बाबा झुमराज मंदिर परिसर में गंदगी का अंबार

बाबा झुमराज मंदिर परिसर में गंदगी का अंबार -प्रशासनिक व न्यास परिषद की उपेक्षा का दंश झेल रहा है झुमराज बाबा मंदिर-आदर्श ग्राम पंचायत की घोषणा के एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस-गंदगी व कचरों के बीच श्रद्घालु प्रसाद खाने को है मजबूरफोटो 10(मंदिर क्षेत्र में फैली गंदगी के बीच प्रसाद खाते श्रद्घालु) […]
बाबा झुमराज मंदिर परिसर में गंदगी का अंबार -प्रशासनिक व न्यास परिषद की उपेक्षा का दंश झेल रहा है झुमराज बाबा मंदिर-आदर्श ग्राम पंचायत की घोषणा के एक वर्ष बाद भी स्थिति जस की तस-गंदगी व कचरों के बीच श्रद्घालु प्रसाद खाने को है मजबूरफोटो 10(मंदिर क्षेत्र में फैली गंदगी के बीच प्रसाद खाते श्रद्घालु) 10 ए(नदी में फैली गंदगी व दुषित नदी का पानी)सोनो (जमुई)-इसे विडंबना ही कहा जाए कि जो बाबा झुमराज आस्था रखने वाले हजारों श्रद्घालुआंे की मनोकामना पूर्ण करते है. उनकी ही हो रही उपेक्षा पर प्रशासन मौन है़ भीषण गंदगी के बीच श्रद्घालुओं के स्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ पर न सिर्फ प्रशासन उदासीन रवैया अपनाये हुए है. बल्कि जनप्रतिनिधियो का भी सार्थक प्रयास इस ओर नही हो रहा है़ सांसद द्वारा एक वर्ष पूर्व जिस झुमराज बाबा के महत्व को ध्यान में रखकर बटिया सहित पूरे दहियारी ग्राम पंचायत को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित किया था. उन्ही के मंदिर की विभिन्न समस्याओ पर उन्होंने गंभीरता नहीं दिखाया़ आदर्श ग्राम की घोषणा के वक्त व बाद के दो तीन बैठको में सांसद द्वारा झुमराज स्थान को पर्यटक मानचित्र पर लाकर इसके समग्र विकास की बात की गयी थी़ उस वक्त मंदिर परिसर में तमाम सुविधाओं को लाये जाने की बात की गयी थी़ सफाई को लेकर वादे किये गए थे परंतु एक वर्ष बाद भी अन्य सुविधाएं तो दूर मंदिर परिसर को गंदगी से भी मुक्त नही कराया जा सका़भीषण गंदगी की गिरफ्त में है मंदिर परिसर झुमराज बाबा मंदिर से सटे तमाम वह क्षेत्र भीषण गंदगी की गिरफ्त में है.जहां श्रद्घालु मांसाहार प्रसाद बनाकर खाते है़ प्रसाद खाने के बाद जूठे पत्तल व ग्लास यत्र तत्र फेंक दिए जाते है़ खाना का जूठन भी इसी प्रकार कही भी फेंक दिया जाता है़ जूठन की सड़ांध व पत्तलों के कचरे के बीच ही अगले दिन श्रद्घालुओं को प्रसाद बनाकर खाना पड़ता है़ इससे कई प्रकार की बीमारियां फैलने की आशंका बनी रहती है़ मंदिर के समीप स्थित नदी इतनी दूषित हो गयी है कि उसका अस्तित्व ही खतरे में है़ पहाड़ी वादियों से निकले इस नदी की कलकल धारा अतीत में लोगो को बेहद आकर्षित करती थी परंतु आज गंदगी का पर्याय बना यह नदी नाले का स्वरुप ले रहा है. जिसमे गंदे पानी का जमाव है़ लोग यहां बर्तन मांजने से लेकर जूठन फेकने से भी नही हिचकते़ शौचालय के अभाव में नदी किनारे शौच करने की लोगो की मजबूरी भी नदी को दूषित कर दिया है़ स्थिति बद से बदतर होती जा रही है़कचरा व जूठन फेकने का नहीं है कोई स्थानप्रशासन या मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा परिसर में जूठन व कचरा को फेकने संबंधी कही भी कोई दिशा निर्देश पट्टिका नहीं लगाई गयी है और न ही जूठन व कचरा फेंकने का कोई स्थान निर्धारित किया गया है़ इस कारण लोगो द्वारा यत्र तत्र जूठन आदि फेंक दिए जाते है. जिसके सड़ने से वातावरण में बदबू फैली रहती है़ जागरूकता को लेकर नहीं होता प्रयासमंदिर प्रबंधन समिति या प्रशासन द्वारा मंदिर आने वाले श्रद्घालुओं व प्रसाद खाने के लिए आने वालों को सफाई के प्रति जागरूक करने के लिए भी कभी कोई पहल नहीं होता है़ परिसर में सफाई को प्रेरित करने वाला एक भी बोर्ड या स्लोगन वगैरह नहीं लगाया गया है़ यहां तक कि जूठे पत्तल या बचे खाद्य सामग्री को कहां फेका जाना है. इस संदर्भ में भी कोई निर्देश पट्टिका नही लगायी गयी है़ जागरूकता व व्यवस्था के अभाव में लोग कही भी जूठन आदि फेंक देते है़ जूठन फेंके जाने से कौआ, चील व कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है़बलि प्रथा के कारण बनता है मांसाहार प्रसादबाबा झुमराज मंदिर में सप्ताह के तीन दिन बकरे की बलि देकर पूजा करने का रिवाज चला आ रहा है़ सोमवार,बुधवार व शुक्रवार को मंदिर में सैकड़ो बकरे की बलि दी जाती है़ बलि के दौरान बिखरे खून की भी सही व वैज्ञानिक तरीके से सफाई नहीं की जाती है जिससे खून के सड़न की बदबू से भी लोग परेशान रहते है़ मान्यता के मुताबिक बकरे का मांस यही मंदिर के आस पास बना कर प्रसाद के रूप में खाया जाता है. इसे कोई भी घर नहीं ले जा सकता़ इस रिवाज के कारण बलि के बाद बकरे का मांस प्राप्त करने के उपरांत अन्य अवशिष्ट को भी कही भी फेंक दिया जाता है़ मांस के रूप में प्रसाद को ग्रहण करने हजारो लोग यहां आते है और इसी गंदगी व अव्यवस्था के बीच मांसाहार भोजन ग्रहण करते है़आम लोगो की सेहत से जुड़ा है सफाई का मुद्दासप्ताह में तीन दिन के बलि पूजा के दौरान हजारों की संख्या में श्रद्घालु मांसाहार का प्रसाद खाने यहां आते है परंतु स्वच्छता को लेकर बदइंतजामी के कारण ये श्रद्घालु अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित होते है़ भोजन ग्रहण करने में वैसे भी पवित्रता व स्वच्छता का खास ख्याल रखा जाता है और जब बात प्रसाद की हो तो उसे ग्रहण करने में इन मानको का महत्व और भी बढ़ जाता है़ बावजूद इसके प्रशासन स्वच्छता का खास ख्याल न रखकर हजारो लोगो के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है़इनसेट न्यूज-बाबा के भरोसे ही आते है श्रद्घालु-सुविधाओ का है घोर अभावसोनो-बाबा झुमराज मंदिर आने वाले श्रद्घालु बाबा के भरोसे ही यहां आते है़ सुविधाओं के घोर अभाव के बीच उनके मन में कहीं न कहीं एक टीस जरूर रहती है कि प्राकृतिक छटाओं के बीच स्थित इस मंदिर के प्रति प्रशासन या प्रबंधन उदासीन है़ शौचालय, पेशाबखाना, पेयजल, स्नानघर जैसी मूलभूत सुविधा भी यहां नदारद है़ ऐसे में अधिक परेशानी महिला भक्तो को होती है़ पानी की समस्या को दूर करने के लिए कुछ प्रयास अवश्य किये गए परंतु वह भी खानापूर्ति ही साबित हुआ़ यहां श्रद्घालुओं के लिए न तो ठहरने की कोई व्यवस्था है और न ही समुचित छतदार चबूतरे की़ पत्ता व लकड़ी की पतली टहनियों से यहां के ग्रामीण जगह जगह झोपड़ीनुमा छत बना कर लोगो को प्रसाद बनाने का जगह मुहैया करता है और बदले में उनसे फीस लेता है़ सैकड़ों वाहनो से पाकिंर्ग शुल्क तो लिया जाता है परंतु उन्हें सुविधा के नाम पर सड़क किनारे यत्र तत्र वाहन खड़ा करने की इजाजत मिलती है़ इस तरह के बेतरतीब वाहनों के पाकिंर्ग से जाम की स्थिति बन जाती है़ दूर से आये भक्त को स्नान करने के लिए भी नदी के दूषित पानी का सहारा लेना पड़ता है या फिर सड़क किनारे चापाकल पर स्नान करना पड़ता है़ ये सारी अव्यवस्थाओ को दूर करने के जनप्रतिनिधियो के वादे दम तोड़ रही है़ जबकि मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष होने के नाते भी एसडीओ द्वारा कभी व्यवस्था की सुधि नही ली जाती है़ आदर्श ग्राम पंचायत अंतर्गत स्थित ख्यातिप्राप्त झुमराज बाबा मंदिर आज भी उद्घारक का बाट जोह रहा है़
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