूप से सूचना देकर हड़ताल पर गये तो फिर उसी तरह योगदान भी सामूहिक सुनिश्चित किया जाय.

अलग-अलग से योगदान का कोई औचित्य नहीं है. इससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी होगा और महामारी कानून का भी उल्लंघन नहीं होगा. वहीं उन्होंने बताया कि पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने से आपदा की वर्तमान स्थिति में शिक्षक गंभीर रूप से आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं. अतः हड़ताल अवधि समेत लॉकडाउन पीरियड का भी वेतन फरवरी से अप्रैल तक कुल तीन माह का वेतन एकमुश्त भुगतान अविलंब करने किया जाय.

Prabhat Khabar Digital Desk
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