थाना में नहीं हैं महिला कांस्टेबल व चौकीदार

Published at :27 Dec 2015 6:46 PM (IST)
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थाना में नहीं हैं महिला कांस्टेबल व चौकीदार

थाना में नहीं हैं महिला कांस्टेबल व चौकीदार महिला आरोपी की गिरफ्तारी में होती है परेशानीजरूरत के वक्त अन्य थाना या पुलिस लाइन से मंगवाना पड़ता है महिला कांस्टेबलप्रतिनिधि, सोनो स्थानीय थाना को महिला कांस्टेबल व महिला चौकीदार नहीं रहने से परेशानी होती है. थाना क्षेत्र में किसी महिला की गिरफ्तारी की बात सामने आ […]

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थाना में नहीं हैं महिला कांस्टेबल व चौकीदार महिला आरोपी की गिरफ्तारी में होती है परेशानीजरूरत के वक्त अन्य थाना या पुलिस लाइन से मंगवाना पड़ता है महिला कांस्टेबलप्रतिनिधि, सोनो स्थानीय थाना को महिला कांस्टेबल व महिला चौकीदार नहीं रहने से परेशानी होती है. थाना क्षेत्र में किसी महिला की गिरफ्तारी की बात सामने आ जाती है, तब सोनो थाना को अन्य थाना से महिला चौकीदार या पुलिस लाइन जमुई से महिला कांस्टेबल को बुलवाना पड़ता है़ थानाध्यक्ष दीपक कुमार इस बाबत जानकारी देते हुए बताते हैं कि परेशानी तब और अधिक बढ़ जाती है, जब किसी अचानक घटना में महिला पुलिस कर्मी की जरूरत महसूस होती है़ सोनो प्रखंड के ही चरकापत्थर थाना में चार महिला चौकीदार है. परंतु सोनो थाना को एक महिला चौकीदार भी नही है़ थाना क्षेत्र में हत्या,दहेज हत्या, मारपीट,ठगी सहित कई ऐसे मामले है. जिनमे महिला भी आरोपी होती है़ इन महिला आरोपियों को हिरासत में लेने के लिए महिला कांस्टेबल की आवश्यकता होती है़ ऐसे मामलों में सोनो थाना को दूसरे थाना पर निर्भर रहना पड़ता है़ थानाध्यक्ष बताते हैं कि नक्सल प्रभावित बड़ा क्षेत्र होने के कारण यहां के थाना को महिला कांस्टेबल की जरूरत महसूस होती है़ इसके अलावे प्रेम प्रसंग आदि के मामले में लड़की को 164 के तहत बयान करवाने तथा हिरासत में ली गयी महिला को जमुई भेजने पर महिला कांस्टेबल की जरूरत होता है़ थानाध्यक्ष बताते हैं कि विभाग थाना को महिला पुलिस कर्मी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके रहने के इंतजाम भी को करना पड़ेगा़ साथ ही कहते है कि तत्काल इस थाना को महिला चौकीदार की व्यवस्था हो जाय, तो समस्या कुछ आसान हो जायेगी़ चरकापत्थर में जो चार महिला चौकीदार है. उनकी नियुक्ति विशेष व्यवस्था के तहत की गयी थी़ इनमे अधिकांश ऐसी महिला है जिनके पति नक्सल गतिविधि में थे और बाद में मारे गये या फिर जिनके पति या परिजन नक्सल गतिविधि के कारण मारे गये. ऐसे पीड़ित परिवार को सहारा देने हेतु विधवा को चौकीदार बनाया गया था.

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